क्या सपा सरकार के दौरान नियुक्तियों में सिर्फ यादवों को प्राथमिकता दी जाती थी?: ओपी राजभर

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क्या सपा सरकार के दौरान नियुक्तियों में सिर्फ यादवों को प्राथमिकता दी जाती थी?: ओपी राजभर

सारांश

ओम प्रकाश राजभर ने सपा पर सीधा हमला करते हुए कहा कि सपा सरकार के दौरान नियुक्तियों में केवल यादवों को प्राथमिकता दी जाती थी। उन्होंने भगवान राम के संदर्भ में राजनीति पर सवाल उठाया। जानिए इस विवाद के पीछे की सच्चाई।

Key Takeaways

समाजवादी पार्टी के दौरान यादवों को प्राथमिकता दी गई। भगवान राम के संदर्भ में राजनीति का सवाल उठाया गया। राजभर ने अपने समुदाय के लिए राजनीतिक मंच पर जगह बनाई। बेरोजगारी भत्ते की नई गारंटी दी गई। राजनीतिक शक्ति संतुलन में बदलाव की संभावना।

लखनऊ, १३ जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। समाजवादी पार्टी के सांसद वीरेंद्र सिंह ने हाल ही में भगवान राम को समाजवादी विचारधारा का प्रतीक बताया है। इस पर अब राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। मंगलवार को सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के प्रमुख और उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने सपा पर हमला बोला।

ओम प्रकाश राजभर ने पत्रकारों से बातचीत में कहा, "यह बयान भगवान राम के बारे में नहीं है। यह पूरी तरह से अखिलेश यादव को संदर्भित करता है ताकि वे अपने सर्कल में अपनी प्रासंगिकता बनाए रख सकें, खुद को सुर्खियों में लाने के लिए। दुनिया पहले से ही भगवान राम के बारे में जानती है। वे कौन सी नई बात बता रहे हैं?"

उन्होंने सपा पर आरोप लगाते हुए कहा, "जब समाजवादी पार्टी सत्ता में थी, तो पूरी पार्टी यादवों के हितों पर काम कर रही थी। सभी समुदायों से वोट मिलते थे, लेकिन नियुक्तियों में अलग सच्चाई थी। चाहे वह कांस्टेबल, लेखपाल या ग्राम सेवक की भर्ती हो, यादवों को प्राथमिकता दी जाती थी। समाजवादी पार्टी का हमेशा से यही तरीका रहा है। उस समय ये लोग कहाँ थे?"

राजभर ने एनडीए और पीडीए की तुलना करते हुए कहा, "समाजवादी पार्टी पीडीए मॉडल, फैमिली डेवलपमेंट अथॉरिटी पर काम करती है। एनडीए में ऐसे नेता होते हैं जो टिकट और वोट दिला सकते हैं, लेकिन विधानसभा में 2000 वोट दिलाने की क्षमता किसी में नहीं है। यही फर्क है। यहाँ हमारे पास नेता हैं, जबकि वहाँ उनके पास केवल फॉलोअर्स हैं। यहाँ संजय निषाद एक नेता हैं, जबकि वहाँ वे केवल फॉलोअर्स हैं।"

उन्होंने निषाद पार्टी के संयोजक संजय निषाद की प्रशंसा करते हुए कहा, "सबसे पहले संजय निषाद को धन्यवाद, जिन्होंने अपने समुदाय के लोगों को राजनीतिक मंच पर लाने का काम किया। जो लोग राजनीति में दूसरों के पीछे चलते थे, उन्हें अब राजनीति के तरीके सिखाए जा रहे हैं। पार्टी के नेताओं की ऊर्जा और उत्साह से आने वाले दिन दिखाते हैं कि यदि हम भगवान राम की नाव पार लगा सकते हैं, तो हम अपनी नाव भी पार लगा सकते हैं।"

राजभर ने विकसित भारत-जी राम जी बिल के प्रशिक्षण शिविर के कार्यक्रम के बारे में जानकारी देते हुए बताया, "यह कार्यक्रम महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) से जुड़ा है। विपक्ष झूठी प्रचार कर रहा है कि यह बिल महात्मा गांधी के दृष्टिकोण के खिलाफ है। असल में, गारंटी वाले काम के 100 दिन को बढ़ाकर 125 दिन कर दिया गया है। नए प्रावधानों के तहत मजदूरी सात दिनों के अंदर देने की गारंटी है। यदि भुगतान में देरी होती है, तो मजदूरों को ब्याज मिलेगा। अगर कोई मजदूर रोजगार के लिए आवेदन करता है और उसे 15 दिनों के अंदर काम नहीं मिलता, तो उसे बेरोजगारी भत्ता मिलेगा।

Point of View

बल्कि उत्तर प्रदेश की वर्तमान राजनीतिक स्थिति को भी दर्शाता है।
NationPress
30/04/2026

Frequently Asked Questions

क्या ओम प्रकाश राजभर का आरोप सही है?
राजभर ने सपा पर आरोप लगाया कि उनकी सरकार में केवल यादवों को नियुक्तियों में प्राथमिकता दी जाती थी, जो कि समाजवादी पार्टी की विचारधारा का हिस्सा है।
इस विवाद का राजनीतिक प्रभाव क्या होगा?
यह विवाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में सपा की छवि को प्रभावित कर सकता है और अन्य पार्टियों के लिए अवसर पैदा कर सकता है।
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