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एमए बेबी का विपक्षी दलों को पत्र: मुख्य चुनाव आयुक्त हटाओ, एसआईआर रोको

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एमए बेबी का विपक्षी दलों को पत्र: मुख्य चुनाव आयुक्त हटाओ, एसआईआर रोको

सारांश

सीपीआई(एम) महासचिव एमए बेबी ने विपक्षी दलों को एकजुट होने की अपील करते हुए पत्र लिखा — माँग है मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की बर्खास्तगी और एसआईआर पर रोक। वाम दल 26 सितंबर से 2 अक्टूबर तक देशव्यापी प्रदर्शन पर हैं। लोकतंत्र और वोट के अधिकार की लड़ाई सड़क से संसद तक पहुँचने की तैयारी में है।

मुख्य बातें

सीपीआई(एम) महासचिव एमए बेबी ने 26 सितंबर 2026 को गैर-भाजपा और गैर-एनडीए दलों को पत्र लिखकर मतदान के अधिकार की रक्षा के लिए एकजुट होने की अपील की।
मुख्य माँगें: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाना और एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण) प्रक्रिया को तत्काल रोकना।
वाम दलों ने 26 सितंबर से 2 अक्टूबर 2026 तक देशव्यापी विरोध प्रदर्शन का ऐलान किया है।
विपक्ष की माँग: चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रधानमंत्री, विपक्ष के नेता और मुख्य न्यायाधीश की समिति से हो।
चुनाव आयोग ने अपनी कार्यप्रणाली का बचाव करते हुए कहा कि संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत सभी आदेश वैध हैं।

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के महासचिव एमए बेबी ने 26 सितंबर 2026 को गैर-भाजपा और गैर-एनडीए दलों को एक पत्र लिखकर नागरिकों के मतदान के अधिकार और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने विपक्षी पार्टियों से संविधान एवं वोट के अधिकार की रक्षा के लिए तत्काल एकजुट होकर आगे की रणनीति तय करने की अपील की है। सीपीआई(एम) के अनुसार यह पत्र 23 सितंबर को प्रकाशित एक मीडिया रिपोर्ट के बाद लिखा गया है।

मुख्य माँगें और पत्र का सार

अपने पत्र में एमए बेबी ने मुख्य रूप से दो माँगें रखी हैं — मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाना और मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को तत्काल रोकना। बेबी ने लिखा कि मौजूदा परिस्थितियों में संविधान के मूल्यों और नागरिकों के मतदान के अधिकार की रक्षा को लेकर चिंतित सभी राजनीतिक दलों को बैठक कर आगे की राह निकालनी चाहिए। उन्होंने आपसी सहमति से तारीख और स्थान तय कर बैठक आयोजित करने का सुझाव भी दिया है।

बेबी ने पहले भी यह स्पष्ट किया था कि यदि मुख्य चुनाव आयुक्त स्वयं इस्तीफा नहीं देते, तो विपक्ष को अन्य विकल्पों और आंदोलन पर विचार करना होगा। उन्होंने कहा था कि इस मुद्दे पर इंडिया गठबंधन के स्तर पर निर्णय लिया जाना चाहिए।

वाम दलों का देशव्यापी विरोध प्रदर्शन

वाम दलों ने चुनाव आयोग और एसआईआर के मुद्दे पर 26 सितंबर से 2 अक्टूबर 2026 तक देशभर में विरोध प्रदर्शन करने का फैसला किया है। प्रदर्शनकारियों की माँग है कि मतदाता सूची से गलत तरीके से बाहर किए गए नागरिकों के वोट के अधिकार बहाल किए जाएँ और चुनाव आयोग की स्वतंत्र व लोकतांत्रिक कार्यप्रणाली सुनिश्चित की जाए। गौरतलब है कि यह विरोध ऐसे समय में हो रहा है जब एसआईआर प्रक्रिया को लेकर विभिन्न राजनीतिक दलों के बीच तनाव पहले से ही बढ़ा हुआ है।

चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति व्यवस्था पर भी सवाल

विपक्षी दलों ने चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति की मौजूदा व्यवस्था में बदलाव की माँग भी की है। उनका कहना है कि नियुक्ति प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता और भारत के मुख्य न्यायाधीश वाली तीन सदस्यीय चयन समिति के माध्यम से होनी चाहिए। यह माँग सर्वोच्च न्यायालय के उस पुराने निर्देश की भावना के अनुरूप है, जिसे बाद में संसदीय कानून के जरिये बदल दिया गया था।

चुनाव आयोग का पक्ष

चुनाव आयोग ने अपनी कार्यप्रणाली का बचाव करते हुए कहा है कि उसके आधिकारिक आदेशों को संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत पूरा कानूनी आधार प्राप्त है और निर्धारित वैधानिक प्रक्रियाओं का पालन किया गया है। आयोग के अनुसार किसी बहु-सदस्यीय संवैधानिक संस्था में निर्णय के मसौदे पर आंतरिक टिप्पणियाँ, सवाल और अलग-अलग विचार सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा हैं।

आगे क्या होगा

बेबी का कहना है कि देश की जनता राजनीतिक दलों से लोकतंत्र, धर्मनिरपेक्षता और वोट के अधिकार की रक्षा के लिए एकजुट होकर खड़े होने की उम्मीद कर रही है। यह देखना अहम होगा कि इंडिया गठबंधन के घटक दल इस पत्र पर कितनी एकसुरता दिखाते हैं और क्या विपक्ष की प्रस्तावित बैठक जल्द आकार ले पाती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो सर्वोच्च न्यायालय के 2023 के फैसले के बाद से लंबित है। एसआईआर प्रक्रिया को लेकर आरोप गंभीर हैं, लेकिन विपक्ष की विश्वसनीयता इस पर भी टिकी है कि क्या इंडिया गठबंधन के सभी घटक दल वास्तव में एकजुट हो पाते हैं या यह भी एक और असमन्वित आंदोलन बनकर रह जाता है। मुख्यधारा की कवरेज जो चूक रही है वह यह है कि मतदाता सूची से बाहर हुए नागरिकों की संख्या और उनकी जनसांख्यिकीय पहचान को लेकर कोई स्वतंत्र सत्यापन सामने नहीं आया है — बिना इस डेटा के, माँगें नैतिक रूप से सही होते हुए भी साक्ष्य-आधारित दबाव से वंचित हैं।
RashtraPress
27 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एमए बेबी ने विपक्षी दलों को पत्र क्यों लिखा?
सीपीआई(एम) महासचिव एमए बेबी ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के मुद्दे पर विपक्षी दलों को एकजुट करने के लिए यह पत्र लिखा। उनका कहना है कि नागरिकों के वोट के अधिकार और संविधान के मूल्यों की रक्षा के लिए तत्काल सामूहिक रणनीति बनाना जरूरी है।
एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण) क्या है और इसपर विवाद क्यों है?
एसआईआर यानी विशेष गहन पुनरीक्षण चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूचियों की समीक्षा की एक प्रक्रिया है। विपक्षी दलों का आरोप है कि इस प्रक्रिया में नागरिकों को गलत तरीके से मतदाता सूची से बाहर किया जा रहा है, जिससे उनका संवैधानिक मतदान अधिकार प्रभावित होता है।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की माँग किस आधार पर की जा रही है?
वाम दलों और एमए बेबी का आरोप है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की अगुवाई में आयोग की कार्यप्रणाली लोकतांत्रिक और निष्पक्ष नहीं रही। वे उनके इस्तीफे या बर्खास्तगी की माँग करते हुए कहते हैं कि यदि वे स्वयं नहीं हटते, तो विपक्ष अन्य कानूनी और आंदोलनात्मक विकल्पों पर विचार करेगा।
चुनाव आयोग ने इन आरोपों पर क्या कहा है?
चुनाव आयोग ने अपनी कार्यप्रणाली का बचाव करते हुए कहा है कि उसके सभी आदेश संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत पूरी तरह वैध हैं और निर्धारित वैधानिक प्रक्रियाओं का पालन किया गया है। आयोग का यह भी कहना है कि किसी संवैधानिक संस्था में आंतरिक विचार-विमर्श और अलग-अलग राय सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा हैं।
विपक्ष चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति में क्या बदलाव चाहता है?
विपक्षी दलों की माँग है कि चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता और भारत के मुख्य न्यायाधीश वाली तीन सदस्यीय चयन समिति के माध्यम से हो। यह माँग सर्वोच्च न्यायालय की उस भावना के अनुरूप है जिसे संसदीय कानून द्वारा बदला गया था।
राष्ट्र प्रेस
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