27 जून 2026
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पुणे के दौंड में लिंग जांच रैकेट का भंडाफोड़: डॉक्टर समेत दो गिरफ्तार, 1 जुलाई तक पुलिस कस्टडी

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पुणे के दौंड में लिंग जांच रैकेट का भंडाफोड़: डॉक्टर समेत दो गिरफ्तार, 1 जुलाई तक पुलिस कस्टडी

सारांश

पुणे के दौंड में एसआईटी ने अवैध लिंग जांच और कन्या भ्रूण हत्या रैकेट का भंडाफोड़ करते हुए डॉक्टर समेत दो आरोपियों को गिरफ्तार किया। डॉ. शितोळे गर्भपात कराता था, जबकि एजेंट जांबले प्रतिबंधित दवाएं सप्लाई करता था। दोनों 1 जुलाई तक पुलिस कस्टडी में हैं।

मुख्य बातें

पुणे जिले के दौंड के यवत थाना क्षेत्र में अवैध लिंग जांच और कन्या भ्रूण हत्या रैकेट का पर्दाफाश हुआ।
सुमंत तुकाराम शितोळे (38 वर्ष) और बापूराव पंढरीनाथ जांबले (57 वर्ष) गिरफ्तार; दोनों 1 जुलाई 2026 तक पुलिस कस्टडी में।
शितोळे अवैध लिंग जांच के बाद गर्भवती महिलाओं का गैरकानूनी गर्भपात कराता था; जांबले प्रतिबंधित दवाएं व इंजेक्शन सप्लाई करता था।
जांच पुलिस निरीक्षक संतोष तासगावकर के नेतृत्व में एसआईटी कर रही है; SP संदीप सिंह गिल्ल के मार्गदर्शन में कार्रवाई।
पीसी-पीएनडीटी अधिनियम , जो 1 जनवरी 1996 से लागू है, के तहत लिंग जांच कराना दंडनीय अपराध है।

महाराष्ट्र के पुणे जिले के दौंड स्थित यवत थाना क्षेत्र में अवैध गर्भलिंग जांच और कन्या भ्रूण हत्या के एक सुनियोजित रैकेट का 27 जून 2026 को पर्दाफाश हुआ, जब विशेष जांच दल (एसआईटी) ने ठोस साक्ष्यों के आधार पर दो मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया। गिरफ्तार आरोपियों में एक चिकित्सक भी शामिल है, जिसे इस गैरकानूनी नेटवर्क का केंद्रीय कड़ी माना जा रहा है।

कौन हैं गिरफ्तार आरोपी

पुलिस ने डॉ. सुमंत तुकाराम शितोळे (आयु 38 वर्ष, निवासी पारगांव, दौंड) और बापूराव पंढरीनाथ जांबले (आयु 57 वर्ष, निवासी वासुंदे, दौंड) को हिरासत में लिया। दोनों को शनिवार को दौंड न्यायालय में पेश किया गया, जहां न्यायालय ने उन्हें 1 जुलाई 2026 तक पुलिस अभिरक्षा में रखने का आदेश दिया।

रैकेट कैसे काम करता था

जांच में सामने आया है कि डॉ. शितोळे मुख्य आरोपी के माध्यम से गर्भवती महिलाओं की अवैध लिंग जांच कराता था और फिर उन्हें अपने अस्पताल में लाकर गैरकानूनी गर्भपात करता था। बापूराव जांबले इस रैकेट में एजेंट की भूमिका निभाता था और गर्भपात के लिए आवश्यक प्रतिबंधित दवाइयों तथा इंजेक्शन की आपूर्ति करता था। यह नेटवर्क कथित तौर पर लंबे समय से सक्रिय था।

जांच का नेतृत्व किसने किया

यह कार्रवाई पुलिस अधीक्षक संदीप सिंह गिल्ल, अपर पुलिस अधीक्षक गणेश बिराजदार, पुलिस उपाधीक्षक राजेंद्र मायने और बापूसाहेब दडस के मार्गदर्शन में की गई। मामले की विस्तृत जांच पुलिस निरीक्षक संतोष तासगावकर के नेतृत्व में गठित एसआईटी टीम कर रही है।

कानूनी पृष्ठभूमि

भारत में गर्भस्थ शिशु के लिंग की जांच करना या करवाना एक दंडनीय अपराध है। इसे रोकने के लिए सरकार ने पीसी-पीएनडीटी अधिनियम (गर्भधारण-पूर्व और प्रसव-पूर्व नैदानिक तकनीकें अधिनियम) लागू किया है, जो 1 जनवरी 1996 से पूर्ण रूप से प्रभावी है। इस कानून का मुख्य उद्देश्य कन्या भ्रूण हत्या पर अंकुश लगाना और देश के गिरते लिंगानुपात में सुधार करना था। उल्लंघन पर कठोर सजा और भारी जुर्माने का प्रावधान है।

आगे क्या होगा

एसआईटी की जांच जारी है और 1 जुलाई 2026 को दोनों आरोपियों को पुनः न्यायालय में पेश किया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार, इस रैकेट में अन्य संलिप्त व्यक्तियों की पहचान के लिए गहन पूछताछ की जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो दर्शाते हैं कि तीन दशक पुराना कानून अभी भी पूरी तरह प्रभावी नहीं हो सका है। रैकेट में डॉक्टर, एजेंट और दवा आपूर्तिकर्ता की त्रिस्तरीय संरचना यह बताती है कि यह अपराध सुनियोजित और व्यावसायिक रूप ले चुका है। असली सवाल यह है कि स्थानीय स्वास्थ्य प्रशासन और नियामक तंत्र इतने लंबे समय तक इस नेटवर्क को क्यों नहीं पकड़ सका। एसआईटी की जांच यदि पूरी आपूर्ति श्रृंखला तक पहुंचती है, तभी यह कार्रवाई सार्थक मानी जाएगी।
RashtraPress
27 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पुणे के दौंड में लिंग जांच रैकेट क्या था?
यह एक अवैध नेटवर्क था जिसमें गर्भवती महिलाओं की गैरकानूनी लिंग जांच कराई जाती थी और कन्या भ्रूण की पहचान होने पर अवैध गर्भपात किया जाता था। रैकेट में एक डॉक्टर, एक एजेंट और प्रतिबंधित दवाओं की आपूर्ति शामिल थी।
इस मामले में किन्हें गिरफ्तार किया गया है?
एसआईटी ने डॉ. सुमंत तुकाराम शितोळे (38 वर्ष, पारगांव, दौंड) और बापूराव पंढरीनाथ जांबले (57 वर्ष, वासुंदे, दौंड) को गिरफ्तार किया है। दौंड न्यायालय ने दोनों को 1 जुलाई 2026 तक पुलिस कस्टडी में भेजा है।
पीसी-पीएनडीटी अधिनियम क्या है और यह क्यों लागू किया गया?
पीसी-पीएनडीटी (गर्भधारण-पूर्व और प्रसव-पूर्व नैदानिक तकनीकें) अधिनियम 1 जनवरी 1996 को लागू हुआ। इसका उद्देश्य कन्या भ्रूण हत्या रोकना और देश के गिरते लिंगानुपात में सुधार करना था; उल्लंघन पर कठोर सजा और भारी जुर्माने का प्रावधान है।
इस रैकेट में आरोपियों की क्या भूमिका थी?
डॉ. शितोळे मुख्य आरोपी के ज़रिए अवैध लिंग जांच कराता था और फिर गर्भवती महिलाओं का अपने अस्पताल में गैरकानूनी गर्भपात करता था। बापूराव जांबले एजेंट के रूप में गर्भपात के लिए ज़रूरी प्रतिबंधित दवाइयों और इंजेक्शन की आपूर्ति करता था।
इस मामले में आगे क्या होगा?
1 जुलाई 2026 को दोनों आरोपियों को पुनः दौंड न्यायालय में पेश किया जाएगा। एसआईटी रैकेट से जुड़े अन्य संदिग्धों की पहचान के लिए जांच जारी रखे हुए है।
राष्ट्र प्रेस
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