आदिवासी विरासत को राष्ट्रीय पहचान: मयूरभंज में PM मोदी की जाहेर स्थल पर पूजा ऐतिहासिक — आदित्य साहू
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड प्रदेश भारतीय जनता पार्टी (BJP) अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद आदित्य साहू ने 22 जून 2026 को रांची में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश की आदिवासी सांस्कृतिक विरासत, आस्था स्थलों और ऐतिहासिक योगदान को राष्ट्रीय स्तर पर पहले से कहीं अधिक सम्मान और पहचान मिल रही है। उन्होंने ओडिशा के मयूरभंज जिले में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के साथ प्रधानमंत्री द्वारा संथाली 'जाहेर स्थल' पर की गई पूजा-अर्चना को स्वतंत्र भारत के इतिहास में एक अभूतपूर्व अवसर बताया।
जाहेर स्थल पर पूजा: ऐतिहासिक महत्व
साहू के अनुसार, स्वतंत्र भारत के इतिहास में संभवतः यह पहला अवसर है जब किसी प्रधानमंत्री ने किसी आधिकारिक कार्यक्रम के दौरान आदिवासी समुदाय के पवित्र आस्था स्थल पर जाकर अपनी श्रद्धा व्यक्त की। उन्होंने इसे जनजातीय परंपराओं को राष्ट्रीय विमर्श में गौरवपूर्ण स्थान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बताया।
संथाल और 'हो' आदिवासी समुदायों के लिए जाहेर स्थल केवल धार्मिक उपासना के केंद्र नहीं हैं — ये उनके सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन की आधारशिला हैं। इन स्थलों से समुदाय की जीवनशैली, प्राचीन परंपराएँ और सामाजिक व्यवस्थाएँ गहराई से जुड़ी हुई हैं।
केंद्र सरकार के आदिवासी कल्याण के प्रमुख कदम
साहू ने कहा कि केंद्र सरकार ने आदिवासी समुदायों को राष्ट्रीय इतिहास और सार्वजनिक स्मृति में उचित स्थान दिलाने के लिए लगातार ठोस कदम उठाए हैं। उन्होंने निम्नलिखित पहलों का विशेष उल्लेख किया:
भगवान बिरसा मुंडा की जयंती को 'जनजातीय गौरव दिवस' के रूप में राष्ट्रीय स्तर पर मनाए जाने की शुरुआत, आदिवासी स्वतंत्रता सेनानियों को समर्पित विशेष संग्रहालयों की स्थापना और विभिन्न जनजातीय नायकों को राष्ट्रीय सम्मान प्रदान किया जाना — इन सबको उन्होंने आदिवासी विरासत को सहेजने की एक व्यापक प्रक्रिया का हिस्सा बताया।
राष्ट्रपति मुर्मु और शिबू सोरेन सम्मान: प्रतीकात्मक संदेश
साहू ने यह भी रेखांकित किया कि द्रौपदी मुर्मु का देश की पहली आदिवासी राष्ट्रपति बनना और झारखंड आंदोलन के प्रमुख नेता शिबू सोरेन को मरणोपरांत पद्म भूषण से सम्मानित किया जाना भी केंद्र सरकार की इसी सकारात्मक नीतिगत सोच को दर्शाता है।
आम जनता और जनजातीय समाज पर असर
साहू के अनुसार, पीएम जनमन योजना, एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों के विस्तार तथा सुदूर आदिवासी क्षेत्रों में सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा और डिजिटल कनेक्टिविटी पर भारी निवेश के माध्यम से केंद्र सरकार जनजातीय समाज के चहुँमुखी विकास के लिए प्रतिबद्धता से काम कर रही है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि आदिवासी समाज केवल सरकारी योजनाओं का लाभार्थी नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक और सभ्यतागत विरासत का सबसे महत्वपूर्ण वाहक है। प्रधानमंत्री का आदिवासी आस्था स्थलों पर माथा टेकना इसी संदेश को और अधिक मजबूती प्रदान करता है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि ये प्रतीकात्मक कदम ज़मीनी स्तर पर जनजातीय समुदायों के जीवन में कितना ठोस परिवर्तन लाते हैं।