शिलांग में ईडी दफ्तर पर पेट्रोल बम हमला, 48 घंटों में दूसरी बार सरकारी इमारत निशाने पर
सारांश
मुख्य बातें
मेघालय की राजधानी शिलांग में 22 अक्टूबर 2026 की तड़के मोटरसाइकिल पर सवार दो अज्ञात हमलावरों ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के कार्यालय वाली इमारत पर पेट्रोल बम फेंके। यह घटना पूर्वी खासी हिल्स जिले के लैंगकिर्डिंग इलाके में हुई और मात्र दो दिनों में शिलांग में सरकारी प्रतिष्ठानों पर यह दूसरा ऐसा हमला है।
घटनाक्रम: क्या हुआ और कब
पुलिस अधीक्षक विवेक सिएम ने बताया कि इमारत के ढाँचे को कोई नुकसान नहीं पहुँचा है। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि इमारत के अंदर तैनात सुरक्षा गार्ड को गुरुवार सुबह तक इस घटना की भनक तक नहीं थी। पुलिस ने संदिग्धों की पहचान के लिए सीसीटीवी फुटेज खंगालना शुरू कर दिया है और मामला दर्ज कर लिया गया है।
यह हमला ठीक एक दिन पहले 21 अक्टूबर को लैतुमखराह इलाके में स्वास्थ्य विभाग के कार्यालय पर हुए इसी तरह के पेट्रोल बम हमले के बाद हुआ है। इससे पहले 20 अक्टूबर को केन्च ट्रेस, कीटिंग रोड और लैतुमखराह में पेट्रोल बम हमले की तीन संदिग्ध घटनाएँ सामने आई थीं।
शिलांग में हमलों का बढ़ता सिलसिला
गौरतलब है कि यह कोई अकेली घटना नहीं है। सितंबर 2026 में भी सरकारी कार्यालयों, पुलिस परिसरों और वाहनों को निशाना बनाकर कई हमले किए गए थे। उस दौर में खनिज संसाधन निदेशालय, लुमडिएंगजरी पुलिस स्टेशन, स्वास्थ्य सेवा निदेशालय और नोंगमाइनसोंग में एक पुलिस बूथ पेट्रोल बम और आगजनी की चपेट में आए थे।
इससे भी पहले अगस्त में खासी स्टूडेंट्स यूनियन की रैली के दौरान हुई हिंसा के बाद उपद्रवियों ने नेशनल पीपुल्स पार्टी (NPP) के कार्यालय और नोंगमाइनसोंग में एक पुलिस चौकी पर पेट्रोल बम फेंके थे। यह ऐसे समय में आया है जब शिलांग पहले से ही सामाजिक तनाव के दौर से गुज़र रहा है।
सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासन की प्रतिक्रिया
ताज़ा हमले के बाद पुलिस अधीक्षक सिएम ने बताया कि लैंगकिर्डिंग इलाके में गश्त बढ़ा दी गई है। सितंबर में हुए हमलों के बाद राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की थी, सीसीटीवी फुटेज की जाँच की थी और गश्त तेज़ की थी — बावजूद इसके हमले जारी हैं, जो प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बनती जा रही है।
जाँच की स्थिति और अनसुलझे सवाल
अधिकारियों ने अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि हाल की ये घटनाएँ आपस में जुड़ी हैं या नहीं, और न ही इन हमलों के पीछे किसी साझा मकसद का पता चल सका है। पुलिस दोषियों की पहचान करने और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने की दिशा में काम कर रही है।
सरकारी प्रतिष्ठानों पर लगातार हो रहे इन हमलों ने मेघालय में कानून-व्यवस्था की स्थिति को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आने वाले दिनों में जाँच की दिशा और सुरक्षा उपायों की प्रभावशीलता पर सबकी निगाहें टिकी रहेंगी।