क्या पीएम मोदी 11 जनवरी को सोमनाथ स्वाभिमान पर्व में शामिल होंगे?

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क्या पीएम मोदी 11 जनवरी को सोमनाथ स्वाभिमान पर्व में शामिल होंगे?

सारांश

11 जनवरी को पीएम मोदी सोमनाथ की यात्रा करेंगे और 'सोमनाथ स्वाभिमान पर्व' में भाग लेंगे, जो सोमनाथ के स्वर्णिम युग का प्रतीक है। इस अवसर पर सोमनाथ के सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्व को उजागर किया जाएगा।

Key Takeaways

  • सोमनाथ मंदिर का ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्व है।
  • प्रधानमंत्री मोदी की पहल से सोमनाथ का विकास हो रहा है।
  • सोमनाथ स्वाभिमान पर्व 11 जनवरी को होगा।
  • सोमनाथ की यात्रा को सरल बनाने के लिए कनेक्टिविटी में सुधार किया गया है।
  • सोमनाथ स्थायी विकास का एक उदाहरण है।

गांधीनगर, 8 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। ‘सौराष्ट्रे सोमनाथं च, श्री शैले मल्लिकार्जुनम्, उज्जयिन्यां महाकालम् ऊंकारमअमलेश्वरम्।’ यह पंक्ति द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्रम का हिस्सा है, जो यह बताती है कि जब भारत के 12 पवित्र ज्योतिर्लिंगों की बात होती है, तब सबसे पहले सोमनाथ का नाम लिया जाता है। सोमनाथ का यह विशिष्ट स्थान भारतीय संस्कृति में उसके अमूल्य सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्व को दर्शाता है।

पिछले 20 वर्षों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सोमनाथ मंदिर एक ‘स्वर्णिम युग’ में प्रवेश कर चुका है। जब से मोदी जी श्री सोमनाथ ट्रस्ट के अध्यक्ष बने हैं, तब से सोमनाथ के विकास में एक नई दिशा मिली है।

वर्ष 2026 में महमूद गजनवी द्वारा सोमनाथ पर 1026 में किए गए आक्रमण की हजारवीं वर्षगांठ मनाई जाएगी। आज एक हजार वर्षों के बाद भी सोमनाथ मंदिर अपनी गौरवमयी स्थिति के साथ खड़ा है। संयोगवश, 2026 में ही मंदिर के पुनर्निर्माण के 75 वर्ष भी पूरे होंगे। इस ऐतिहासिक अवसर पर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 11 जनवरी को सोमनाथ की यात्रा करेंगे और ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ में हिस्सा लेंगे।

सोमनाथ मंदिर की ऊँचाई पर 1,666 स्वर्ण कलश और 14,200 ध्वजाएं इस मंदिर की तीन पीढ़ियों की श्रद्धा, दृढ़ता और कला कौशल का प्रतीक हैं। हर वर्ष लाखों भक्त इस ज्योतिर्लिंग के दर्शन के लिए आते हैं। वर्ष 2020 से 2024 तक, सोमनाथ के दर्शन के लिए लगभग 97 लाख श्रद्धालु आए हैं। पिछले 2 वर्षों में बिल्व पूजा के लिए आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या 13.77 लाख रही, जिसमें महाशिवरात्रि 2025 के दौरान 3.56 लाख श्रद्धालु आए थे। आज ऑनलाइन बुकिंग और पोस्टल प्रसादी की सुविधाएं सुनिश्चित करती हैं कि सोमनाथ की पवित्रता सभी भक्तों तक पहुंचे।

सोमनाथ मंदिर में श्रद्धालुओं के लिए लाइट एंड साउंड शो और उत्सवों का आयोजन भी किया जाता है। पिछले 3 वर्षों में 10 लाख से अधिक लोगों ने इस शो का आनंद लिया है। पिछले साल वंदे सोमनाथ कला महोत्सव में 1,500 वर्ष पुरानी नृत्य परंपराएं पुनर्जीवित की गईं, जो दर्शाती हैं कि सोमनाथ केवल आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि सांस्कृतिक धरोहर का भी प्रतीक है।

सोमनाथ की यात्रा को और सरल बनाने के लिए 828 करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट ‘जेतपुर-सोमनाथ फोर लेन हाईवे’ का निर्माण किया गया है। साबरमती-वेरावळ वंदे भारत एक्सप्रेस के कारण अहमदाबाद से सोमनाथ की यात्रा अब और भी आसान हो गई है। इसके अलावा, केशोद एयरपोर्ट और राजकोट अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट के उद्घाटन से अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों के लिए सोमनाथ पहुंचना सरल हो गया है।

वर्ष 2018 में ‘स्वच्छ आइकॉनिक प्लेस’ के रूप में मान्यता प्राप्त सोमनाथ आज टिकाऊ विकास और नवाचार का एक बेहतरीन उदाहरण है। वेस्ट सेग्रिगेशन केंद्रों में मंदिर के फूलों को वर्मीकंपोस्ट में रूपांतरित कर 1,700 बिल्व वृक्षों के संवर्धन में उपयोग किया जाता है। मिशन लाइफ के अंतर्गत प्लास्टिक कूड़े से हर महीने पेवर ब्लॉक्स बनाए जाते हैं, जो स्थानीय महिला समूहों के लिए आय का स्रोत बनते हैं।

62 लाख रुपए की लागत से पुनर्स्थापित किए गए छह वर्षा जल संग्रह कुएं और एक जलाशय हर महीने लगभग 30 लाख लीटर सीवेज जल को शुद्ध करते हैं। 2019-20 में स्थापित आठ सीवेज शुद्धिकरण प्लांट्स ने कृषि और लैंडस्केप सिंचाई के लिए 20.53 करोड़ लीटर पानी फिल्टर किया है।

72,000 वर्ग फीट क्षेत्र में विकसित मियावाकी वन समुद्री और क्षारीय हवाओं से रक्षा करता है। आईआईटी-कानपुर के अध्ययन के अनुसार यह वन दो वर्ष बाद 93,000 किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड का अवशोषण करेगा। इसके अतिरिक्त, ट्रस्ट द्वारा सेवा भाव से अभिषेक का पवित्र जल नौ स्तरीय शुद्धिकरण प्लांट द्वारा शुद्ध करके ‘सोम गंगाजल’ के रूप में 15 रुपए में वितरित किया जाता है। दिसंबर 2024 तक 1.13 लाख से अधिक परिवारों को इसका लाभ मिला है। इन प्रयासों ने सोमनाथ को नेट-जीरो मंदिर बनने की दिशा में अग्रसर किया है।

गूगल पर भारतीयों द्वारा सबसे अधिक सर्च किए गए शीर्ष 10 स्थानों में सोमनाथ शामिल है। 2025 में सोमनाथ की सोशल मीडिया इम्प्रेशन 1.37 अरब को पार कर गई है, जो विश्वभर के भक्तों में सोमनाथ के प्रति श्रद्धा और आध्यात्मिक महत्व को दर्शाती है। सोमनाथ मंदिर, जो भारत की आस्था और स्वाभिमान का प्रतीक है, विकसित भारत के निर्माण में भी प्रेरणा प्रदान करता है।

प्रधानमंत्री मोदी ने इस पर बल देते हुए लिखा था, ''यदि हजार वर्ष पहले खंडित हुआ सोमनाथ मंदिर संपूर्ण वैभव के साथ पुनः खड़ा हो सकता है, तो हम हजार वर्ष पहले वाला समृद्ध भारत भी पुनः बना सकते हैं।''

Point of View

बल्कि यह भारतीय संस्कृति और इतिहास का महत्वपूर्ण हिस्सा है। पीएम मोदी की पहल से सोमनाथ का विकास एक नई दिशा में बढ़ा है।
NationPress
09/01/2026

Frequently Asked Questions

सोमनाथ स्वाभिमान पर्व कब होगा?
सोमनाथ स्वाभिमान पर्व 11 जनवरी को आयोजित किया जाएगा।
पीएम मोदी इस कार्यक्रम में क्यों शामिल हो रहे हैं?
पीएम मोदी सोमनाथ के विकास और सांस्कृतिक धरोहर को उजागर करने के लिए इस कार्यक्रम में शामिल हो रहे हैं।
सोमनाथ मंदिर का ऐतिहासिक महत्व क्या है?
सोमनाथ मंदिर भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है और इसकी गहरी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्व है।
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