परिसीमन से दक्षिण भारत के प्रतिनिधित्व पर कोई असर नहीं: तमिलिसाई सुंदरराजन
सारांश
Key Takeaways
- परिसीमन से दक्षिण भारत का प्रतिनिधित्व प्रभावित नहीं होगा।
- मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के विरोध प्रदर्शन का कोई असर नहीं होगा।
- केंद्र सरकार ने इस मुद्दे पर अपनी स्थिति स्पष्ट की है।
चेन्नई, 16 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। भाजपा नेता तमिलिसाई सुंदरराजन ने उन सभी चिंताओं को खारिज कर दिया है, जिनमें कहा गया है कि परिसीमन के कारण दक्षिण भारत का संसद में प्रतिनिधित्व घट जाएगा।
उन्होंने राष्ट्र प्रेस से बातचीत में स्पष्ट किया कि ऐसी कोई स्थिति नहीं है। परिसीमन का दक्षिण भारत के प्रतिनिधित्व पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी इस बारे में पहले ही स्पष्टता दे चुके हैं कि इससे दक्षिण भारत के राज्यों को कोई फर्क नहीं पड़ेगा।
इसके साथ ही, उन्होंने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन और अन्य सांसदों द्वारा परिसीमन के विरोध पर भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि एमके स्टालिन संसद परिसर में विरोध के लिए काले कपड़े पहनकर आए हैं, लेकिन इससे उन्हें कुछ भी हासिल नहीं होगा।
उन्होंने याद दिलाया कि एमके स्टालिन ने पहले भी ताजमहल के मुद्दे पर विरोध प्रदर्शन किया था, लेकिन उनसे भी कुछ हासिल नहीं हुआ।
तमिलिसाई सुंदरराजन ने कहा कि वर्तमान में तमिलनाडु की स्थिति सबके सामने है, जहां कानून-व्यवस्था की स्थिति बेहद खराब है और महिलाओं की सुरक्षा भी बहुत कम है। मुख्यमंत्री इस दिशा में कोई कदम नहीं उठा रहे हैं; इसके विपरीत, वे अपनी विफलताओं को छुपाने के लिए परिसीमन का मुद्दा उठा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि एमके स्टालिन ऐसे मुद्दों का जिक्र कर रहे हैं जो प्रासंगिक नहीं हैं। केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि परिसीमन से दक्षिण के राज्यों को कोई नुकसान नहीं होगा।
इसके अलावा, उन्होंने डीएमके पर भी निशाना साधा, यह कहते हुए कि डीएमके ने हमेशा से कोशिश की है कि कोई भी तमिल नेता प्रधानमंत्री न बन सके। वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चिंता को भी उजागर करते हुए कहा कि मोदी ने तमिलनाडु के मुद्दों पर निरंतर ध्यान दिया है, evidenced by their 24 visits to the state.