30 अक्टूबर 2026
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ऑस्ट्राहिंद-2026: केरल में भारत-ऑस्ट्रेलिया का 14 दिवसीय संयुक्त सैन्य अभ्यास, जल-वायु-जंगल तीनों मोर्चों पर प्रशिक्षण

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ऑस्ट्राहिंद-2026: केरल में भारत-ऑस्ट्रेलिया का 14 दिवसीय संयुक्त सैन्य अभ्यास, जल-वायु-जंगल तीनों मोर्चों पर प्रशिक्षण

सारांश

'ऑस्ट्राहिंद-2026' महज एक द्विवार्षिक रस्म नहीं — यह हिंद-प्रशांत में भारत-ऑस्ट्रेलिया की साझा रणनीतिक सोच का व्यावहारिक प्रदर्शन है। केरल के जंगलों, तटों और द्वीपों में 14 दिन का यह अभ्यास बताता है कि दोनों देशों का रक्षा सहयोग युद्धक तैयारी से आगे, आपदा राहत और बहु-एजेंसी समन्वय तक पहुंच चुका है।

मुख्य बातें

भारत और ऑस्ट्रेलिया का संयुक्त सैन्य अभ्यास 'ऑस्ट्राहिंद-2026' केरल में 19 अक्टूबर से 1 नवंबर 2026 तक चल रहा है।
भारतीय सेना की गढ़वाल राइफल्स और ऑस्ट्रेलिया की 13वीं इन्फैंट्री ब्रिगेड के जवान भाग ले रहे हैं।
समुद्री और हवाई मार्ग से सैनिकों को उतारने, जंगल, तटीय और द्वीपीय क्षेत्रों में अभियान का विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
भारतीय नौसेना और केरल अग्निशमन एवं बचाव सेवा भी इस बहु-एजेंसी अभ्यास में शामिल हैं।
मानवीय सहायता और आपदा राहत (HADR) गतिविधियां भी अभ्यास का अभिन्न हिस्सा हैं।
यह अभ्यास भारत-ऑस्ट्रेलिया व्यापक रणनीतिक साझेदारी और क्वाड ढांचे को ज़मीन पर मजबूती देता है।

भारत और ऑस्ट्रेलिया की सेनाएं केरल में संयुक्त सैन्य अभ्यास 'ऑस्ट्राहिंद-2026' के तहत जल, वायु और जंगल — तीनों मोर्चों पर अपनी युद्धक क्षमता को धार दे रही हैं। 19 अक्टूबर से 1 नवंबर 2026 तक चलने वाले इस 14 दिवसीय अभ्यास में समुद्री और हवाई मार्ग से सैनिकों को अभियान क्षेत्र में उतारने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। यह द्विपक्षीय रक्षा साझेदारी की निरंतरता में एक अहम पड़ाव है।

अभ्यास में क्या हो रहा है

भारतीय सेना की गढ़वाल राइफल्स और ऑस्ट्रेलिया की 13वीं इन्फैंट्री ब्रिगेड के जवान इस अभ्यास में कंधे से कंधा मिलाकर प्रशिक्षण ले रहे हैं। सैनिकों को जंगल, द्वीपीय और तटीय क्षेत्रों में सैन्य अभियान चलाने की बारीकियां सिखाई जा रही हैं। दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों में आगे बढ़ने, अभियान की योजना बनाने और निर्धारित सैन्य लक्ष्य हासिल करने का व्यावहारिक अनुभव दोनों देशों के जवानों को मिल रहा है।

सेना के अनुसार समुद्र और हवा के रास्ते सैनिकों को उतारने के दौरान समय, समन्वय और सटीक रणनीति का विशेष महत्व होता है। इन संयुक्त अभियानों का उद्देश्य दोनों सेनाओं की आपसी कार्यकुशलता और अंतर-संचालनीयता को मजबूत करना है।

बहु-एजेंसी भागीदारी की खास बात

इस अभ्यास की एक उल्लेखनीय विशेषता यह है कि इसमें केवल दोनों देशों की थल सेनाएं ही नहीं, बल्कि भारतीय नौसेना और केरल अग्निशमन एवं बचाव सेवा भी सक्रिय रूप से भाग ले रही हैं। यह बहु-एजेंसी सहभागिता इस अभ्यास को पिछले संस्करणों से अलग बनाती है। अलग-अलग एजेंसियों के बीच संचालन-स्तरीय तालमेल विकसित करना किसी वास्तविक संकट में निर्णायक साबित होता है।

मानवीय सहायता और आपदा राहत पर जोर

'ऑस्ट्राहिंद-2026' में सैन्य अभियानों के साथ-साथ मानवीय सहायता और आपदा राहत (HADR) गतिविधियों को भी प्रमुखता दी गई है। सैनिकों को आपदा-प्रभावित क्षेत्रों में बचाव अभियान चलाने, घायलों को सुरक्षित निकालने और आपातकालीन परिस्थितियों में राहत कार्यों का समन्वय करने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब हिंद-प्रशांत क्षेत्र में जलवायु-जनित आपदाओं की आवृत्ति और तीव्रता बढ़ रही है।

गौरतलब है कि HADR का यह घटक भारत-ऑस्ट्रेलिया रक्षा सहयोग के उस व्यापक ढांचे का हिस्सा है जो केवल युद्धक तैयारी तक सीमित नहीं, बल्कि क्षेत्रीय स्थिरता और मानवीय जिम्मेदारी तक फैला हुआ है।

रक्षा सहयोग और रणनीतिक संदर्भ

यह अभ्यास भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी की उस परंपरा को आगे बढ़ाता है जिसे दोनों देशों ने हाल के वर्षों में तेजी से मजबूत किया है। दोनों देश क्वाड (Quad) के सदस्य भी हैं, और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा सहयोग की उनकी साझा प्रतिबद्धता इस तरह के संयुक्त अभ्यासों में स्पष्ट दिखती है। जंगल, द्वीप और समुद्री तट जैसे विविध भूगोल में प्रशिक्षण से दोनों देशों के जवानों को एक-दूसरे की कार्यप्रणाली, सैन्य प्रक्रियाओं और अभियान संचालन के तरीकों को गहराई से समझने का अवसर मिल रहा है।

आगे की राह

1 नवंबर 2026 को समाप्त होने वाला यह अभ्यास दोनों सेनाओं के बीच आपसी विश्वास और दीर्घकालिक रक्षा सहयोग को नई ऊंचाई देगा। इस तरह के संयुक्त अभ्यास न केवल सैन्य क्षमता को बल देते हैं, बल्कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता की दिशा में भारत की रणनीतिक उपस्थिति को भी रेखांकित करते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि HADR और बहु-एजेंसी समन्वय को शामिल करके यह स्वीकार करता है कि आधुनिक सुरक्षा चुनौतियां सैन्य-नागरिक रेखा को धुंधला कर देती हैं। केरल का चुनाव भी सांकेतिक है — यह वही राज्य है जिसने 2018 की विनाशकारी बाढ़ में बहु-एजेंसी समन्वय की कमियां देखी थीं। भारत-ऑस्ट्रेलिया रक्षा सहयोग की गति तेज़ हुई है, लेकिन इसकी असली परीक्षा यही होगी कि ये अभ्यास वास्तविक संकट में कितनी तेज़ी से साझा प्रतिक्रिया में तब्दील होते हैं।
RashtraPress
30 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'ऑस्ट्राहिंद-2026' सैन्य अभ्यास क्या है?
'ऑस्ट्राहिंद-2026' भारत और ऑस्ट्रेलिया की सेनाओं का संयुक्त 14 दिवसीय सैन्य अभ्यास है जो केरल में 19 अक्टूबर से 1 नवंबर 2026 तक आयोजित किया जा रहा है। इसमें जंगल, तटीय और द्वीपीय क्षेत्रों में युद्धक अभियान, समुद्री-हवाई सैनिक तैनाती और HADR प्रशिक्षण शामिल हैं।
इस अभ्यास में कौन-कौन सी सैन्य इकाइयां भाग ले रही हैं?
भारतीय सेना की गढ़वाल राइफल्स और ऑस्ट्रेलिया की 13वीं इन्फैंट्री ब्रिगेड इस अभ्यास की मुख्य भागीदार हैं। इसके अतिरिक्त भारतीय नौसेना और केरल अग्निशमन एवं बचाव सेवा भी बहु-एजेंसी समन्वय सत्रों में शामिल हैं।
'ऑस्ट्राहिंद-2026' में HADR को क्यों शामिल किया गया है?
मानवीय सहायता और आपदा राहत (HADR) को इसलिए शामिल किया गया है क्योंकि आधुनिक रक्षा सहयोग केवल युद्धक तैयारी तक सीमित नहीं रह गया है। सैनिकों को आपदा-प्रभावित क्षेत्रों में बचाव, घायलों की निकासी और आपातकालीन राहत समन्वय का प्रशिक्षण इस अभ्यास को व्यापक और क्षेत्रीय रूप से प्रासंगिक बनाता है।
यह अभ्यास भारत-ऑस्ट्रेलिया संबंधों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
यह अभ्यास दोनों देशों की व्यापक रणनीतिक साझेदारी और क्वाड सदस्यता के व्यावहारिक प्रकटीकरण के रूप में देखा जाता है। इससे दोनों सेनाओं की अंतर-संचालनीयता बढ़ती है और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में साझा सुरक्षा उद्देश्यों के प्रति प्रतिबद्धता प्रदर्शित होती है।
अभ्यास में समुद्री और हवाई तैनाती पर विशेष जोर क्यों?
सेना के अनुसार समुद्र और हवाई मार्ग से सैनिकों को उतारने में समय, समन्वय और सटीक रणनीति की असाधारण भूमिका होती है। यह प्रशिक्षण दोनों देशों की सेनाओं को तटीय और द्वीपीय क्षेत्रों में तेज़ व प्रभावी संयुक्त अभियान चलाने के लिए तैयार करता है।
राष्ट्र प्रेस
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