पश्चिम बंगाल चुनाव: भाजपा, कांग्रेस और सीपीआई (एम) की एक या दो चरणों में मतदान की मांग, टीएमसी का विरोध
सारांश
Key Takeaways
- पश्चिम बंगाल चुनाव में भाजपा, कांग्रेस और सीपीआई (एम) ने एक या दो चरणों में मतदान की मांग की है।
- तृणमूल कांग्रेस इस मांग का समर्थन नहीं कर रही है।
- चुनाव आयोग ने सभी पार्टियों की बात सुनने का आश्वासन दिया है।
कोलकाता, 9 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के संदर्भ में राज्य की सभी राजनीतिक दलों ने चुनाव आयोग से एक या दो चरणों में मतदान कराने की अनुरोध किया है। सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस की राय इस मुद्दे पर अलग रही।
पश्चिम बंगाल की भाजपा ने पहले ही स्पष्ट किया था कि उनकी पार्टी ने चुनाव आयोग के पूर्ण बेंच से कहा है कि एक या दो चरणों में चुनाव कराना अधिक उचित होगा। कम समय में एक या अधिकतम दो चरणों में चुनाव कराना, छह हफ्तों तक चलने वाले सात से आठ चरणों के लंबे चुनावों से कहीं बेहतर होगा।
भाजपा ने सोमवार को चुनाव आयोग के समक्ष 16 बिंदुओं की मांग पेश की, जिसमें सबसे पहले यही मुद्दा था कि चुनाव जल्दी और कम चरणों में कराए जाएं।
सीपीआई (एम) और कांग्रेस के राज्य इकाइयों के प्रतिनिधिमंडल, जिन्होंने पहले दिन चुनाव आयोग की पूर्ण पीठ से मुलाकात की थी, ने भी इसी पर जोर दिया। सीपीआई(एम) के राज्य सचिव और पोलित ब्यूरो सदस्य एमडी सलीम ने कहा कि उनकी पार्टी भी यही चाहती है कि चुनाव कम चरणों में हों।
कांग्रेस के पूर्व राज्यसभा सदस्य प्रदीप भट्टाचार्य ने बताया कि कांग्रेस के लिए चरणों की संख्या से ज्यादा महत्वपूर्ण यह है कि चुनाव पूरी तरह से स्वतंत्र और निष्पक्ष हों।
तृणमूल कांग्रेस का प्रतिनिधिमंडल इस मांग का समर्थन नहीं कर रहा था। शहरी विकास मंत्री और कोलकाता के मेयर फिरहाद हकीम ने कहा कि चुनाव आयोग की पूर्ण बेंच के साथ बैठक में मतदान के चरणों पर चर्चा करना उचित नहीं था।
चुनाव आयोग ने भी कहा कि सभी राजनीतिक पार्टियों से हुई बातचीत में लगभग सभी ने एक या दो चरणों में चुनाव कराने का समर्थन किया। साथ ही आयोग से अनुरोध किया गया कि चुनाव के दौरान किसी भी प्रकार के हिंसक या असामाजिक तत्वों के हस्तक्षेप को रोका जाए और मतदाताओं को किसी भी प्रकार का डर या धमकी न हो।
भाजपा, कांग्रेस और सीपीआई (एम) का मानना है कि चुनाव जल्दी होने चाहिए, ताकि मतदाता परेशान न हों और सुरक्षा का भी ध्यान रखा जा सके। जबकि तृणमूल कांग्रेस एक या दो चरण में मतदान कराने के समर्थन में नहीं है।