राजस्थान हाई कोर्ट का महत्वपूर्ण निर्णय: बहू को मिली अनुकंपा नियुक्ति का समान अधिकार

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राजस्थान हाई कोर्ट का महत्वपूर्ण निर्णय: बहू को मिली अनुकंपा नियुक्ति का समान अधिकार

सारांश

राजस्थान हाई कोर्ट ने अनुकंपा नियुक्ति के मामले में एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए बहू को बेटी के समान अधिकार देने की बात की है। यह निर्णय महिलाओं के अधिकारों के लिए एक मील का पत्थर साबित हो सकता है। जानें इस फैसले के पीछे की कहानी।

Key Takeaways

  • अनुकंपा नियुक्ति में बहू को अधिकार मिला।
  • लैंगिक समानता को प्रोत्साहन।
  • न्याय में देरी पर कार्रवाई।
  • महिलाओं के अधिकारों का सुरक्षा
  • सामाजिक बदलाव का संकेत

जयपुर, 17 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। राजस्थान हाई कोर्ट ने अनुकंपा नियुक्ति के संदर्भ में एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाते हुए कहा है कि बहू को भी बेटी के समान अधिकार प्राप्त हैं। यह निर्णय लैंगिक समानता को प्रोत्साहित करने और इस विषय पर कानूनी स्पष्टता प्रदान करने वाला माना जा रहा है।

जस्टिस रवि चिरानिया ने सुंदरी देवी द्वारा दायर याचिका की सुनवाई करते हुए संबंधित विभाग को निर्देश दिया कि उन्हें बिना किसी देरी के अनुकंपा नियुक्ति प्रदान की जाए। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि आदेश का पालन नहीं किया गया तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

अदालत ने कहा कि वर्ष 2023 में ही एक खंडपीठ ने स्पष्ट किया था कि अनुकंपा नियुक्ति के मामलों में बहू को बेटी के समान अधिकार हैं। विभाग का बार-बार तकनीकी आपत्तियां उठाना न्यायिक सिद्धांतों के अनुरूप नहीं है और इससे न्याय में देरी होती है।

मामले में सुंदरी देवी लोक निर्माण विभाग के एक कर्मचारी की बहू हैं, जिनका 19 नवंबर 2016 को निधन हो गया था। उस समय उनके पति गंभीर दुर्घटना के कारण बिस्तर पर थे। परिवार की जिम्मेदारी संभालने के लिए सुंदरी देवी ने अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन किया, लेकिन विभाग ने निर्णय नहीं लिया।

स्थिति तब और गंभीर हो गई जब 25 मई 2020 को उनके पति का भी निधन हुआ, जिससे परिवार की पूरी जिम्मेदारी उन पर आ गई। इसके बावजूद, विभाग ने उनकी याचिका लंबित रखी और उन मुद्दों पर आपत्तियां उठाता रहा, जिन पर न्यायपालिका पहले ही निर्णय दे चुकी थी।

हाई कोर्ट ने विभाग को 30 दिनों के भीतर सुंदरी देवी को नियुक्ति देने का आदेश दिया है और स्पष्ट किया है कि एक दिन की भी देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अदालत ने 45 दिनों के भीतर अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश भी दिए हैं।

अदालत ने चेतावनी दी कि आदेश का पालन न करने या अनावश्यक देरी होने की स्थिति में संबंधित अधिकारियों के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई शुरू की जाएगी।

इस निर्णय को महिलाओं के अधिकारों की दिशा में एक मील का पत्थर माना जा रहा है, विशेषकर उन महिलाओं के लिए जो कठिन परिस्थितियों में परिवार की जिम्मेदारी संभाल रही हैं।

Point of View

NationPress
17/04/2026

Frequently Asked Questions

क्या बहू को अनुकंपा नियुक्ति का अधिकार है?
हाँ, राजस्थान हाई कोर्ट ने कहा है कि बहू को भी बेटी के समान अनुकंपा नियुक्ति का अधिकार है।
इस फैसले का महत्व क्या है?
यह फैसला लैंगिक समानता को बढ़ावा देता है और महिलाओं के अधिकारों की रक्षा करता है।
क्या विभाग को आदेश का पालन नहीं करने पर कार्रवाई होगी?
जी हाँ, यदि विभाग आदेश का पालन नहीं करता है तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
यह फैसला कब सुनाया गया?
यह फैसला 17 अप्रैल 2023 को सुनाया गया।
क्या यह फैसला महिलाओं के लिए महत्वपूर्ण है?
हाँ, यह फैसला उन महिलाओं के लिए महत्वपूर्ण है जो परिवार की जिम्मेदारी संभाल रही हैं।
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