क्या पीएम मोदी के कार्यकाल में सोमनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण सच में हो रहा है?
सारांश
Key Takeaways
- सोमनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण ऐतिहासिक महत्व रखता है।
- प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत आर्थिक समृद्धि की ओर बढ़ रहा है।
- 2026 में पहले हमले के 1000 साल पूरे हो रहे हैं।
- संस्कृति और समृद्धि का प्रतीक है सोमनाथ मंदिर।
- इतिहास से प्रेरणा लेकर आगे बढ़ने की आवश्यकता है।
नई दिल्ली, 5 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। भाजपा मुख्यालय में सोमवार को आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की आर्थिक प्रगति के साथ-साथ सोमनाथ मंदिर के ऐतिहासिक पुनर्निर्माण का सपना अब साकार हो रहा है। उन्होंने बताया कि पुनर्निर्माण के समय जो समृद्धि का सपना देखा गया था, वह आज की सरकार के कार्यकाल में धीरे-धीरे पूरा हो रहा है।
2026 में सोमनाथ मंदिर पर हुए पहले बड़े हमले को 1000 साल पूरे हो रहे हैं। इस अवसर को मंदिर की अडिग भावना और भारत की सांस्कृतिक ताकत का प्रतीक माना जा रहा है। इतिहास गवाह है कि मंदिर को कई बार हमलों का सामना करना पड़ा, लेकिन यह हमेशा पुनः खड़ा होता रहा।
सुधांशु त्रिवेदी ने कहा, "मैं यह याद दिलाना चाहता हूं कि सोमनाथ के पुनर्निर्माण के समय भारत के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने कहा था कि जब तक इसकी समृद्धि पहले जैसे स्तर पर नहीं लौटती, तब तक सोमनाथ के अभिषेक की सच्ची पूर्णता संभव नहीं है।"
त्रिवेदी ने आगे कहा कि अब प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत उस समृद्धि की दिशा में तेजी से बढ़ रहा है। देश का दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने का सपना अब हकीकत की ओर बढ़ रहा है।
उन्होंने बताया कि 1951 में सोमनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण हुआ था, जबकि उस समय प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने इस पर आपत्ति जताई थी। आज यह सपना डॉ. राजेंद्र प्रसाद की उपस्थिति का प्रमाण है।
मोदी ने अपने ब्लॉग में लिखा, "11 मई 1951 को डॉ. राजेंद्र प्रसाद की उपस्थिति में एक भव्य सोमनाथ मंदिर भक्तों के लिए खोला गया। उस समय पंडित नेहरू इस विकास को लेकर उत्साहित नहीं थे।"
प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि 2026 में सोमनाथ मंदिर पर पहले हमले को 1000 साल पूरे हो रहे हैं। मंदिर आज भी भारतीय आत्मा की शाश्वत घोषणा की तरह खड़ा है। उन्होंने कहा कि नफरत और कट्टरता भले ही कुछ क्षणों के लिए कुछ नष्ट कर सकती है, लेकिन अच्छाई में विश्वास और दृढ़ संकल्प हमेशा निर्माण की शक्ति रखते हैं।
त्रिवेदी और भाजपा ने इस अवसर को देश की सांस्कृतिक ताकत और आर्थिक प्रगति का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि जिस तरह सोमनाथ मंदिर को बार-बार विनाश के बाद पुनर्निर्माण किया गया, उसी तरह भारत भी कठिनाइयों के बावजूद विकास और समृद्धि की ओर बढ़ रहा है।