1 नवंबर 2026
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पटना में 'मौन संकल्प पदयात्रा': ब्राह्मण समाज की 15 सूत्रीय मांगों पर 10 हजार लोगों का जुटान

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पटना में 'मौन संकल्प पदयात्रा': ब्राह्मण समाज की 15 सूत्रीय मांगों पर 10 हजार लोगों का जुटान

सारांश

पटना में लोकमंच की 'मौन संकल्प पदयात्रा' महज एक रैली नहीं — यह बिहार की जाति-राजनीति में एक नई आवाज़ का उदय है। ब्राह्मण कल्याण बोर्ड से लेकर परशुराम जयंती पर छुट्टी तक 15 माँगों के साथ, लोकमंच ने संकेत दिया है कि वह चुनावी समीकरणों को प्रभावित करने की क्षमता रखता है।

मुख्य बातें

1 नवंबर 2026 को पटना में लोकमंच की 'मौन संकल्प पदयात्रा' में आयोजकों के अनुसार करीब 10 हजार लोग शामिल हुए।
पदयात्रा मिलर स्कूल मैदान से शहीद स्मारक तक निकाली गई; पूर्णिया, सहरसा, मधेपुरा, मधुबनी, दरभंगा, गोपालगंज समेत कई जिलों से प्रतिभागी पहुँचे।
प्रमुख माँगों में बिहार में ब्राह्मण कल्याण बोर्ड का गठन, सरकारी पदों पर समानुपातिक भागीदारी और परशुराम जयंती पर सार्वजनिक अवकाश शामिल हैं।
लोकमंच संस्थापक आशीष कुमार उर्फ बब्बू झा ने कहा कि ब्राह्मण समाज की उपेक्षा कर बिहार में कोई सरकार नहीं बन सकती।
आगामी दिनों में रथयात्रा के माध्यम से बिहार के गाँव-गाँव तक पहुँचने की घोषणा की गई।
पूर्व मुख्यमंत्री श्रीकृष्ण सिंह को भारत रत्न देने और सहरसा में भारती-मंडन मिश्र के नाम पर विश्वविद्यालय स्थापित करने की माँग भी उठाई गई।

पटना में 1 नवंबर 2026 (रविवार) को लोकमंच के बैनर तले निकाली गई 'मौन संकल्प पदयात्रा' में आयोजकों के अनुसार करीब 10 हजार लोग शामिल हुए। लोकमंच के संस्थापक आशीष कुमार उर्फ बब्बू झा के नेतृत्व में यह पदयात्रा ब्राह्मण समाज की 15 सूत्रीय मांगों को बिहार सरकार तक पहुँचाने के उद्देश्य से आयोजित की गई थी।

पदयात्रा का मार्ग और भागीदारी

पदयात्रा मिलर स्कूल मैदान से प्रारंभ होकर आयकर गोलंबर और विधानसभा होते हुए शहीद स्मारक पर समाप्त हुई। आयोजकों के अनुसार, पूर्णिया, सहरसा, मधेपुरा, मधुबनी, दरभंगा और गोपालगंज समेत बिहार के विभिन्न जिलों से प्रतिभागी पटना पहुँचे थे। शंखनाद के साथ उपस्थित लोगों ने ब्राह्मण समाज की मांगों को पूरा कराने और संगठन को सुदृढ़ बनाने का संकल्प लिया।

आशीष कुमार 'बब्बू झा' का संबोधन

मिलर स्कूल में हुए कार्यक्रम को संबोधित करते हुए आशीष कुमार उर्फ बब्बू झा ने कहा कि बिहार में पहली बार ब्राह्मण समाज अपनी माँगों को लेकर पटना में एकत्रित हुआ है। उन्होंने कहा, 'हम वोट बैंक नहीं, बुद्धि बैंक हैं। ब्राह्मण जो बोलता है, वह करता है।' उन्होंने समाज में छुआछूत को बढ़ावा देने के आरोपों को खारिज करते हुए इसे अंग्रेजों की साजिश बताया।

झा ने भूमिहार और ब्राह्मण समाज को भगवान परशुराम का वंशज बताते हुए दोनों समाजों के बीच एकता पर जोर दिया। उन्होंने यह भी कहा कि ब्राह्मण समाज की उपेक्षा कर बिहार में कोई भी सरकार नहीं बन सकती। आगामी दिनों में रथयात्रा निकालकर गाँव-गाँव तक संगठन की पहुँच बनाने की भी घोषणा की गई।

15 सूत्रीय मांगें: प्रमुख बिंदु

लोकमंच की प्रमुख माँगों में बिहार में ब्राह्मण कल्याण बोर्ड का गठन, सरकारी पदों पर समानुपातिक भागीदारी, समाज की आर्थिक-सामाजिक-शैक्षणिक स्थिति पर श्वेत पत्र जारी करना और परशुराम जयंती पर सार्वजनिक अवकाश शामिल हैं। इसके अलावा EWS विद्यार्थियों के लिए मुफ्त कोचिंग, प्रतियोगी परीक्षाओं में अवसर की समानता, नवोदय, नेतरहाट और केंद्रीय विद्यालयों तथा इंजीनियरिंग व मेडिकल कॉलेजों में आरक्षण, संस्कृत शिक्षण संस्थानों का सुदृढ़ीकरण और वैदिक शिक्षा की व्यवस्था की माँग भी की गई है।

अन्य माँगों में पटना में चंद्रशेखर आज़ाद की प्रतिमा स्थापित करना, ब्राह्मण युवाओं को स्वरोज़गार योजनाओं से जोड़ना, रैयती भूमि पर अवैध कब्जों की जाँच, केंद्रीय स्तर पर सवर्ण आयोग का गठन, सहरसा में भारती-मंडन मिश्र के नाम पर विश्वविद्यालय की स्थापना और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री श्रीकृष्ण सिंह को भारत रत्न देने की माँग भी सम्मिलित है।

अन्य वक्ता और क्या होगा आगे

कार्यक्रम में अजय कुमार झा, राजेश कुमार झा, डब्बू मिश्र, पोलो झा, राजेश पाठक, टुनटुन झा, ज्योतिष झा, संतोष मिश्रा, पप्पू गिरी और प्रशांत झा समेत अनेक नेताओं ने भी संबोधित किया। लोकमंच ने संकेत दिया है कि यदि माँगें शीघ्र स्वीकार नहीं की गईं तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। रथयात्रा के माध्यम से बिहार के गाँव-गाँव तक अभियान पहुँचाने की योजना बनाई जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो पिछले कुछ वर्षों में OBC और EBC लामबंदी के बीच दब-सा गया था। उल्लेखनीय है कि ब्राह्मण समाज पारंपरिक रूप से BJP का मज़बूत आधार रहा है — ऐसे में यह पदयात्रा दबाव की राजनीति है या सौदेबाजी, यह देखना होगा। चुनावी गणित में 'बुद्धि बैंक' की भाषा और भूमिहार-ब्राह्मण एकता का आह्वान स्पष्ट संकेत है कि लोकमंच अपने आप को एक निर्णायक हस्तक्षेपकर्ता के रूप में स्थापित करना चाहता है।
RashtraPress
1 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पटना में 'मौन संकल्प पदयात्रा' क्यों निकाली गई?
यह पदयात्रा लोकमंच द्वारा बिहार सरकार के समक्ष ब्राह्मण समाज की 15 सूत्रीय माँगें रखने के लिए आयोजित की गई। इन माँगों में ब्राह्मण कल्याण बोर्ड का गठन, सरकारी नौकरियों में समानुपातिक भागीदारी और परशुराम जयंती पर सार्वजनिक अवकाश प्रमुख हैं।
लोकमंच की 15 सूत्रीय मांगों में क्या-क्या शामिल है?
माँगों में बिहार में ब्राह्मण कल्याण बोर्ड गठन, सरकारी पदों पर समानुपातिक भागीदारी, श्वेत पत्र, परशुराम जयंती पर अवकाश, EWS विद्यार्थियों के लिए मुफ्त कोचिंग, नवोदय-नेतरहाट-केंद्रीय विद्यालयों व इंजीनियरिंग-मेडिकल कॉलेजों में आरक्षण, संस्कृत शिक्षा का सुदृढ़ीकरण, केंद्रीय सवर्ण आयोग का गठन और सहरसा में विश्वविद्यालय स्थापना शामिल हैं।
लोकमंच के संस्थापक आशीष कुमार 'बब्बू झा' कौन हैं?
आशीष कुमार उर्फ बब्बू झा लोकमंच के संस्थापक हैं, जो बिहार में ब्राह्मण समाज के हकों की लड़ाई लड़ने का दावा करने वाला संगठन है। उन्होंने इस पदयात्रा का नेतृत्व किया और ब्राह्मण-भूमिहार एकता तथा आगामी रथयात्रा की घोषणा की।
पदयात्रा में कितने लोग शामिल हुए और कहाँ-कहाँ से आए?
आयोजकों ने करीब 10 हजार लोगों के शामिल होने का दावा किया। पूर्णिया, सहरसा, मधेपुरा, मधुबनी, दरभंगा और गोपालगंज समेत बिहार के विभिन्न जिलों से प्रतिभागी पटना पहुँचे थे।
लोकमंच आगे क्या करने की योजना बना रहा है?
लोकमंच ने घोषणा की है कि जल्द ही एक रथयात्रा निकाली जाएगी, जिसके माध्यम से बिहार के गाँव-गाँव तक संगठन की पहुँच बनाई जाएगी। यदि माँगें स्वीकार नहीं की गईं तो आंदोलन को और व्यापक रूप देने के संकेत भी दिए गए हैं।
राष्ट्र प्रेस
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