15 अक्टूबर 2026
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पीआईबी ने पत्रकारिता में तथ्य-अटकल अंतर पर दिया जोर, प्रेस काउंसिल के 2022 मानदंडों का समर्थन

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पीआईबी ने पत्रकारिता में तथ्य-अटकल अंतर पर दिया जोर, प्रेस काउंसिल के 2022 मानदंडों का समर्थन

सारांश

मतदाता सूची पुनरीक्षण विवाद और चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग के बीच फैल रही कथित भ्रामक सूचनाओं की पृष्ठभूमि में पीआईबी ने पत्रकारिता के बुनियादी सिद्धांत की याद दिलाई — तथ्य और अटकल को अलग रखो। यह अपील प्रेस की स्वतंत्रता और जवाबदेही दोनों पर एक साथ सवाल उठाती है।

मुख्य बातें

पीआईबी ने 15 अक्टूबर 2026 को पत्रकारों से तथ्यों को अटकलों और विचारों से अलग रखने की अपील की।
प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया के 'पत्रकारिता आचरण के मानदंड, 2022' के तहत सटीकता, संपादकीय जिम्मेदारी और मानहानि से बचाव अनिवार्य है।
व्यंग्य और कार्टून स्वीकार्य हैं, परंतु इनका उपयोग मानहानिकारक बयानों को छिपाने के लिए नहीं होना चाहिए।
दिल्ली पुलिस आईएफएसओ ने कथित भ्रामक सूचनाएँ फैलाने वाले सोशल मीडिया हैंडल के खिलाफ चार से अधिक एफआईआर दर्ज की हैं।
यह घटनाक्रम एसआईआर विवाद और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग से जुड़े प्रदर्शनों के बीच आया है।

प्रेस सूचना ब्यूरो (पीआईबी) ने 15 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में पत्रकारों से जिम्मेदारी के साथ रिपोर्टिंग करने की अपील करते हुए प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया (पीसीआई) के दिशा-निर्देशों का समर्थन किया। यह कदम मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) विवाद और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर जारी प्रदर्शनों से जुड़ी कथित भ्रामक सूचनाओं के प्रसार के बीच आया है। पीआईबी ने स्पष्ट किया कि तथ्यों को अटकलों, अनुमानों तथा व्यक्तिगत विचारों से अलग रखना जिम्मेदार पत्रकारिता की आधारशिला है।

पीआईबी का एक्स पर आधिकारिक संदेश

पीआईबी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट में कहा, 'जिम्मेदार पत्रकारिता की शुरुआत तथ्यों को अटकलों, अनुमानों और विचारों से अलग करने से होती है।' ब्यूरो ने रेखांकित किया कि पत्रकारों को अटकलों या व्यक्तिगत विचारों को तथ्य के रूप में प्रस्तुत करने से बचना चाहिए, क्योंकि ऐसा करने से जनता का भरोसा कमज़ोर होता है।

प्रेस काउंसिल के 2022 मानदंडों की मुख्य बातें

पीआईबी ने पीसीआई के 'पत्रकारिता आचरण के मानदंड, 2022' का हवाला देते हुए बताया कि पत्रकारों को तथ्यों की सटीकता बनाए रखनी चाहिए, संपादकीय जिम्मेदारी का निर्वहन करना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि व्यंग्य तथा टिप्पणी मानहानि की सीमा पार न करें। ब्यूरो ने यह भी कहा कि अच्छे हास्य के उद्देश्य से बनाए गए कार्टून और व्यंग्यचित्रों के प्रति अपेक्षाकृत उदार दृष्टिकोण अपनाया जा सकता है, परंतु व्यंग्य का इस्तेमाल मानहानिकारक बयानों को छिपाने के लिए नहीं किया जाना चाहिए।

ब्यूरो ने यह भी स्पष्ट किया कि 'अक्षम' या 'नपुंसक' जैसे शब्दों को राजनीतिक टिप्पणी के संदर्भ में परखा जाना चाहिए, ताकि यह निर्धारित किया जा सके कि उनका इस्तेमाल आपत्तिजनक है या नहीं।

प्रेस काउंसिल की भूमिका और कानूनी आधार

प्रेस काउंसिल अधिनियम, 1978 की धारा 13(बी) के तहत परिषद को समाचार पत्रों, समाचार एजेंसियों और पत्रकारों के लिए रिपोर्टिंग के उच्च मानक सुनिश्चित करने के उद्देश्य से आचार संहिता तैयार करने का दायित्व सौंपा गया है। परिषद लगातार प्रेस से रिपोर्टिंग में संयम और सावधानी बरतने की अपील करती रही है। पीसीआई ने अपनी वेबसाइट पर जारी एक टिप्पणी में कहा कि ऐसा वातावरण बनाने का प्रयास होना चाहिए जिसमें प्रेस आत्म-नियमन के माध्यम से अपनी स्वतंत्रता और जिम्मेदारी के बीच उचित संतुलन सुनिश्चित करे।

गौरतलब है कि परिषद ने अपने फैसलों और घोषणाओं के आधार पर समय के साथ ऐसे सिद्धांत विकसित किए हैं जिन्हें पत्रकारों से अपने पेशेवर कर्तव्यों का निर्वहन करते समय विवेक और आवश्यक परिस्थितियों के अनुरूप अपनाने की अपेक्षा की जाती है।

एसआईआर विवाद और एफआईआर की पृष्ठभूमि

यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब एसआईआर विवाद और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर देशभर में प्रदर्शन हो रहे हैं। कथित तौर पर इससे जुड़ी भ्रामक सूचनाओं के प्रसार के मद्देनज़र दिल्ली पुलिस की इंटेलिजेंस फ्यूजन एंड स्ट्रैटेजिक ऑपरेशंस (आईएफएसओ) इकाई ने कथित तौर पर झूठे विमर्श फैलाने और देश के माहौल को बिगाड़ने का प्रयास करने वाले सोशल मीडिया हैंडल के खिलाफ चार से अधिक एफआईआर दर्ज की हैं।

आगे क्या होगा

पीआईबी की यह अपील ऐसे दौर में आई है जब सोशल मीडिया पर सूचनाओं के सत्यापन और जिम्मेदार प्रसार को लेकर बहस तेज़ है। विशेषज्ञों का कहना है कि मीडिया संस्थानों और स्वतंत्र पत्रकारों, दोनों के लिए पीसीआई के मानदंडों का पालन करना न केवल पेशेवर दायित्व है, बल्कि लोकतांत्रिक सूचना परिवेश की रक्षा के लिए भी अनिवार्य है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या पीसीआई इन मानदंडों के उल्लंघन पर कोई ठोस कार्रवाई करती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसका समय और संदर्भ उसे महज़ दिशा-निर्देश से कहीं अधिक बना देता है — यह एसआईआर विवाद और चुनाव आयुक्त से जुड़ी कवरेज के बीच आई है, जो स्वाभाविक रूप से सरकार के लिए संवेदनशील विषय है। आलोचक यह पूछ सकते हैं कि 'भ्रामक सूचना' की परिभाषा कौन तय करेगा — और क्या यह मानदंड सत्ता-पक्ष की आलोचना करने वाली रिपोर्टिंग पर भी उतनी ही सख्ती से लागू होंगे। प्रेस काउंसिल का आत्म-नियमन का आदर्श तभी विश्वसनीय है जब वह सरकारी दबाव से स्वतंत्र रूप से काम करे; अन्यथा 'जिम्मेदार पत्रकारिता' का आह्वान सत्ता-सुविधाजनक चुप्पी का दूसरा नाम बन सकता है।
RashtraPress
15 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पीआईबी ने पत्रकारों से क्या अपील की है?
पीआईबी ने पत्रकारों से तथ्यों को अटकलों, अनुमानों और व्यक्तिगत विचारों से स्पष्ट रूप से अलग रखने की अपील की है। ब्यूरो ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि जिम्मेदार पत्रकारिता की शुरुआत इसी अंतर को बनाए रखने से होती है।
प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया के 2022 मानदंड क्या कहते हैं?
पीसीआई के 'पत्रकारिता आचरण के मानदंड, 2022' के अनुसार पत्रकारों को तथ्यों की सटीकता बनाए रखनी चाहिए, संपादकीय जिम्मेदारी का निर्वहन करना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि व्यंग्य तथा टिप्पणी मानहानि की सीमा पार न करें। ये मानदंड प्रेस काउंसिल अधिनियम, 1978 की धारा 13(बी) के तहत बनाए गए हैं।
एसआईआर विवाद क्या है और इसका पत्रकारिता से क्या संबंध है?
मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर विवाद और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन हो रहे हैं। इस संदर्भ में कथित भ्रामक सूचनाओं के प्रसार की पृष्ठभूमि में पीआईबी ने पत्रकारिता के मानदंडों की याद दिलाई है।
दिल्ली पुलिस ने सोशल मीडिया के खिलाफ क्या कार्रवाई की?
दिल्ली पुलिस की आईएफएसओ इकाई ने कथित तौर पर झूठे विमर्श फैलाने और देश के माहौल को बिगाड़ने का प्रयास करने वाले सोशल मीडिया हैंडल के खिलाफ चार से अधिक एफआईआर दर्ज की हैं। यह कार्रवाई एसआईआर विवाद से जुड़ी कथित भ्रामक सूचनाओं के प्रसार के बाद की गई है।
व्यंग्य और कार्टून को लेकर पीआईबी का क्या रुख है?
पीआईबी ने कहा कि अच्छे हास्य के उद्देश्य से बनाए गए कार्टून और व्यंग्यचित्र एक अलग श्रेणी में आते हैं और इनके प्रति अपेक्षाकृत उदार दृष्टिकोण अपनाया जा सकता है। हालाँकि, ब्यूरो ने आगाह किया कि व्यंग्य का इस्तेमाल मानहानिकारक बयानों को छिपाने के लिए नहीं किया जाना चाहिए।
राष्ट्र प्रेस
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