1 नवंबर 2026
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1984 सिख-विरोधी दंगे: राज्यसभा सांसद विक्रमजीत सिंह साहनी ने तिलक नगर में पीड़ितों को श्रद्धांजलि दी, रोजगार की उठाई मांग

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1984 सिख-विरोधी दंगे: राज्यसभा सांसद विक्रमजीत सिंह साहनी ने तिलक नगर में पीड़ितों को श्रद्धांजलि दी, रोजगार की उठाई मांग

सारांश

42 साल बाद भी 1984 के सिख-विरोधी दंगों के पीड़ित परिवार न्याय की राह देख रहे हैं। राज्यसभा सांसद विक्रमजीत सिंह साहनी ने तिलक नगर में श्रद्धांजलि देते हुए 2,600 से अधिक परिवारों के लिए रोजगार, फ्लैट हस्तांतरण और बिजली माफी की माँग की — और न्याय न मिलने पर भूख हड़ताल की चेतावनी दी।

मुख्य बातें

1 नवंबर 2026 को तिलक नगर स्थित शहीद गंज गुरुद्वारा में 1984 के सिख-विरोधी दंगों की 42वीं बरसी पर प्रार्थना सभा आयोजित हुई।
राज्यसभा सांसद सरदार विक्रमजीत सिंह साहनी ने कहा कि उनके परिवार के चार सदस्यों को उस दिन जिंदा जला दिया गया था।
साहनी ने दंगों को सुनियोजित साजिश बताया — पूर्व-चिन्हित सिख घर, एकसमान पाउडर और रॉड, जेलों से अपराधियों की रिहाई।
2,600 से अधिक पीड़ित परिवारों में से केवल 47–48 बच्चों को रोजगार मिला; फ्लैट आज तक पीड़ितों के नाम नहीं हुए।
साहनी ने कांग्रेस और AAP दोनों पर वादे पूरे न करने का आरोप लगाया; एलजी को लिखित माँगें सौंपीं।
न्याय न मिलने पर धरने और भूख हड़ताल की चेतावनी दी।

नई दिल्ली में 1 नवंबर 2026 को 1984 के सिख-विरोधी दंगों की 42वीं बरसी पर तिलक नगर स्थित शहीद गंज गुरुद्वारा में एक प्रार्थना सभा आयोजित की गई। राज्यसभा सांसद सरदार विक्रमजीत सिंह साहनी ने शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए पीड़ित परिवारों के लिए सम्मानजनक रोजगार, फ्लैट हस्तांतरण और बिजली बिल माफी की माँग की। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि न्याय न मिला तो वे स्वयं पीड़ितों के साथ धरने और भूख हड़ताल पर बैठेंगे।

बरसी पर शहीदों को श्रद्धांजलि

सांसद साहनी ने प्रार्थना सभा में कहा कि 1 नवंबर 1984 का दिन इतिहास के सबसे दुखद पृष्ठों में से एक है, जब हजारों निर्दोष सिखों की निर्मम हत्या की गई। उन्होंने व्यक्तिगत पीड़ा का भी उल्लेख किया — उनके अपने परिवार के चार सदस्यों को जिंदा जला दिया गया था। यह अवसर केवल स्मरण का नहीं था, बल्कि उन्होंने इसे पीड़ित परिवारों के अनसुले सवालों को फिर से उठाने का मंच बनाया।

साजिश के सबूत: साहनी के आरोप

साहनी ने कहा कि यह हिंसा कोई अचानक भड़की प्रतिक्रिया नहीं थी, बल्कि एक सुनियोजित कत्लेआम था। उन्होंने चार प्रमुख बिंदुओं का हवाला दिया: पहला, सिख घरों को पहले से चिन्हित किया गया था — यहाँ तक कि यह भी पता था कि किस इमारत की किस मंजिल पर सिख परिवार रहते हैं। दूसरा, एक जैसा सफेद पाउडर फेंका गया जिससे आग लगती थी, और एक जैसी लोहे की रॉड का इस्तेमाल किया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि '31 अक्टूबर की रात को ही ये रॉड और पाउडर कहाँ से आए, और जेलों से अपराधियों को क्यों छोड़ा गया — इसकी आज तक कोई स्वतंत्र जाँच नहीं हुई।'

पीड़ित परिवारों की तीन प्रमुख माँगें

सांसद ने पीड़ित परिवारों की ओर से तीन ठोस माँगें सामने रखीं। पहली — उन फ्लैटों का स्वामित्व हस्तांतरण, जो पीड़ितों को ₹27,000 में देने का वादा किया गया था, लेकिन जिन पर अब लाखों रुपये का ब्याज जमा हो गया है और वे आज तक उनके नाम नहीं हुए। दूसरी — बिजली बिल माफी, क्योंकि 2013 तक जो छूट मिलती थी, वह बंद कर दी गई और अब पुलिस वसूली करने आती है। तीसरी — रोजगार, क्योंकि जब 2,600 से अधिक परिवारों की सूची तैयार हुई थी, तब केवल 47 या 48 बच्चों को ही नौकरी मिली।

कांग्रेस और AAP पर निशाना

साहनी ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) और आम आदमी पार्टी (AAP) दोनों पर सीधा हमला बोला। उन्होंने कहा कि कांग्रेस 15 वर्षों तक दिल्ली में सत्ता में रही और AAP ने भी सत्ता में रहते हुए पीड़ितों को रोजगार का वादा किया, लेकिन दोनों वोटों के लिए आए और जाते समय खाली हाथ छोड़ गए। 1990 के दशक में जो नौकरियाँ दी गईं, वे भी चतुर्थ श्रेणी की थीं। उन्होंने यह भी बताया कि उन्होंने एलजी से मुलाकात कर सारी माँगें लिखित में दी हैं और केंद्र में वर्तमान सरकार से न्याय की उम्मीद जताई।

साहनी की चेतावनी और आगे की राह

सांसद ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि इन पीड़ित परिवारों को न्याय नहीं मिला तो वे स्वयं उनके साथ धरने और भूख हड़ताल पर बैठेंगे। गौरतलब है कि 42 वर्षों में पीड़ितों की दूसरी और तीसरी पीढ़ी तक आ गई है, लेकिन जमीनी हकीकत नहीं बदली। यह ऐसे समय में आया है जब दिल्ली में राजनीतिक बदलाव के बाद पीड़ित परिवार एक बार फिर अपने दशकों पुराने सवालों का जवाब माँग रहे हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

600 परिवारों में से केवल 47–48 बच्चों को रोजगार — किसी एक दल की विफलता नहीं, बल्कि व्यवस्थागत उपेक्षा का प्रमाण है। कांग्रेस और AAP, दोनों ने वोट माँगे, श्रद्धांजलियाँ दीं, और वादे किए — लेकिन फ्लैट हस्तांतरण जैसी बुनियादी प्रशासनिक प्रक्रिया भी पूरी नहीं हुई। यह ऐसे समय में उठी माँग है जब दिल्ली में नया राजनीतिक समीकरण है — असली परीक्षा यह है कि सांसद साहनी का एलजी को दिया गया लिखित ज्ञापन ठंडे बस्ते में जाता है या इस बार जवाबदेही सुनिश्चित होती है।
RashtraPress
1 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1984 के सिख-विरोधी दंगों की 42वीं बरसी पर दिल्ली में क्या हुआ?
1 नवंबर 2026 को दिल्ली के तिलक नगर स्थित शहीद गंज गुरुद्वारा में एक प्रार्थना सभा आयोजित की गई, जिसमें राज्यसभा सांसद सरदार विक्रमजीत सिंह साहनी ने शहीदों को श्रद्धांजलि दी और पीड़ित परिवारों के लिए रोजगार, फ्लैट हस्तांतरण व बिजली बिल माफी की माँग उठाई।
विक्रमजीत सिंह साहनी ने पीड़ित परिवारों के लिए कौन-सी तीन माँगें रखीं?
साहनी ने तीन प्रमुख माँगें रखीं: पहली, ₹27,000 में वादा किए गए फ्लैट पीड़ितों के नाम हस्तांतरित किए जाएँ और जमा ब्याज माफ हो; दूसरी, 2013 से बंद बिजली बिल माफी फिर बहाल की जाए; तीसरी, 2,600 से अधिक पीड़ित परिवारों के बच्चों को सम्मानजनक रोजगार दिया जाए।
1984 के दंगों में कितने परिवारों को रोजगार मिला?
साहनी के अनुसार, 2,600 से अधिक पीड़ित परिवारों की सूची बनाई गई थी, लेकिन अब तक केवल 47 या 48 बच्चों को ही नौकरी मिल पाई है। 1990 के दशक में जो नौकरियाँ दी गईं, वे भी चतुर्थ श्रेणी की थीं।
साहनी ने दंगों को सुनियोजित साजिश क्यों बताया?
साहनी के अनुसार, सिख घरों को पहले से चिन्हित किया गया था, एक जैसा सफेद पाउडर और लोहे की रॉड इस्तेमाल की गईं, और 31 अक्टूबर की रात जेलों से अपराधियों को छोड़ा गया। उन्होंने कहा कि आज तक इसकी कोई स्वतंत्र जाँच नहीं हुई।
सांसद साहनी ने न्याय न मिलने पर क्या चेतावनी दी?
साहनी ने स्पष्ट कहा कि यदि पीड़ित परिवारों को न्याय नहीं मिला तो वे स्वयं उनके साथ धरने और भूख हड़ताल पर बैठेंगे। उन्होंने एलजी को सारी माँगें लिखित में सौंपी हैं।
राष्ट्र प्रेस
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