दौंड में कन्या भ्रूण हत्या: 2 साल में 500 गर्भपात, सांसद सुप्रिया सुले ने माँगी कड़ी कार्रवाई
सारांश
मुख्य बातें
पुणे जिले के दौंड तालुका में कन्या भ्रूण हत्या और अवैध भ्रूण लिंग जाँच का गंभीर मामला सामने आया है, जिसमें पिछले दो वर्षों के दौरान कथित तौर पर करीब 500 गर्भपात किए जाने की जानकारी मिली है। बारामती लोकसभा क्षेत्र की सांसद सुप्रिया सुले ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर सरकार से निष्पक्ष जाँच और आरोपियों के विरुद्ध कठोरतम कार्रवाई की माँग की है।
मामले का मूल घटनाक्रम
आरोप है कि दौंड तालुका में एक पोर्टेबल सोनोग्राफी मशीन के ज़रिये भ्रूण का लिंग निर्धारित कर कन्या भ्रूण की हत्या की जा रही थी। यह कृत्य प्री-कन्सेप्शन एंड प्री-नेटल डायग्नोस्टिक टेक्निक्स (PCPNDT) अधिनियम का सीधा उल्लंघन है। मामले के उजागर होते ही क्षेत्र में व्यापक आक्रोश फैल गया और इसे मानवता के लिए कलंक बताया जा रहा है।
यह ऐसे समय में सामने आया है जब महाराष्ट्र सरकार 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' जैसे अभियानों पर करोड़ों रुपये खर्च कर रही है। गौरतलब है कि पुणे जिले में पहले भी भ्रूण लिंग जाँच के मामले दर्ज हो चुके हैं।
लिंगानुपात पर चिंताजनक असर
आँकड़ों के अनुसार, दौंड क्षेत्र में लिंगानुपात गिरकर प्रति 1,000 लड़कों पर केवल 824 लड़कियाँ रह गई हैं — जो राष्ट्रीय औसत से काफी नीचे है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो यह आँकड़ा और बिगड़ सकता है। इस पृष्ठभूमि में बड़े पैमाने पर जन-जागरूकता अभियान की आवश्यकता और अधिक महसूस की जा रही है।
सांसद सुले की माँग
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार गुट) की कार्यकारी अध्यक्ष और सांसद सुप्रिया सुले ने एक्स पर अपनी पोस्ट में कहा कि दोषियों पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाए। उन्होंने भ्रूण लिंग जाँच के विरुद्ध व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाने और समाज में लैंगिक समानता को बढ़ावा देने के लिए सामूहिक प्रयासों की ज़रूरत पर भी ज़ोर दिया।
पुणे में कानून-व्यवस्था पर व्यापक सवाल
यह मामला ऐसे समय आया है जब सुले पहले से ही पुणे की कानून-व्यवस्था को लेकर सरकार पर निशाना साध रही हैं। इससे पहले उन्होंने अवैध शराब त्रासदी — जिसमें 16 लोगों की मौत हो गई थी — को लेकर चल रहे विरोध-प्रदर्शनों के बीच पुणे के पुलिस कमिश्नर अमितेश कुमार को अनिवार्य छुट्टी पर भेजने की माँग की थी। उन्होंने दावा किया कि केंद्रीय गृह मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार पुणे महाराष्ट्र में अपराध के मामले में शीर्ष शहर है और देशभर में पाँचवें स्थान पर है।
आगे क्या होगा
प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग पर अब दबाव है कि वे PCPNDT अधिनियम के तहत दर्ज मामलों में त्वरित सुनवाई सुनिश्चित करें और पोर्टेबल सोनोग्राफी मशीनों के अनधिकृत उपयोग पर नकेल कसें। आलोचकों का कहना है कि बिना जवाबदेही तय किए महज़ जन-जागरूकता अभियान से यह समस्या हल नहीं होगी।