पुणे क्राइम ब्रांच ने छह साल से फरार डकैती आरोपी समीर वंजारी को दबोचा
सारांश
मुख्य बातें
पुणे पुलिस की क्राइम ब्रांच ने 28 जून 2026 को डकैती के एक पुराने मामले में छह वर्षों से फरार चल रहे आरोपी को गिरफ्तार कर बड़ी सफलता हासिल की। गिरफ्तार आरोपी की पहचान 28 वर्षीय समीर सुरेश वंजारी उर्फ चव्हाण के रूप में हुई है, जो दौंड तहसील के नानगांव का निवासी है।
कैसे बिछाया गया जाल
अधिकारियों के अनुसार, क्राइम ब्रांच टीम को गुप्त सूचना मिली कि आरोपी नानगांव में छिपा हुआ है। सूचना मिलते ही टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए मौके पर पहुँचकर जाल बिछाया और समीर वंजारी को हिरासत में ले लिया। गिरफ्तारी के बाद आरोपी को आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए यवत पुलिस स्टेशन के हवाले कर दिया गया।
मामले की पृष्ठभूमि
यवत थाने में भारतीय दंड संहिता की धारा 395 (डकैती) के तहत दर्ज मुकदमे में समीर वंजारी मुख्य आरोपी था। घटना के तुरंत बाद से ही वह फरार हो गया था और पुलिस उसे पिछले छह सालों से तलाश कर रही थी। यह गिरफ्तारी इस बात का उदाहरण है कि किस प्रकार क्राइम ब्रांच की सतर्क निगरानी और गुप्त सूचना तंत्र लंबे समय से बचते आ रहे अपराधियों को भी कानून के शिकंजे में ला सकते हैं।
यवत क्षेत्र में एक और बड़ी कार्रवाई
इसी क्षेत्र में इससे पहले शनिवार को पुलिस ने अवैध गर्भलिंग जाँच और कन्या भ्रूण हत्या रैकेट के मामले में दो मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया था। विशेष जाँच दल (SIT) ने गहन जाँच के बाद ठोस साक्ष्य जुटाकर यह कार्रवाई की।
गिरफ्तार आरोपियों में सुमंत तुकाराम शितोले और बापूराव पंढरीनाथ जांबले शामिल हैं। जाँच में सामने आया है कि सुमंत शितोले गर्भवती महिलाओं की अवैध लिंग जाँच करवाकर उन्हें अपने अस्पताल में लाता था और गैरकानूनी गर्भपात कराता था। वहीं, बापूराव जांबले इस रैकेट में एजेंट की भूमिका निभाता था और गर्भपात के लिए आवश्यक प्रतिबंधित दवाइयाँ व इंजेक्शन की आपूर्ति करता था।
न्यायिक कार्रवाई
दोनों आरोपियों को शनिवार को दौंड न्यायालय में पेश किया गया, जहाँ अदालत ने उन्हें 1 जुलाई तक पुलिस हिरासत में भेजने का आदेश दिया। पुणे पुलिस की ये दोनों कार्रवाइयाँ दर्शाती हैं कि जिले में अपराध नियंत्रण के लिए प्रशासन सक्रिय रूप से काम कर रहा है।