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'फूलन' को टीआईएफएफ 2026 में स्टैंडिंग ओवेशन, रिची मेहता बोले — मिथकों से परे एक इंसान की कहानी

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'फूलन' को टीआईएफएफ 2026 में स्टैंडिंग ओवेशन, रिची मेहता बोले — मिथकों से परे एक इंसान की कहानी

सारांश

रिची मेहता की 'फूलन' ने टोरंटो में दर्शकों को रुला दिया और खड़े होकर तालियाँ बजाने पर मजबूर किया। यह फिल्म फूलन देवी की किंवदंती को नहीं, उस 17 वर्षीय लड़की को दिखाती है जो किंवदंती बनने से पहले 2,000 पुलिसकर्मियों से घिरी थी — एक ऐसा कोण जो पहले कभी पर्दे पर नहीं आया।

मुख्य बातें

रिची मेहता की फिल्म 'फूलन' का वर्ल्ड प्रीमियर 51वें TIFF में सितंबर 2026 में हुआ और दर्शकों ने स्टैंडिंग ओवेशन दिया।
फिल्म फूलन देवी की आत्मकथा पर आधारित है और उनके जीवन के 48 घंटों के संघर्ष पर केंद्रित है।
उस दौर को दर्शाया गया है जब 2,000 सशस्त्र पुलिसकर्मियों ने 17 वर्षीय फूलन को एक गाँव में घेर लिया था।
युवा फूलन देवी की भूमिका अभिनेत्री स्नेहा कुमारी ने निभाई है।
फिल्म का निर्माण अमेज़न एमजीएम स्टूडियोज और नमाह पिक्चर्स ने किया है।

फिल्ममेकर रिची मेहता की बहुचर्चित फिल्म 'फूलन' को 51वें टोरंटो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल (TIFF) में जबरदस्त स्टैंडिंग ओवेशन मिला। सितंबर 2026 में हुए इस वर्ल्ड प्रीमियर में दर्शक भावुक होकर खड़े हो गए — यह प्रतिक्रिया इस बात का संकेत है कि फूलन देवी की कहानी आज भी दुनिया भर के दिलों को छूती है। मेहता का मानना है कि फूलन देवी एक ऐसी लीजेंड थीं, जिन्हें इतिहास ने गलत समझा, और उनके इर्द-गिर्द बने मिथकों को तोड़कर एक असली इंसान को पर्दे पर लाना उनके लिए अनिवार्य था।

फिल्म का केंद्र बिंदु

फिल्म 'फूलन', फूलन देवी की आत्मकथा 'आई, फूलन — द ऑटोबायोग्राफी ऑफ इंडियाज बैंडिट क्वीन' से प्रेरित है। यह फिल्म उनकी संपूर्ण जीवनी प्रस्तुत करने की बजाय उन 48 घंटों के तीव्र संघर्ष पर केंद्रित है, जब 2,000 सशस्त्र पुलिसकर्मियों ने 17 वर्षीय फूलन को एक गाँव में घेर लिया था। यह संरचनात्मक चुनाव दर्शकों को किसी किंवदंती के जन्म की उस कच्ची, मानवीय क्षण से रूबरू कराता है, जिसे इतिहास ने अक्सर अनदेखा किया।

रिची मेहता के शब्दों में

राइटर-डायरेक्टर और प्रोड्यूसर रिची मेहता ने टीआईएफएफ में वर्ल्ड प्रीमियर के अवसर पर कहा, 'फूलन देवी की कहानी ऐसी है, जिसे ईमानदारी और बिना किसी समझौते के दिखाना ज़रूरी है। मैं उनके जीवन के उस खास दौर की ओर खिंचा चला आया — वे शुरुआती साल जब दुनिया उन्हें नहीं जानती थी, और वह दौर भी जब वह लीजेंड बन चुकी थीं।'

उन्होंने आगे कहा, 'मेरे लिए ज़रूरी था कि सारी कहानियों को हटाकर उनके अंदर के इंसान को दिखाया जाए। मुश्किलों के सामने डटे रहना, सम्मान की तलाश और अपनी आवाज़ उठाने की हिम्मत — ये विषय हमेशा के लिए हैं और हर जगह आज भी उतनी ही मजबूती से दिलों को छूते हैं।'

दर्शकों की भावनात्मक प्रतिक्रिया पर मेहता ने कहा, 'टीआईएफएफ में दर्शकों को खड़े होकर तालियाँ बजाते और भावुक होते देखकर लगता है कि फूलन की कहानी ने ठीक वैसे ही लोगों के दिल को छुआ है, जैसा हम चाहते थे। मुझे उम्मीद है कि मैंने उनकी आवाज़ और उनकी कहानी के साथ वह इंसाफ किया है, जैसा वह चाहती थीं।'

कलाकार और निर्माण

फिल्म में युवा फूलन देवी की भूमिका अभिनेत्री स्नेहा कुमारी ने निभाई है। फिल्म का निर्माण अमेज़न एमजीएम स्टूडियोज और नमाह पिक्चर्स ने मिलकर किया है। मेहता ने 'पोचर' के बाद एक बार फिर अमेज़न एमजीएम स्टूडियोज के साथ काम किया है और उन्होंने स्टूडियो को 'एक सच्चे क्रिएटिव पार्टनर' के रूप में रेखांकित किया, जो फिल्ममेकर के विज़न का साथ देते हैं।

फूलन देवी की विरासत और आज की प्रासंगिकता

गौरतलब है कि फूलन देवी — जिन्हें 'बैंडिट क्वीन' भी कहा जाता था — की कहानी दशकों से विवाद, सहानुभूति और बहस का केंद्र रही है। शेखर कपूर की 1994 की फिल्म 'बैंडिट क्वीन' के बाद यह पहला बड़ा अंतरराष्ट्रीय सिनेमाई प्रयास है जो उनके जीवन को केंद्र में रखता है। रिची मेहता की यह फिल्म उस कोण से कहानी कहती है जो पहले अनकहा रहा — एक किशोर लड़की का संघर्ष, जो बाद में इतिहास बन गई। फिल्म का वर्ल्ड प्रीमियर संकेत देता है कि यह अंतरराष्ट्रीय दर्शकों के बीच भी प्रभावशाली पैठ बना सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक अलग सिनेमाई भाषा का दावा है — जहाँ पूरी जीवनी नहीं, एक निर्णायक 48 घंटे का क्षण ही पूरी कहानी कह देता है। यह संरचनात्मक चुनाव साहसी है और फूलन की मानवीयता को किंवदंती से ऊपर रखता है। हालाँकि, असली परीक्षा तब होगी जब यह फिल्म भारतीय दर्शकों के सामने आएगी — जहाँ फूलन देवी की छवि आज भी राजनीतिक और सामाजिक संवेदनशीलता का विषय है। टीआईएफएफ का स्टैंडिंग ओवेशन अंतरराष्ट्रीय स्वीकृति की गारंटी है, लेकिन घरेलू प्रासंगिकता का फैसला अभी बाकी है।
RashtraPress
17 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रिची मेहता की फिल्म 'फूलन' किस पर आधारित है?
फिल्म 'फूलन', फूलन देवी की आत्मकथा 'आई, फूलन — द ऑटोबायोग्राफी ऑफ इंडियाज बैंडिट क्वीन' से प्रेरित है। यह उनकी पूरी जीवनी न दिखाकर उन 48 घंटों पर केंद्रित है जब 2,000 सशस्त्र पुलिसकर्मियों ने 17 वर्षीय फूलन को एक गाँव में घेर लिया था।
फिल्म 'फूलन' का वर्ल्ड प्रीमियर कहाँ हुआ?
फिल्म 'फूलन' का वर्ल्ड प्रीमियर सितंबर 2026 में कनाडा के टोरंटो में आयोजित 51वें टोरंटो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल (TIFF) में हुआ, जहाँ दर्शकों ने स्टैंडिंग ओवेशन दिया।
'फूलन' फिल्म में मुख्य किरदार कौन निभा रही हैं?
फिल्म में युवा फूलन देवी की भूमिका अभिनेत्री स्नेहा कुमारी ने निभाई है। फिल्म का निर्माण अमेज़न एमजीएम स्टूडियोज और नमाह पिक्चर्स ने संयुक्त रूप से किया है।
रिची मेहता ने फूलन देवी पर फिल्म क्यों बनाई?
रिची मेहता का कहना है कि फूलन देवी एक ऐसी लीजेंड थीं जिन्हें लोगों ने गलत समझा। उनके अनुसार, फूलन के इर्द-गिर्द बने मिथकों को हटाकर उनके अंदर के इंसान को दिखाना — उनका संघर्ष, सम्मान की तलाश और आवाज़ उठाने की हिम्मत — यही इस फिल्म का मूल उद्देश्य है।
क्या यह पहली बार है जब फूलन देवी पर फिल्म बनी है?
नहीं, इससे पहले शेखर कपूर ने 1994 में 'बैंडिट क्वीन' बनाई थी जो फूलन देवी के जीवन पर आधारित थी। रिची मेहता की 'फूलन' एक अलग दृष्टिकोण अपनाती है और उनके जीवन के एक विशिष्ट और अनकहे 48-घंटे के संकट पर केंद्रित है।
राष्ट्र प्रेस
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