महिलाओं के खिलाफ अपराध में महाराष्ट्र दूसरे स्थान पर, शिवसेना (यूबीटी) ने 'सामना' में सरकार को कठघरे में खड़ा किया
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र में महिलाओं और बच्चियों के विरुद्ध बढ़ते अपराधों को लेकर शिवसेना (यूबीटी) ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है। पार्टी के मुखपत्र 'सामना' में 21 अगस्त 2026 को प्रकाशित संपादकीय में कहा गया कि जो महाराष्ट्र कभी महिलाओं के लिए सुरक्षित राज्य माना जाता था, वह अब देश में महिलाओं के खिलाफ अपराधों में दूसरे स्थान पर पहुँच गया है। संपादकीय में कानून-व्यवस्था की बिगड़ती स्थिति को लेकर गंभीर चिंता जताई गई और मौजूदा सरकार को सीधे जिम्मेदार ठहराया गया।
पुणे जिले की दो खौफनाक वारदातें
संपादकीय में सर्वप्रथम पुणे का उल्लेख किया गया, जिसे महाराष्ट्र की सांस्कृतिक राजधानी और शिक्षा का केंद्र माना जाता है। शिवसेना (यूबीटी) के अनुसार, राज्य अभी नसरापुर (भोर तालुका) में हुए यौन शोषण और हत्या की घटना के सदमे से उबर भी नहीं पाया था कि जुन्नर तालुका के पिंपलवंडी गाँव में एक और दिल दहला देने वाली वारदात सामने आई।
आरोप है कि 25 वर्षीय एक युवक ने 9 वर्षीय बच्ची को साइकिल सिखाने का बहाना बनाकर घर से बाहर ले गया, उसके साथ दुष्कर्म किया, बेरहमी से पीटा और उसकी हत्या कर दी। इसके बाद आरोपी ने बच्ची की लाश छिपा दी और खुद पुलिस व ग्रामीणों के साथ उसे ढूँढने के नाटक में शामिल होता रहा। अंततः सीसीटीवी फुटेज में वह बच्ची के साथ साइकिल पर दिखा, जिसके बाद उसे गिरफ्तार किया गया।
त्वरित न्याय के बावजूद अपराध नहीं थमे
पुणे ग्रामीण पुलिस प्रमुख ने 15 दिनों के भीतर चार्जशीट दाखिल करने और फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई का वादा किया है। हालाँकि 'सामना' ने सवाल उठाया कि क्या महज़ आश्वासनों से इस तरह के जघन्य अपराध रुक सकते हैं।
संपादकीय में यह भी रेखांकित किया गया कि नसरापुर मामले में 65 वर्षीय अपराधी को मात्र 58 दिनों में फाँसी की सज़ा सुनाई गई थी — फिर भी पिंपलवंडी जैसी वारदात नहीं रुकी। इससे स्पष्ट होता है कि दंड की गति से अपराध पर अंकुश नहीं लग रहा।
राज्यव्यापी आँकड़े और सरकार की स्वीकारोक्ति
'सामना' के संपादकीय में महाराष्ट्र के अन्य जिलों की घटनाओं का भी हवाला दिया गया। आँकड़ों के अनुसार, राज्य में हाल के वर्षों में बच्चों के खिलाफ हिंसा और हत्या के 23,000 से अधिक मामले दर्ज हुए हैं। यह ऐसे समय में आया है जब स्वयं मुख्यमंत्री ने विधानसभा में स्वीकार किया था कि कुल अपराध के आँकड़ों में महाराष्ट्र देश में 8वें स्थान पर है। शिवसेना (यूबीटी) ने इसे राज्य के लिए शर्मनाक बताया।
सरकार पर राजनीतिक संरक्षण का आरोप
शिवसेना (यूबीटी) ने आरोप लगाया कि अपराध के बाद पुलिस गिरफ्तारी और अदालती कार्रवाई तो होती है, लेकिन सरकार अपराध को पहले ही रोकने में विफल रही है। पार्टी ने यह भी आरोप लगाया कि अपराधियों को राजनीतिक संरक्षण मिलने के कारण उनका हौसला बढ़ा हुआ है।
संपादकीय में कहा गया कि मौजूदा सरकार इस सुरक्षा व्यवस्था के ध्वस्त होने की जिम्मेदारी से नहीं बच सकती, और मुख्यमंत्री तथा गृह विभाग जनता के आक्रोश के बावजूद निष्क्रिय बने हुए हैं।
आगे क्या होगा
पिंपलवंडी मामले में फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई की प्रक्रिया शुरू होने की उम्मीद है। गौरतलब है कि महिला सुरक्षा का मुद्दा राज्य में राजनीतिक रूप से संवेदनशील बनता जा रहा है, और विपक्ष लगातार सरकार को घेरने की कोशिश में है। यह देखना अहम होगा कि सरकार केवल प्रतिक्रियात्मक कदमों से आगे बढ़कर कोई ठोस निवारक नीति लाती है या नहीं।