वेल्लोर का श्रीपुरम गोल्डन टेंपल: 1,500 किलो सोने से बना मां लक्ष्मी का अनूठा धाम, दीपावली पर विशेष
सारांश
मुख्य बातें
तमिलनाडु के वेल्लोर जिले में स्थित श्री लक्ष्मी नारायणी मंदिर — जिसे श्रीपुरम गोल्डन टेंपल के नाम से भी जाना जाता है — इस दीपावली पर एक बार फिर देशभर के श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। वेल्लोर जिला प्रशासन की वेबसाइट के अनुसार, इस मंदिर परिसर पर करीब 1,500 किलो (डेढ़ टन से अधिक) सोने की परत चढ़ाई गई है, जो इसे भारत के सबसे भव्य धार्मिक स्थलों में से एक बनाती है। साल 2007 में स्थापित यह मंदिर धन और वैभव की देवी मां लक्ष्मी को समर्पित है।
मंदिर का निर्माण और विस्तार
श्री नारायणी पीठम ट्रस्ट द्वारा निर्मित यह मंदिर वेल्लोर के थिरुमलाइकोडी इलाके में करीब 100 एकड़ भूमि पर फैला हुआ है। मंदिर की स्थापना 2007 में हुई थी और तब से यह लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बना हुआ है। मंदिर की भव्यता और सुनहरी आभा इसे दूर से ही पहचानने योग्य बनाती है।
यह ऐसे समय में विशेष चर्चा में आता है जब दीपावली के अवसर पर मां लक्ष्मी के प्रसिद्ध मंदिरों की ओर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है। गौरतलब है कि देश में मां लक्ष्मी के अनेक मंदिर हैं, किंतु वेल्लोर का यह गोल्डन टेंपल अपनी स्वर्णिम बनावट के कारण सबसे अलग पहचान रखता है।
सोने की अनूठी कारीगरी
वेल्लोर जिला प्रशासन की वेबसाइट के अनुसार, मंदिर की दीवारों, छत और अन्य हिस्सों पर 1,500 किलो से अधिक सोने की परत चढ़ाई गई है। इस कार्य में कुशल कारीगरों ने अत्यंत बारीकी से काम किया। सोने को पहले पतली पन्नियों में परिवर्तित किया गया और फिर हाथ से नक्काशी की गई तांबे की प्लेटों पर लगाया गया।
मंदिर की नक्काशी में पारंपरिक दक्षिण भारतीय मंदिर शैली की झलक मिलती है। धार्मिक प्रतीकों और वैदिक परंपराओं से प्रेरित डिज़ाइन इस स्वर्णिम आभा को और भी दिव्य बनाते हैं। सोने की चमक के साथ इन बारीक शिल्पकृतियों का संयोजन दर्शनार्थियों के लिए एक विलक्षण अनुभव प्रस्तुत करता है।
तारे के आकार का मार्ग और प्राकृतिक परिवेश
श्री नारायणी पीठम की वेबसाइट के अनुसार, मुख्य मंदिर तक पहुँचने के लिए एक सितारे के आकार में बने मार्ग से होकर गुज़रना पड़ता है, जो करीब 1.8 किलोमीटर लंबा है। इस मार्ग के दोनों ओर हरे-भरे वृक्ष और प्राकृतिक दृश्य हैं।
रास्ते में जगह-जगह जीवन, सत्य, सत्कर्म और मानवता से जुड़े संदेश अंकित हैं, जिन्हें पढ़ते हुए श्रद्धालु मंदिर की ओर आगे बढ़ते हैं। यह यात्रा स्वयं में एक आत्मिक अनुभव बन जाती है।
सर्वतीर्थम जलकुंड और सर्वधर्म समभाव
मंदिर परिसर में सर्वतीर्थम नामक एक पवित्र जलकुंड भी है। मान्यता है कि देश की प्रमुख नदियों का पवित्र जल यहाँ एकत्रित किया गया है। यह जलकुंड परिसर के प्रमुख आकर्षणों में से एक माना जाता है।
मंदिर की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, इसे जाति, धर्म, समुदाय और नस्ल के भेद से परे, संपूर्ण मानवता के लिए खुला रखा गया है। यही कारण है कि यहाँ न केवल तमिलनाडु बल्कि देश के विभिन्न राज्यों और विदेशों से भी श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं।
दीपावली पर विशेष महत्त्व
दीपावली के पर्व पर मां लक्ष्मी की उपासना का विशेष महत्त्व होता है। इस मौसम में श्रीपुरम गोल्डन टेंपल की स्वर्णिम आभा और भी दिव्य प्रतीत होती है, क्योंकि दीपों की रोशनी में सोने की चमक कई गुना बढ़ जाती है। इस वर्ष भी दीपावली के अवसर पर यहाँ बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आने की संभावना है। जो लोग इस पर्व पर किसी विशेष धाम के दर्शन की योजना बना रहे हैं, उनके लिए वेल्लोर का यह गोल्डन टेंपल एक अविस्मरणीय गंतव्य साबित हो सकता है।