क्या पप्पू यादव ने पूछा कि चुनाव के वक्त ही ईडी-सीबीआई क्यों होती है सक्रिय?
सारांश
Key Takeaways
- पप्पू यादव ने चुनाव के समय ईडी और सीबीआई की गतिविधियों पर सवाल उठाए।
- ममता बनर्जी को परेशान करने के लिए रेड की गई थी।
- राजनीतिक दबाव में सरकारी एजेंसियों का उपयोग हो रहा है।
- संविधान की रक्षा के लिए सभी को एकजुट होना चाहिए।
- दलित और आदिवासी आबादी के अधिकारों पर जोर दिया गया।
पूर्णिया, १२ जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। सांसद पप्पू यादव ने कोलकाता में आईपैक पर ईडी की रेड के संदर्भ में कहा कि यदि कुछ गलत था तो ईडी ने पहले क्यों कार्रवाई नहीं की? भाजपा के इशारे पर काम करने वाली ईडी को चुनाव के समय रेड करने का विचार क्यों आया?
उन्होंने कहा कि सभी को यह स्पष्ट है कि यह रेड ममता बनर्जी को परेशान करने के लिए की गई थी, लेकिन सीएम ममता बनर्जी किसी से डरने वाली नहीं हैं। वह भाजपा को उसी के अंदाज में जवाब देंगी।
पूर्णिया में राष्ट्र प्रेस से बातचीत के दौरान पप्पू यादव ने कहा कि ममता बनर्जी ने भाजपा को करारा जवाब दिया है। चुनाव के समय ईडी और सीबीआई का उपयोग हमेशा किया जाता है। ये एजेंसियां पांच साल तक सक्रिय क्यों नहीं रहतीं? ईडी और सीबीआई को केवल चुनाव के समय ही याद किया जाता है? भाजपा के शासन में तो चुनाव आयोग भी चुनाव लड़ता हुआ दिखाई दे रहा है। ये सबको चोर बताते हैं। ममता चोर हैं, लालू चोर हैं। यदि ममता वास्तव में चोर होतीं, तो उन्हें बहुत पहले जेल क्यों नहीं भेजा गया? ममता साहसी हैं और भाजपा को सही और मजबूत जवाब दे रही हैं।
कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर के हिंदुत्व संबंधी बयान पर पप्पू यादव ने कहा कि सनातन संस्कृति इस देश के लिए महत्वपूर्ण है, लेकिन उग्रवाद खतरनाक है। हमारा संविधान सभी को बोलने, खाने, रहने और घूमने की स्वतंत्रता देता है, लेकिन आज धर्म के नाम पर लोग बंटवारे में लगे हैं। आप उस हिंदुत्व की बात कर रहे हैं जो शोषण करता है और संविधान को नहीं मानता।
उन्होंने कहा कि हमारा देश दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और यह एक संप्रभु राष्ट्र है। यह राम, शिव, नानक, बुद्ध, कबीर, वाल्मीकि, संत रविदास, पेरियार, सावित्रीबाई फुले और महात्मा फुले की धरती है। मेरी एक अंतिम अपील है। यदि वास्तव में इस देश को सनातन या हिंदू राष्ट्र बनाने का उद्देश्य है, तो नेताओं को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि २७ प्रतिशत दलित और आदिवासी आबादी के बेटे-बेटियों से सभी जातियों के लोग विवाह करें।
पप्पू यादव ने कहा कि सबसे पहले २७ प्रतिशत दलित (एससी-एसटी) और १७ प्रतिशत ईबीसी के बेटे-बेटियों को ६७ प्रतिशत अधिकार दिए जाने चाहिए। अन्य समुदाय जैसे राजपूत, भूमिहार, कोइरी, कुर्मी और अन्य लोग आपस में विवाह करें।