पटना में लोकमंच की मौन संकल्प पदयात्रा: ब्राह्मण समाज की 15 सूत्री मांगें सरकार तक पहुँचाने का अभियान
सारांश
मुख्य बातें
पटना में लोकमंच रविवार को मिलर स्कूल से मौन संकल्प पदयात्रा निकालेगा, जिसका उद्देश्य ब्राह्मण समाज की एकजुटता, सम्मान और अधिकारों से जुड़ी 15 सूत्री मांगों को बिहार सरकार के समक्ष रखना है। इस पदयात्रा का नेतृत्व लोकमंच के संस्थापक एवं अध्यक्ष आशीष कुमार उर्फ बब्बू झा करेंगे, और इसमें राज्य के विभिन्न जिलों से समाज के लोग शामिल होंगे।
पदयात्रा का उद्देश्य और पृष्ठभूमि
आशीष कुमार ने 31 अक्टूबर को पटना में आयोजित प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि लोकमंच वर्ष 2004 से सामाजिक गोलबंदी और समाज को संगठित करने के लिए निरंतर कार्यरत है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह पदयात्रा किसी के विरोध में नहीं, बल्कि सरकार के साथ संवाद स्थापित करने का एक शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक प्रयास है। उनके शब्दों में, 'हमारा मौन ही हमारा संकल्प है।'
उन्होंने रेखांकित किया कि वर्तमान में ब्राह्मण समाज की सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक स्थिति चिंताजनक है। शिक्षा, संस्कृति और राष्ट्र निर्माण में ऐतिहासिक योगदान के बावजूद, आज का युवा वर्ग उपेक्षा के कारण हताश है — और इस चिंता को सरकार तक पहुँचाना इस अभियान की मूल प्रेरणा है।
मुख्य मांगें
पदयात्रा के माध्यम से जो प्रमुख मांगें उठाई जाएंगी, उनमें ब्राह्मण कल्याण बोर्ड का गठन, समाज की सामाजिक, शैक्षणिक एवं आर्थिक स्थिति पर श्वेत पत्र जारी करना, वीर सपूत चंद्रशेखर आजाद की प्रतिमा की स्थापना और भगवान परशुराम जयंती पर राजकीय अवकाश घोषित करना शामिल हैं।
इसके अतिरिक्त सरकार गठन और राजनीतिक भागीदारी में समाज की सहभागिता सुनिश्चित करने तथा केंद्र स्तर पर सवर्ण आयोग के गठन की मांग भी उठाई जाएगी। ईडब्ल्यूएस (EWS) व्यवस्था के तहत विभिन्न परीक्षाओं में अवसर की समानता, नवोदय और केंद्रीय विद्यालयों में नामांकन तथा मेडिकल एवं इंजीनियरिंग की पढ़ाई में आर्थिक रूप से कमज़ोर विद्यार्थियों के लिए अवसर बढ़ाना भी मांगों में शामिल है।
आर्थिक और भूमि संबंधी मांगें
गरीब अभिभावकों के बच्चों को निःशुल्क कोचिंग उपलब्ध कराने और गोस्वामी-गिरि समाज को केंद्र एवं राज्य की सेवाओं में समान EWS लाभ दिलाने की मांग भी इस पदयात्रा का हिस्सा है। साथ ही आर्थिक रूप से कमज़ोर लोगों के लिए स्वरोज़गार की व्यवस्था, रैयती ज़मीन से अवैध कब्ज़ा हटाने और भूमिहीन परिवारों को बासगीत पर्चा दिलाने की माँग उठाई जाएगी।
सहरसा विश्वविद्यालय और ऐतिहासिक संदर्भ
सहरसा में भारती और मंडन मिश्र के नाम पर प्रस्तावित विश्वविद्यालय की पुनर्स्थापना की मांग भी इस अभियान में शामिल है। उल्लेखनीय है कि इस विश्वविद्यालय का शिलान्यास पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्रा ने किया था। यह मांग समाज की सांस्कृतिक और शैक्षणिक विरासत को पुनर्जीवित करने की व्यापक चाहत को दर्शाती है।
यह पदयात्रा समाज को जोड़ने, नई पीढ़ी में विश्वास जगाने और जायज़ मांगों के लिए शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक आवाज़ बुलंद करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। आने वाले दिनों में सरकार इन मांगों पर क्या रुख अपनाती है, यह देखने वाली बात होगी।