23 जुलाई 2026
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मानहानि मामले में पवन खेड़ा असम क्राइम ब्रांच के सामने पेश, सुप्रीम कोर्ट से मिली है अंतरिम सुरक्षा

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मानहानि मामले में पवन खेड़ा असम क्राइम ब्रांच के सामने पेश, सुप्रीम कोर्ट से मिली है अंतरिम सुरक्षा

सारांश

कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा 23 जुलाई को गुवाहाटी में असम क्राइम ब्रांच के सामने पेश हुए — यह पेशी मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की पत्नी रिनिकी भुइयां सरमा की मानहानि शिकायत से जुड़ी है। खेड़ा को सर्वोच्च न्यायालय से गिरफ्तारी के विरुद्ध अंतरिम सुरक्षा पहले से हासिल है।

मुख्य बातें

कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा 23 जुलाई को असम पुलिस क्राइम ब्रांच , गुवाहाटी के समक्ष पेश हुए।
पेशी रिनिकी भुइयां सरमा (पत्नी: मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ) की मानहानि शिकायत के तहत हुई।
असम पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं के अंतर्गत एफआईआर दर्ज की है, जिसमें मानहानि, जालसाजी और झूठे बयान देने के प्रावधान शामिल हैं।
खेड़ा ने 17 जुलाई को पेश होने से छूट माँगी थी — उस दिन वह बेंगलुरु में पार्टी कार्यक्रम में थे।
खेड़ा को सर्वोच्च न्यायालय से गिरफ्तारी के विरुद्ध अंतरिम सुरक्षा प्राप्त है।

कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा गुरुवार, 23 जुलाई को असम पुलिस की क्राइम ब्रांच के समक्ष पेश हुए। यह पेशी असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की पत्नी रिनिकी भुइयां सरमा द्वारा दर्ज कराई गई मानहानि शिकायत के सिलसिले में हुई। खेड़ा नई दिल्ली से गुवाहाटी पहुँचे और जाँच एजेंसी के बुलावे पर क्राइम ब्रांच मुख्यालय में उपस्थित हुए।

मुख्य घटनाक्रम

क्राइम ब्रांच कार्यालय पहुँचने से पहले मीडिया से बात करते हुए खेड़ा ने कहा, 'मुझे जारी किए गए नोटिस के जवाब में क्राइम ब्रांच के सामने पेश हुआ हूँ। इससे पहले मैंने जाँच एजेंसी को बताया था कि मेरी तबीयत ठीक नहीं है और पार्टी के पहले से तय कार्यक्रम भी हैं। उन्होंने मेरा अनुरोध स्वीकार कर लिया।' उन्होंने स्पष्ट किया कि वह जाँच में पूरा सहयोग कर रहे हैं।

गौरतलब है कि क्राइम ब्रांच ने उन्हें 17 जुलाई को पेश होने का निर्देश दिया था, क्योंकि वह पहले की तय तारीखों पर उपस्थित नहीं हो पाए थे। असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अनुसार, उस दिन खेड़ा बेंगलुरु में पार्टी के 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम में शामिल थे, जिसमें लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी भी उपस्थित होने वाले थे।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला रिनिकी भुइयां सरमा द्वारा गुवाहाटी क्राइम ब्रांच पुलिस स्टेशन में दर्ज कराई गई शिकायत पर आधारित है। शिकायत में आरोप लगाया गया कि खेड़ा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस और सोशल मीडिया पर उनकी नागरिकता की स्थिति, विदेशी पासपोर्ट और विदेश में वित्तीय हितों के बारे में कथित तौर पर अपमानजनक और असत्य बयान दिए।

इस शिकायत के आधार पर असम पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कई धाराओं के अंतर्गत एफआईआर दर्ज की, जिनमें धोखाधड़ी, जालसाजी, जाली दस्तावेजों का वास्तविक के रूप में उपयोग, झूठे बयान देना, जानबूझकर अपमान करना और मानहानि से संबंधित प्रावधान शामिल हैं।

सुप्रीम कोर्ट से सुरक्षा

खेड़ा ने इस मामले में सर्वोच्च न्यायालय से गिरफ्तारी के विरुद्ध अंतरिम सुरक्षा हासिल कर ली है। यह ऐसे समय में आया है जब वह पहले भी कई बार जाँच में शामिल हो चुके हैं और क्राइम ब्रांच के अधिकारी उनसे पूछताछ कर चुके हैं।

राजनीतिक संदर्भ

यह मामला केंद्र-राज्य राजनीतिक तनाव की व्यापक पृष्ठभूमि में देखा जा रहा है। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस / INC) का रुख है कि यह कार्रवाई राजनीति से प्रेरित है, जबकि असम सरकार का कहना है कि जाँच कानूनी प्रक्रिया के तहत हो रही है। आगे की जाँच के परिणाम इस मामले की दिशा तय करेंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो सामान्य मानहानि प्रकरणों से अलग राजनीतिक आयाम जोड़ता है। सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दी गई अंतरिम सुरक्षा यह संकेत देती है कि न्यायालय ने खेड़ा की याचिका में प्रथम दृष्टया कुछ आधार पाया। मुख्यधारा की कवरेज अक्सर इस पहलू को नज़रअंदाज़ करती है कि BNS की जिन धाराओं के तहत FIR दर्ज हुई है, उनमें से कई गंभीर आपराधिक प्रावधान हैं — जो एक मानहानि विवाद में असामान्य रूप से व्यापक कानूनी जाल है।
RashtraPress
23 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पवन खेड़ा के खिलाफ असम में मानहानि का मामला क्या है?
यह मामला असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की पत्नी रिनिकी भुइयां सरमा द्वारा गुवाहाटी क्राइम ब्रांच में दर्ज कराई गई शिकायत पर आधारित है। शिकायत में आरोप है कि खेड़ा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस और सोशल मीडिया पर उनकी नागरिकता, विदेशी पासपोर्ट और विदेश में वित्तीय हितों को लेकर कथित तौर पर अपमानजनक और असत्य बयान दिए।
असम पुलिस ने पवन खेड़ा पर कौन-सी धाराएँ लगाई हैं?
असम पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कई धाराओं के तहत FIR दर्ज की है, जिनमें धोखाधड़ी, जालसाजी, जाली दस्तावेजों का वास्तविक के रूप में उपयोग, झूठे बयान देना, जानबूझकर अपमान करना और मानहानि से संबंधित प्रावधान शामिल हैं।
क्या पवन खेड़ा को गिरफ्तारी का डर है?
खेड़ा ने सर्वोच्च न्यायालय से इस मामले में गिरफ्तारी के विरुद्ध अंतरिम सुरक्षा हासिल कर ली है, जो फिलहाल उन्हें गिरफ्तारी से बचाती है। वह पहले भी कई बार जाँच में शामिल हो चुके हैं और क्राइम ब्रांच उनसे पूछताछ कर चुकी है।
पवन खेड़ा 17 जुलाई को क्राइम ब्रांच के सामने क्यों नहीं पेश हुए?
असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अनुसार, उस दिन खेड़ा बेंगलुरु में पार्टी के 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम में शामिल थे, जिसमें राहुल गांधी भी उपस्थित होने वाले थे। खेड़ा ने स्वास्थ्य समस्याओं और पूर्व-निर्धारित राजनीतिक कार्यक्रमों का हवाला देकर छूट माँगी थी, जिसे जाँच एजेंसी ने स्वीकार किया।
इस मामले में आगे क्या होगा?
23 जुलाई की पेशी के बाद जाँच का अगला चरण क्राइम ब्रांच की पूछताछ और एकत्र साक्ष्यों पर निर्भर करेगा। सर्वोच्च न्यायालय की अंतरिम सुरक्षा जारी रहने तक खेड़ा की गिरफ्तारी संभव नहीं है; मामले की आगे की सुनवाई न्यायालय के कार्यक्रम के अनुसार होगी।
राष्ट्र प्रेस
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