16 अक्टूबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

फुरसुंगी कचरा संकट: सांसद सुप्रिया सुले ने सरकार को घेरा, हर महीने समीक्षा का ऐलान

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
फुरसुंगी कचरा संकट: सांसद सुप्रिया सुले ने सरकार को घेरा, हर महीने समीक्षा का ऐलान

सारांश

पुणे के फुरसुंगी में कचरे का संकट अब राजनीतिक मुद्दा बन गया है। सांसद सुप्रिया सुले ने सरकार की निष्क्रियता पर सीधा हमला बोला और मासिक समीक्षा का ऐलान किया। महंगाई, पक्षपाती एफआईआर और महाराष्ट्र में बढ़ते आंदोलनों को जोड़कर उन्होंने राज्य सरकार को चौतरफा घेरा।

मुख्य बातें

सांसद सुप्रिया सुले ने 1 सितंबर को फुरसुंगी कचरा डंपिंग संकट पर सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की माँग की।
सुले ने घोषणा की कि इस मुद्दे की हर महीने समीक्षा होगी; 15 दिन बाद अधिकारियों से पुनः बैठक निर्धारित है।
आदित्य ठाकरे की एफआईआर पर सुले ने सरकार पर पक्षपातपूर्ण रवैये का आरोप लगाया और ED-CBI के दुरुपयोग का मुद्दा उठाया।
GDP आँकड़ों पर सवाल उठाते हुए सुले ने महंगाई , बेरोज़गारी और खाद्य कीमतों में वृद्धि को आम जनता की असली समस्या बताया।
मनोज जरांगे के मराठा आरक्षण आंदोलन सहित ओबीसी, आदिवासी और महिला आंदोलनों को राज्य सरकार की संपूर्ण विफलता का प्रतीक बताया।
महिला आरक्षण विधेयक के ज़मीनी क्रियान्वयन की माँग की; कहा — 'खोखले वादे नहीं, कार्रवाई चाहिए।'

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की सांसद सुप्रिया सुले ने 1 सितंबर को पुणे के फुरसुंगी क्षेत्र में बढ़ते कचरा डंपिंग संकट पर सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यह समस्या लगातार विकराल रूप लेती जा रही है और प्रशासन की निष्क्रियता अब स्वीकार्य नहीं है। सुले ने चेतावनी दी कि जब तक ठोस कार्रवाई नहीं होती, वे हर महीने इस मुद्दे की सार्वजनिक समीक्षा करती रहेंगी।

फुरसुंगी में कचरे की स्थिति और सुले की माँग

सुले के अनुसार, फुरसुंगी का कचरा डंपिंग क्षेत्र अब गंभीर पर्यावरणीय और सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट का केंद्र बन चुका है। उन्होंने बताया कि वे इस मुद्दे पर सरकारी अधिकारियों से मिल चुकी हैं और 15 दिन बाद पुनः बैठक निर्धारित है। उनका कहना है कि अब इस समस्या की मासिक समीक्षा की जाएगी ताकि सरकार पर निरंतर दबाव बना रहे और मामला ठंडे बस्ते में न जाए।

आदित्य ठाकरे की एफआईआर पर पक्षपात का आरोप

सुले ने आदित्य ठाकरे के खिलाफ दर्ज एफआईआर को लेकर सरकार पर दोहरे मानदंड अपनाने का आरोप लगाया। उनका कहना था कि सत्ता में बैठे लोग युवाओं और आम नागरिकों के विरुद्ध तो तत्परता से कानूनी कार्रवाई करते हैं, परंतु राजनीतिक रसूख रखने वालों को संरक्षण मिलता है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जिन नेताओं पर पहले प्रवर्तन निदेशालय (ED) और केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) जैसी केंद्रीय एजेंसियाँ लगाई गईं, बाद में उन्हीं को राजनीतिक गठबंधन में शामिल कर लिया गया।

GDP आँकड़ों पर सवाल, महंगाई और बेरोज़गारी की चिंता

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जीडीपी वृद्धि संबंधी बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए सुले ने कहा कि सरकारी आँकड़ों से ज़्यादा ज़मीनी हकीकत महत्वपूर्ण है। उन्होंने महंगाई, बेरोज़गारी और भ्रष्टाचार को आम जनता की असली पीड़ा बताया। रोज़मर्रा की ज़रूरी वस्तुओं की बढ़ती कीमतों, खाद्य महंगाई और टैक्सी-रिक्शा किराए में वृद्धि का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि ये संकेत स्पष्ट करते हैं कि आर्थिक नीतियों का लाभ आम नागरिक तक नहीं पहुँच रहा।

डीजे प्रतिबंध और त्योहारी विवाद

आगामी त्योहारों के दौरान डीजे पर प्रतिबंध को लेकर उठ रहे विरोध पर सुले ने मुख्यमंत्री से सीधे हस्तक्षेप की माँग की। उनका सुझाव था कि सभी पक्षों को साथ लेकर बातचीत से मध्यमार्ग निकाला जाए, जिससे त्योहारों का उत्साह भी बना रहे और सामाजिक सौहार्द भी न बिगड़े।

आरक्षण, परिसीमन और महाराष्ट्र में बढ़ते आंदोलन

सुले ने महिला आरक्षण विधेयक का उल्लेख करते हुए कहा कि उनकी पार्टी ने संसद में इसे सर्वसम्मति से पारित कराने में सहयोग दिया था, लेकिन अब इसे केवल वादों तक सीमित रखना स्वीकार्य नहीं — ज़मीनी क्रियान्वयन ज़रूरी है। मनोज जरांगे के मराठा आरक्षण अनशन का संदर्भ देते हुए उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में एक साथ ओबीसी समाज, आदिवासी छात्र, पेपर लीक पीड़ित और महिलाएँ — सभी सड़कों पर हैं। उनके अनुसार, यह स्थिति राज्य सरकार की संपूर्ण विफलता का प्रमाण है। यह ऐसे समय में आया है जब महाराष्ट्र में विधानसभा चुनावों की तैयारियाँ ज़ोर पकड़ रही हैं और विपक्ष सत्तापक्ष को घेरने की हर कोशिश कर रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

और सुले की 'मासिक समीक्षा' की घोषणा दबाव की राजनीति का हिस्सा है, न कि ठोस समाधान। असली सवाल यह है कि विपक्ष के दबाव के बिना क्या यह मुद्दा एजेंडे पर रहता? महाराष्ट्र में एक साथ इतने आंदोलनों का उभरना — मराठा, ओबीसी, आदिवासी, पेपर लीक पीड़ित — यह संकेत देता है कि सत्तापक्ष के लिए विधानसभा चुनाव से पहले जनाक्रोश को थामना आसान नहीं होगा। सुले का यह प्रेस कॉन्फ्रेंस कई मुद्दों को एक साथ उठाने की रणनीतिक कोशिश है, लेकिन इससे यह भी ज़ाहिर होता है कि विपक्ष के पास अभी तक कोई एकजुट वैकल्पिक एजेंडा नहीं है।
RashtraPress
16 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

फुरसुंगी कचरा संकट क्या है और यह इतना गंभीर क्यों है?
पुणे के फुरसुंगी इलाके में स्थित कचरा डंपिंग क्षेत्र लंबे समय से पर्यावरण और सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए खतरा बना हुआ है। सांसद सुप्रिया सुले के अनुसार, स्थिति लगातार बिगड़ रही है और सरकार की ओर से अब तक पर्याप्त कार्रवाई नहीं हुई है।
सुप्रिया सुले ने सरकार से क्या माँग की है?
सुले ने सरकार से फुरसुंगी कचरा संकट पर तत्काल हस्तक्षेप की माँग की है। उन्होंने घोषणा की कि वे 15 दिन बाद अधिकारियों से पुनः मिलेंगी और इस मुद्दे की हर महीने सार्वजनिक समीक्षा करेंगी।
आदित्य ठाकरे की एफआईआर पर सुले ने क्या कहा?
सुले ने आरोप लगाया कि सरकार आम नागरिकों और युवाओं के विरुद्ध तो एफआईआर दर्ज करती है, लेकिन राजनीतिक रसूख वालों को संरक्षण मिलता है। उन्होंने यह भी कहा कि जिन नेताओं पर पहले ED और CBI लगाई गई, बाद में उन्हें राजनीतिक गठबंधन में शामिल कर लिया गया।
मनोज जरांगे के आंदोलन पर सुले का क्या रुख है?
सुले ने मनोज जरांगे के मराठा आरक्षण अनशन के साथ-साथ ओबीसी, आदिवासी छात्रों, पेपर लीक पीड़ितों और महिलाओं के आंदोलनों का उल्लेख किया। उनका कहना था कि इतने वर्गों का एक साथ सड़कों पर उतरना राज्य सरकार की पूर्ण विफलता को दर्शाता है।
महिला आरक्षण विधेयक पर सुले की क्या माँग है?
सुले ने कहा कि उनकी पार्टी ने संसद में महिला आरक्षण विधेयक को सर्वसम्मति से पारित कराने में सहयोग दिया था। अब उनकी माँग है कि इसे केवल वादों तक सीमित न रखा जाए, बल्कि ज़मीनी स्तर पर वास्तविक रूप से लागू किया जाए।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 सप्ताह पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 3 महीने पहले
  4. 4 महीने पहले
  5. 4 महीने पहले
  6. 4 महीने पहले
  7. 7 महीने पहले
  8. 1 साल पहले