मानहानि मामले में पवन खेड़ा असम क्राइम ब्रांच के सामने पेश, सुप्रीम कोर्ट से मिली है अंतरिम सुरक्षा
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा गुरुवार, 23 जुलाई को असम पुलिस की क्राइम ब्रांच के समक्ष पेश हुए। यह पेशी असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की पत्नी रिनिकी भुइयां सरमा द्वारा दर्ज कराई गई मानहानि शिकायत के सिलसिले में हुई। खेड़ा नई दिल्ली से गुवाहाटी पहुँचे और जाँच एजेंसी के बुलावे पर क्राइम ब्रांच मुख्यालय में उपस्थित हुए।
मुख्य घटनाक्रम
क्राइम ब्रांच कार्यालय पहुँचने से पहले मीडिया से बात करते हुए खेड़ा ने कहा, 'मुझे जारी किए गए नोटिस के जवाब में क्राइम ब्रांच के सामने पेश हुआ हूँ। इससे पहले मैंने जाँच एजेंसी को बताया था कि मेरी तबीयत ठीक नहीं है और पार्टी के पहले से तय कार्यक्रम भी हैं। उन्होंने मेरा अनुरोध स्वीकार कर लिया।' उन्होंने स्पष्ट किया कि वह जाँच में पूरा सहयोग कर रहे हैं।
गौरतलब है कि क्राइम ब्रांच ने उन्हें 17 जुलाई को पेश होने का निर्देश दिया था, क्योंकि वह पहले की तय तारीखों पर उपस्थित नहीं हो पाए थे। असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अनुसार, उस दिन खेड़ा बेंगलुरु में पार्टी के 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम में शामिल थे, जिसमें लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी भी उपस्थित होने वाले थे।
मामले की पृष्ठभूमि
यह मामला रिनिकी भुइयां सरमा द्वारा गुवाहाटी क्राइम ब्रांच पुलिस स्टेशन में दर्ज कराई गई शिकायत पर आधारित है। शिकायत में आरोप लगाया गया कि खेड़ा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस और सोशल मीडिया पर उनकी नागरिकता की स्थिति, विदेशी पासपोर्ट और विदेश में वित्तीय हितों के बारे में कथित तौर पर अपमानजनक और असत्य बयान दिए।
इस शिकायत के आधार पर असम पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कई धाराओं के अंतर्गत एफआईआर दर्ज की, जिनमें धोखाधड़ी, जालसाजी, जाली दस्तावेजों का वास्तविक के रूप में उपयोग, झूठे बयान देना, जानबूझकर अपमान करना और मानहानि से संबंधित प्रावधान शामिल हैं।
सुप्रीम कोर्ट से सुरक्षा
खेड़ा ने इस मामले में सर्वोच्च न्यायालय से गिरफ्तारी के विरुद्ध अंतरिम सुरक्षा हासिल कर ली है। यह ऐसे समय में आया है जब वह पहले भी कई बार जाँच में शामिल हो चुके हैं और क्राइम ब्रांच के अधिकारी उनसे पूछताछ कर चुके हैं।
राजनीतिक संदर्भ
यह मामला केंद्र-राज्य राजनीतिक तनाव की व्यापक पृष्ठभूमि में देखा जा रहा है। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस / INC) का रुख है कि यह कार्रवाई राजनीति से प्रेरित है, जबकि असम सरकार का कहना है कि जाँच कानूनी प्रक्रिया के तहत हो रही है। आगे की जाँच के परिणाम इस मामले की दिशा तय करेंगे।