30 अक्टूबर 2026
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1984 सिख दंगे: दिल्ली हाईकोर्ट में कमलनाथ के खिलाफ सुनवाई, सिरसा बोले— 'न्याय मिलने तक लड़ता रहूंगा'

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1984 सिख दंगे: दिल्ली हाईकोर्ट में कमलनाथ के खिलाफ सुनवाई, सिरसा बोले— 'न्याय मिलने तक लड़ता रहूंगा'

सारांश

चार दशक बाद भी 1984 के सिख-विरोधी दंगों के ज़ख्म हरे हैं। दिल्ली हाईकोर्ट में कांग्रेस नेता कमलनाथ की कथित भूमिका को लेकर सुनवाई और मंत्री सिरसा की 'जब तक न्याय नहीं' वाली प्रतिज्ञा — यह केवल एक कानूनी लड़ाई नहीं, बल्कि पीड़ित परिवारों की पीढ़ियों की पुकार है।

मुख्य बातें

दिल्ली हाईकोर्ट ने 30 अक्टूबर 2026 को 1984 सिख-विरोधी दंगों से जुड़े मामले में सुनवाई की।
दिल्ली सरकार के मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने गुरुद्वारा रकाब गंज साहिब मामले में कमलनाथ की कथित भूमिका पर कार्रवाई की माँग की।
मामले की अगली सुनवाई 30 नवंबर 2026 को निर्धारित।
इस वर्ष फरवरी में राऊज एवेन्यू कोर्ट ने कांग्रेस नेता सज्जन कुमार को उम्र कैद की सज़ा सुनाई।
मूल मामला 1 नवंबर 1984 को सरस्वती विहार, दिल्ली में जसवंत सिंह और उनके बेटे तरुणदीप सिंह को जिंदा जलाए जाने से संबंधित है।
माथुर समिति की सिफारिश पर 114 मामले फिर से खोले गए थे।

दिल्ली हाईकोर्ट ने 30 अक्टूबर 2026 को 1984 के सिख-विरोधी दंगों से जुड़े एक मामले में सुनवाई की, जिसमें दिल्ली सरकार के मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने गुरुद्वारा रकाब गंज साहिब से संबंधित घटनाक्रम में कांग्रेस नेता कमलनाथ की कथित भूमिका की जाँच और कार्रवाई की माँग की। अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 30 नवंबर की तारीख निर्धारित की है।

मंत्री सिरसा की एक्स पर पोस्ट और दलील

मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर लिखा, 'आज मैंने दिल्ली उच्च न्यायालय में अपनी याचिका के संबंध में पक्ष रखा। इस याचिका में 1984 के सिख-विरोधी दंगों के दौरान गुरुद्वारा रकाब गंज साहिब में कांग्रेस नेता कमलनाथ की कथित भूमिका पर कार्रवाई की मांग की गई है।' उन्होंने स्पष्ट किया कि मामले की अगली सुनवाई 30 नवंबर को होगी।

सिरसा ने आगे कहा, 'हो सकता है कि कांग्रेस चाहती हो कि 1984 की घटना को भुला दिया जाए, लेकिन पीड़ितों के परिवार न्याय की मांग कर रहे हैं। किसी का राजनीतिक कद उसे जवाबदेही से नहीं बचा सकता, और न ही दशकों की देरी उनके दुख को मिटा सकती है। न्यायपालिका पर मेरा अटूट विश्वास है। मैं तब तक यह लड़ाई लड़ता रहूंगा, जब तक कि न्याय नहीं मिल जाता।'

मूल मामला: 1984 की दर्दनाक घटना

यह मामला 1 नवंबर 1984 को दिल्ली के सरस्वती विहार इलाके में दो सिख नागरिकों — जसवंत सिंह और उनके बेटे तरुणदीप सिंह — को जिंदा जलाए जाने से जुड़ा है। इस जघन्य घटना की शुरुआती प्राथमिकी पंजाबी बाग थाने में दर्ज की गई थी।

गौरतलब है कि बाद में जस्टिस जी.पी. माथुर समिति की सिफारिश पर गठित विशेष जाँच दल ने इस मामले सहित 114 प्रकरणों को फिर से खोलने की सिफारिश की थी, और आरोप पत्र दाखिल किया था।

सज्जन कुमार को उम्र कैद की सज़ा

इसी श्रृंखला में इस वर्ष फरवरी में दिल्ली की राऊज एवेन्यू कोर्ट ने कांग्रेस नेता सज्जन कुमार को उम्र कैद की सज़ा सुनाई। अदालत ने 16 दिसंबर 2021 को सज्जन कुमार के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 147, 148, 149, 302, 308, 323, 395, 397, 427, 436 और 440 सहित धारा 149 के तहत आरोप तय किए थे।

यह ऐसे समय में आया है जब 1984 दंगों के पीड़ितों के परिवार चार दशकों से भी अधिक समय से न्याय की प्रतीक्षा कर रहे हैं, और न्यायिक प्रक्रियाएँ अभी भी जारी हैं।

आगे क्या होगा

मामले की अगली सुनवाई दिल्ली हाईकोर्ट में 30 नवंबर 2026 को निर्धारित है। सिरसा ने संकेत दिया है कि वे अदालत में अपनी याचिका को पूरी ताकत से आगे बढ़ाते रहेंगे। कमलनाथ की ओर से इस मामले पर अभी तक कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन अभी भी कई आरोपितों की जवाबदेही तय होनी बाकी है। कमलनाथ जैसे वरिष्ठ नेताओं के विरुद्ध याचिकाएँ राजनीतिक रंग लेती रही हैं, जिससे न्यायिक प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल उठते हैं। असली परीक्षा यह है कि क्या अदालतें राजनीतिक दबाव से निरपेक्ष रहकर पीड़ितों को तथ्य-आधारित न्याय दे पाती हैं। जब तक दोषसिद्धि और जवाबदेही के बीच की खाई नहीं पाटी जाती, पीड़ित परिवारों के लिए 'न्याय' शब्द महज एक आश्वासन बना रहेगा।
RashtraPress
30 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिल्ली हाईकोर्ट में कमलनाथ के खिलाफ किस मामले में सुनवाई हुई?
दिल्ली हाईकोर्ट में मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा की याचिका पर सुनवाई हुई, जिसमें 1984 के सिख-विरोधी दंगों के दौरान गुरुद्वारा रकाब गंज साहिब में कांग्रेस नेता कमलनाथ की कथित भूमिका पर कार्रवाई की माँग की गई है। अगली सुनवाई 30 नवंबर 2026 को होगी।
1984 सिख दंगों में सज्जन कुमार को क्या सज़ा मिली?
दिल्ली की राऊज एवेन्यू कोर्ट ने इस वर्ष फरवरी में कांग्रेस नेता सज्जन कुमार को उम्र कैद की सज़ा सुनाई। यह सज़ा 1 नवंबर 1984 को सरस्वती विहार में जसवंत सिंह और उनके बेटे तरुणदीप सिंह को जिंदा जलाने के मामले में दी गई।
मनजिंदर सिंह सिरसा ने एक्स पर क्या कहा?
सिरसा ने एक्स पर लिखा कि उन्होंने दिल्ली हाईकोर्ट में अपनी याचिका पर पक्ष रखा और न्यायपालिका पर अटूट विश्वास जताते हुए कहा कि जब तक न्याय नहीं मिलता, वे यह लड़ाई जारी रखेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि किसी का राजनीतिक कद उसे जवाबदेही से नहीं बचा सकता।
जस्टिस जी.पी. माथुर समिति ने क्या सिफारिश की थी?
जस्टिस जी.पी. माथुर समिति ने 1984 दंगों से जुड़े 114 मामलों को फिर से खोलने की सिफारिश की थी, जिसमें यह मामला भी शामिल था। समिति की सिफारिश पर ही विशेष जाँच दल गठित किया गया और आरोप पत्र दाखिल किए गए।
इस मामले की अगली सुनवाई कब है?
दिल्ली हाईकोर्ट में इस मामले की अगली सुनवाई 30 नवंबर 2026 को निर्धारित की गई है।
राष्ट्र प्रेस
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