माली में बड़ा आतंकी हमला: राजधानी बमाको के एयरपोर्ट समेत कई सैन्य ठिकानों पर गोलीबारी

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माली में बड़ा आतंकी हमला: राजधानी बमाको के एयरपोर्ट समेत कई सैन्य ठिकानों पर गोलीबारी

सारांश

माली की राजधानी बमाको के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे समेत कई सैन्य ठिकानों पर शनिवार को हथियारबंद आतंकी समूह ने एक साथ हमला किया। सेना हेलिकॉप्टर से गश्त कर रही है। किसी संगठन ने जिम्मेदारी नहीं ली। माली एक दशक से सुरक्षा संकट में है।

Key Takeaways

  • 25 अप्रैल, शनिवार को माली की राजधानी बमाको के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे समेत कई सैन्य ठिकानों पर हथियारबंद आतंकियों ने हमला किया।
  • माली के सैन्य प्रमुख जनरल असिमी गोइटा के निवास क्षेत्र काटी में भी दोनों तरफ से गोलीबारी हुई और कई घरों को नुकसान पहुंचा।
  • अब तक किसी आतंकी संगठन ने जिम्मेदारी नहीं ली; माली में अलकायदा और इस्लामिक स्टेट से जुड़े गुट 2012 से सक्रिय हैं।
  • रूस के वैगनर ग्रुप ने जून 2025 में मिशन समाप्त किया; अब अफ्रीका कॉर्प्स माली में तैनात है जो रूसी रक्षा मंत्रालय के नियंत्रण में है।
  • माली में 2020 और 2021 में दो सैन्य तख्तापलट हो चुके हैं; जुलाई 2025 में बिना चुनाव गोइटा को 5 वर्ष का राष्ट्रपति कार्यकाल दिया गया।
  • माली की सेना ने हेलिकॉप्टर से गश्त शुरू की और हवाई अड्डे पर सुरक्षा बढ़ाई; पूरे देश में हाई अलर्ट जारी।

नई दिल्ली, 25 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। पश्चिमी अफ्रीकी देश माली में शनिवार को एक बड़े आतंकी हमले ने पूरे देश को हिला कर रख दिया। हथियारबंद आतंकी समूह ने राजधानी बमाको के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे समेत देश के कई सैन्य ठिकानों पर एक साथ हमला बोला। माली की सेना ने इन हमलों की पुष्टि की है, हालांकि अब तक किसी भी आतंकी संगठन ने इसकी जिम्मेदारी नहीं ली है।

हमले का पूरा घटनाक्रम

शनिवार की सुबह से ही बमाको और उसके आसपास के कई इलाकों में गोलीबारी की आवाजें सुनाई देने लगीं। बमाको इंटरनेशनल एयरपोर्ट के आसपास भी भारी फायरिंग हुई, जिससे वहां अफरा-तफरी का माहौल बन गया। स्थानीय निवासी जान बचाने के लिए घरों के भीतर दुबके रहे और सड़कें सूनी पड़ गईं।

माली के सैन्य प्रमुख जनरल असिमी गोइता जिस काटी क्षेत्र में रहते हैं, वहां भी दोनों पक्षों के बीच जमकर गोलीबारी हुई। इस संघर्ष में आसपास के कई घरों को भारी नुकसान पहुंचा है। हमलावरों ने अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे तक घुसपैठ करने की कोशिश भी की, लेकिन सुरक्षाबलों ने उन्हें रोक दिया।

सेना की प्रतिक्रिया और सुरक्षा व्यवस्था

हमले की खबर मिलते ही माली की सेना तत्काल हरकत में आ गई। हेलिकॉप्टरों के जरिए प्रभावित इलाकों में हवाई गश्त शुरू की गई। अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर सुरक्षा बलों की तैनाती कई गुना बढ़ा दी गई। पूरे देश में सेना को हाई अलर्ट पर रखा गया है।

माली की सैन्य सरकार ने आम नागरिकों से घरों में रहने और सतर्क रहने की अपील की है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, काफी देर तक रुक-रुक कर गोलीबारी होती रही, जिससे राजधानी में भय का माहौल बना रहा।

माली का दशक भर पुराना सुरक्षा संकट

माली पिछले एक दशक से भी अधिक समय से गंभीर सुरक्षा संकट से जूझ रहा है। 2012 से ही अलकायदा और इस्लामिक स्टेट से जुड़े आतंकी गुट, अलगाववादी और सामुदायिक आपराधिक संगठन देश में हिंसा फैलाते आ रहे हैं। इस अस्थिरता के बीच देश में 2020 और 2021 में दो बार सैन्य तख्तापलट हो चुका है।

गौरतलब है कि जुलाई 2025 में माली की सैन्य सरकार ने बिना किसी चुनाव के जनरल गोइटा को पांच वर्ष के लिए राष्ट्रपति पद पर नियुक्त कर दिया। इसके अलावा यह भी प्रावधान किया गया कि वे जितनी बार चाहें इस कार्यकाल को नवीनीकृत कर सकते हैं। इससे पहले जुंटा ने मार्च 2024 तक सत्ता आम नागरिकों को सौंपने का वादा किया था, जो पूरा नहीं हुआ।

रूस से गहरे होते संबंध और पश्चिम से दूरी

माली की सैन्य सरकार ने अपने पड़ोसी देशों नाइजर और बुर्किना फासो की तर्ज पर रूस के साथ अपने राजनीतिक और सैन्य रिश्ते मजबूत किए हैं। वहीं, अपने पूर्व औपनिवेशिक शासक फ्रांस और कई पश्चिमी देशों से माली ने दूरी बना ली है।

रूस का वैगनर ग्रुप 2021 से इस्लामिक स्टेट के खिलाफ लड़ाई में माली की सेना का साथ दे रहा था। जून 2025 में वैगनर ग्रुप ने अपना मिशन समाप्त करने की घोषणा की। इसके बाद रूसी रक्षा मंत्रालय के सीधे नियंत्रण वाले संगठन अफ्रीका कॉर्प्स ने वैगनर की जगह ले ली।

विश्लेषण: हमले का व्यापक संदर्भ

यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब माली में रूस समर्थित सैन्य सरकार की पकड़ कमजोर होती दिख रही है। वैगनर ग्रुप के जाने के बाद से सुरक्षा की जिम्मेदारी अफ्रीका कॉर्प्स पर आई, लेकिन आतंकी गतिविधियों में कोई उल्लेखनीय कमी नहीं आई है। विश्लेषकों का मानना है कि बिना चुनाव के सत्ता पर काबिज जुंटा के खिलाफ बढ़ता असंतोष और आतंकी संगठनों की सक्रियता माली को और अधिक अस्थिर बना सकती है।

इस घटनाक्रम पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर बनी हुई है। आने वाले दिनों में माली सरकार की प्रतिक्रिया और सुरक्षा स्थिति पर नजर रखना जरूरी होगा।

Point of View

बल्कि उस व्यापक संकट की परिणति है जो तब पैदा होता है जब कोई सैन्य जुंटा लोकतंत्र की बजाय ताकत के बल पर शासन करे। रूस के वैगनर ग्रुप के जाने के बाद अफ्रीका कॉर्प्स की तैनाती के बावजूद स्थिति सुधरी नहीं — यह साफ संकेत है कि विदेशी भाड़े के सैनिकों पर निर्भरता दीर्घकालिक समाधान नहीं है। जुंटा ने लोकतंत्र की बहाली का वादा तोड़कर गोइटा को बिना चुनाव पांच साल का राष्ट्रपति बनाया — इस राजनीतिक दमन और आर्थिक बदहाली ने आतंकियों को नई जमीन दी है। अफ्रीका के साहेल क्षेत्र में यह पैटर्न — तख्तापलट, रूस से गठजोड़, पश्चिम से दूरी और बढ़ती आतंकी हिंसा — माली, नाइजर और बुर्किना फासो तीनों में एक जैसा दिखता है, जो वैश्विक सुरक्षा के लिए गहरी चिंता का विषय है।
NationPress
25/04/2026

Frequently Asked Questions

माली में आतंकी हमला कब और कहां हुआ?
माली में यह आतंकी हमला शनिवार, 25 अप्रैल को हुआ। हमलावरों ने राजधानी बमाको के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे और देश के कई सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया।
माली हमले की जिम्मेदारी किसने ली?
अब तक किसी भी आतंकी संगठन ने इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है। माली में अलकायदा और इस्लामिक स्टेट से जुड़े गुट पहले से सक्रिय हैं।
माली में सुरक्षा संकट क्यों है?
माली 2012 से अलकायदा, इस्लामिक स्टेट और अलगाववादी समूहों के हमलों से जूझ रहा है। 2020 और 2021 में दो सैन्य तख्तापलट के बाद देश में राजनीतिक अस्थिरता और बढ़ गई है।
माली में रूस की क्या भूमिका है?
रूस का वैगनर ग्रुप 2021 से माली की सेना की मदद कर रहा था। जून 2025 में वैगनर के मिशन समाप्त करने के बाद रूसी रक्षा मंत्रालय के नियंत्रण वाले अफ्रीका कॉर्प्स ने उसकी जगह ली।
माली की सैन्य सरकार ने लोकतंत्र बहाली का वादा क्यों नहीं निभाया?
माली के जुंटा ने मार्च 2024 तक सत्ता नागरिकों को सौंपने का वादा किया था, लेकिन जुलाई 2025 में बिना चुनाव के जनरल गोइटा को पांच साल के लिए राष्ट्रपति बना दिया गया।
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