31 अक्टूबर 2026
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पटना में लोकमंच की मौन संकल्प पदयात्रा: ब्राह्मण समाज की 15 सूत्री मांगें सरकार तक पहुँचाने का अभियान

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पटना में लोकमंच की मौन संकल्प पदयात्रा: ब्राह्मण समाज की 15 सूत्री मांगें सरकार तक पहुँचाने का अभियान

सारांश

पटना में लोकमंच रविवार को मिलर स्कूल से मौन संकल्प पदयात्रा निकालेगा। संस्थापक आशीष कुमार उर्फ बब्बू झा के नेतृत्व में यह अभियान ब्राह्मण कल्याण बोर्ड, EWS समानता और परशुराम जयंती अवकाश सहित 15 सूत्री मांगों को सरकार तक पहुँचाने का लोकतांत्रिक प्रयास है।

मुख्य बातें

लोकमंच रविवार को पटना के मिलर स्कूल से मौन संकल्प पदयात्रा निकालेगा।
पदयात्रा का नेतृत्व संस्थापक एवं अध्यक्ष आशीष कुमार उर्फ बब्बू झा करेंगे।
प्रमुख मांगों में ब्राह्मण कल्याण बोर्ड का गठन, श्वेत पत्र जारी करना और परशुराम जयंती पर राजकीय अवकाश शामिल हैं।
EWS के तहत परीक्षाओं में समान अवसर, निःशुल्क कोचिंग और गोस्वामी-गिरि समाज को EWS लाभ दिलाने की माँग भी उठाई जाएगी।
सहरसा में भारती और मंडन मिश्र के नाम पर प्रस्तावित विश्वविद्यालय की पुनर्स्थापना की माँग भी शामिल।
लोकमंच वर्ष 2004 से सामाजिक गोलबंदी के लिए सक्रिय है।

पटना में लोकमंच रविवार को मिलर स्कूल से मौन संकल्प पदयात्रा निकालेगा, जिसका उद्देश्य ब्राह्मण समाज की एकजुटता, सम्मान और अधिकारों से जुड़ी 15 सूत्री मांगों को बिहार सरकार के समक्ष रखना है। इस पदयात्रा का नेतृत्व लोकमंच के संस्थापक एवं अध्यक्ष आशीष कुमार उर्फ बब्बू झा करेंगे, और इसमें राज्य के विभिन्न जिलों से समाज के लोग शामिल होंगे।

पदयात्रा का उद्देश्य और पृष्ठभूमि

आशीष कुमार ने 31 अक्टूबर को पटना में आयोजित प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि लोकमंच वर्ष 2004 से सामाजिक गोलबंदी और समाज को संगठित करने के लिए निरंतर कार्यरत है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह पदयात्रा किसी के विरोध में नहीं, बल्कि सरकार के साथ संवाद स्थापित करने का एक शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक प्रयास है। उनके शब्दों में, 'हमारा मौन ही हमारा संकल्प है।'

उन्होंने रेखांकित किया कि वर्तमान में ब्राह्मण समाज की सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक स्थिति चिंताजनक है। शिक्षा, संस्कृति और राष्ट्र निर्माण में ऐतिहासिक योगदान के बावजूद, आज का युवा वर्ग उपेक्षा के कारण हताश है — और इस चिंता को सरकार तक पहुँचाना इस अभियान की मूल प्रेरणा है।

मुख्य मांगें

पदयात्रा के माध्यम से जो प्रमुख मांगें उठाई जाएंगी, उनमें ब्राह्मण कल्याण बोर्ड का गठन, समाज की सामाजिक, शैक्षणिक एवं आर्थिक स्थिति पर श्वेत पत्र जारी करना, वीर सपूत चंद्रशेखर आजाद की प्रतिमा की स्थापना और भगवान परशुराम जयंती पर राजकीय अवकाश घोषित करना शामिल हैं।

इसके अतिरिक्त सरकार गठन और राजनीतिक भागीदारी में समाज की सहभागिता सुनिश्चित करने तथा केंद्र स्तर पर सवर्ण आयोग के गठन की मांग भी उठाई जाएगी। ईडब्ल्यूएस (EWS) व्यवस्था के तहत विभिन्न परीक्षाओं में अवसर की समानता, नवोदय और केंद्रीय विद्यालयों में नामांकन तथा मेडिकल एवं इंजीनियरिंग की पढ़ाई में आर्थिक रूप से कमज़ोर विद्यार्थियों के लिए अवसर बढ़ाना भी मांगों में शामिल है।

आर्थिक और भूमि संबंधी मांगें

गरीब अभिभावकों के बच्चों को निःशुल्क कोचिंग उपलब्ध कराने और गोस्वामी-गिरि समाज को केंद्र एवं राज्य की सेवाओं में समान EWS लाभ दिलाने की मांग भी इस पदयात्रा का हिस्सा है। साथ ही आर्थिक रूप से कमज़ोर लोगों के लिए स्वरोज़गार की व्यवस्था, रैयती ज़मीन से अवैध कब्ज़ा हटाने और भूमिहीन परिवारों को बासगीत पर्चा दिलाने की माँग उठाई जाएगी।

सहरसा विश्वविद्यालय और ऐतिहासिक संदर्भ

सहरसा में भारती और मंडन मिश्र के नाम पर प्रस्तावित विश्वविद्यालय की पुनर्स्थापना की मांग भी इस अभियान में शामिल है। उल्लेखनीय है कि इस विश्वविद्यालय का शिलान्यास पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्रा ने किया था। यह मांग समाज की सांस्कृतिक और शैक्षणिक विरासत को पुनर्जीवित करने की व्यापक चाहत को दर्शाती है।

यह पदयात्रा समाज को जोड़ने, नई पीढ़ी में विश्वास जगाने और जायज़ मांगों के लिए शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक आवाज़ बुलंद करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। आने वाले दिनों में सरकार इन मांगों पर क्या रुख अपनाती है, यह देखने वाली बात होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

जहाँ सामाजिक रूप से प्रभावशाली मानी जाने वाली जातियाँ भी संगठित होकर राज्य से संसाधन और प्रतिनिधित्व की माँग कर रही हैं। ब्राह्मण कल्याण बोर्ड और सवर्ण आयोग जैसी मांगें EWS आरक्षण की उस बहस को आगे बढ़ाती हैं जो 2019 के संविधान संशोधन के बाद से अनुत्तरित है। यह भी गौरतलब है कि बिहार में 2025 के विधानसभा चुनाव से पहले इस तरह की गोलबंदी का राजनीतिक महत्व बढ़ जाता है। मुख्यधारा की कवरेज इस पदयात्रा को महज एक सामाजिक आयोजन के रूप में देख सकती है, लेकिन इसकी 15 सूत्री मांगों की व्यापकता — भूमि अधिकार से लेकर विश्वविद्यालय स्थापना तक — यह दर्शाती है कि यह एक सुनियोजित नीतिगत एजेंडे की शुरुआत है।
RashtraPress
31 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

लोकमंच की मौन संकल्प पदयात्रा क्या है?
यह पटना के मिलर स्कूल से निकाली जाने वाली एक शांतिपूर्ण पदयात्रा है, जिसका उद्देश्य ब्राह्मण समाज की 15 सूत्री मांगों को सरकार तक पहुँचाना है। इसका नेतृत्व लोकमंच के संस्थापक आशीष कुमार उर्फ बब्बू झा करेंगे।
लोकमंच की 15 सूत्री मांगों में क्या शामिल है?
मांगों में ब्राह्मण कल्याण बोर्ड का गठन, श्वेत पत्र जारी करना, परशुराम जयंती पर राजकीय अवकाश, EWS के तहत समान अवसर, निःशुल्क कोचिंग, गोस्वामी-गिरि समाज को EWS लाभ, भूमिहीन परिवारों को बासगीत पर्चा और सहरसा विश्वविद्यालय की पुनर्स्थापना प्रमुख हैं।
लोकमंच संगठन कब से सक्रिय है?
लोकमंच वर्ष 2004 से सामाजिक गोलबंदी और समाज को संगठित करने के लिए कार्यरत है। इसके संस्थापक आशीष कुमार उर्फ बब्बू झा हैं।
सहरसा विश्वविद्यालय की मांग क्यों उठाई जा रही है?
सहरसा में भारती और मंडन मिश्र के नाम पर प्रस्तावित विश्वविद्यालय का शिलान्यास पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्रा ने किया था, लेकिन यह अब तक स्थापित नहीं हो सका है। लोकमंच इसकी पुनर्स्थापना को समाज की सांस्कृतिक विरासत से जोड़कर देखता है।
क्या यह पदयात्रा किसी राजनीतिक दल के विरोध में है?
नहीं। लोकमंच के अध्यक्ष आशीष कुमार ने स्पष्ट किया है कि यह पदयात्रा किसी के विरोध में नहीं है, बल्कि सरकार के साथ संवाद स्थापित करने और समाज की जायज़ मांगों को शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक तरीके से सामने रखने का प्रयास है।
राष्ट्र प्रेस
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