'पल भर के लिए' का IFFM में वर्ल्ड प्रीमियर, विनीत कुमार सिंह बोले — 'संस्कृतियों की सीमाएँ पार करेगी यह कहानी'
सारांश
मुख्य बातें
अभिनेता विनीत कुमार सिंह की बहुप्रतीक्षित फिल्म 'पल भर के लिए' का वर्ल्ड प्रीमियर इंडियन फिल्म फेस्टिवल ऑफ मेलबर्न (IFFM) में होने जा रहा है — एक ऐसा अंतरराष्ट्रीय मंच जो भारतीय सिनेमा को वैश्विक दर्शकों से जोड़ता है। 27 जुलाई 2026 को मुंबई से इस घोषणा के साथ विनीत ने उम्मीद जताई कि फिल्म की कहानी देश और संस्कृति की सीमाओं से परे दर्शकों के दिलों तक पहुँचेगी।
मुख्य घटनाक्रम
फिल्म को आधिकारिक तौर पर IFFM में वर्ल्ड प्रीमियर के लिए चुना गया है। यह उत्सव ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न में आयोजित होता है और दक्षिण गोलार्ध में भारतीय सिनेमा का सबसे बड़ा प्रदर्शनी मंच माना जाता है। फिल्म का निर्देशन जाने-माने फिल्मकार और डिज़ाइनर विक्रम फडनिस ने किया है।
मुख्य कलाकारों में विनीत कुमार सिंह के साथ अभिनेत्री सैयामी खेर और अभिनेता ताहिर राज भसीन अहम भूमिकाओं में नज़र आएँगे। फिल्म के बारे में कहा जा रहा है कि यह समाज से जुड़े एक संवेदनशील विषय को केंद्र में रखती है।
विनीत कुमार सिंह की प्रतिक्रिया
प्रीमियर की घोषणा पर विनीत ने कहा, 'किसी भी फिल्म का सफर जब किसी अंतरराष्ट्रीय मंच से शुरू होता है, तो वह बेहद खास अनुभव होता है। 'पल भर के लिए' ऐसी कहानी है, जो पूरी टीम के बहुत करीब है और समाज से जुड़े अहम विषय को सामने लाती है।'
उन्होंने आगे कहा, 'मुझे बेहद खुशी है कि फिल्म की पहली मुलाकात दर्शकों से इंडियन फिल्म फेस्टिवल ऑफ मेलबर्न जैसे बड़े मंच पर होगी। मुझे उम्मीद है कि यह कहानी अलग-अलग देशों और संस्कृतियों के लोगों के दिलों तक पहुँचेगी।'
विनीत का सिनेमाई सफर
विनीत कुमार सिंह ने अपने करियर में लगातार ऐसे किरदारों को चुना है जो दर्शकों की स्मृति में टिक जाते हैं। 'मुक्काबाज', 'छावा', 'सुपरबॉयज ऑफ मालेगांव' और 'जाट' जैसी फिल्मों में उनके अभिनय को आलोचकों ने सराहा है। गौरतलब है कि 'पल भर के लिए' उनकी पहली फिल्म होगी जिसका प्रीमियर किसी अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में होगा।
हिंदी भाषा पर विनीत का पक्ष
विनीत इन दिनों अपने भाषाई दृष्टिकोण को लेकर भी चर्चा में हैं। उन्होंने बॉलीवुड में स्क्रिप्ट रोमन लिपि में लिखे जाने की प्रवृत्ति पर खुलकर राय रखी है। उन्होंने कहा था, 'मैं हमेशा से चाहता हूँ कि मेरे डायलॉग्स देवनागरी लिपि में दिए जाएँ। मैं उसी में पढ़ने और समझने में सहज महसूस करता हूँ। मेरा मानना है कि जब फिल्म हिंदी में बन रही है, तो उसकी स्क्रिप्ट और डायलॉग भी हिंदी की अपनी लिपि में होने चाहिए।'
उन्होंने यह भी जोड़ा था, 'इस पर हर कलाकार की अपनी पसंद हो सकती है, लेकिन मुझे लगता है कि हिंदी फिल्मों का काफी काम आज भी अंग्रेज़ी में होता है। हिंदी भाषा को उसकी अपनी लिपि में सम्मान मिलना चाहिए।'
आगे क्या
IFFM में वर्ल्ड प्रीमियर के बाद फिल्म की भारतीय रिलीज़ की तारीख का ऐलान अभी बाकी है। अंतरराष्ट्रीय मंच पर मिलने वाली प्रतिक्रिया से फिल्म की रिलीज़ रणनीति पर असर पड़ सकता है। यह देखना दिलचस्प होगा कि विक्रम फडनिस का यह निर्देशन-डेब्यू वैश्विक दर्शकों के बीच कैसी छाप छोड़ता है।