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क्या जन-भागीदारी की शक्ति से देशवासियों ने आपातकाल की भयावहता का मुकाबला किया? : पीएम मोदी

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क्या जन-भागीदारी की शक्ति से देशवासियों ने आपातकाल की भयावहता का मुकाबला किया? : पीएम मोदी

सारांश

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'मन की बात' कार्यक्रम में 1975 के आपातकाल के दौरान की घटनाओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने जन-भागीदारी की शक्ति को महत्व देते हुए उस समय की क्रूरता के खिलाफ लोगों की अदम्य शक्ति को सराहा। जानें उस दौर की भयावहता और लोकतंत्र की रक्षा के संघर्ष के बारे में।

मुख्य बातें

आपातकाल का समय भारतीय लोकतंत्र के लिए एक कठिन दौर था।
जन-भागीदारी की शक्ति ने आपातकाल का मुकाबला किया।
अनेक नेताओं ने उस समय की घटनाओं को उजागर किया।
लोकतंत्र की रक्षा के लिए सजग रहना आवश्यक है।
संविधान की हत्या के प्रति जागरूक रहना चाहिए।

नई दिल्ली, 29 जून (राष्ट्र प्रेस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने लोकप्रिय कार्यक्रम 'मन की बात' के 123वें एपिसोड में कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर देशवासियों से संवाद किया। इनमें से एक प्रमुख विषय 1975 में कांग्रेस शासनकाल के दौरान लागू किया गया आपातकाल था। मोदी जी ने देशवासियों को उस समय की भयावहता और कठिनाइयों से अवगत कराने के लिए विभिन्न नेताओं के ऑडियो संदेश भी प्रस्तुत किए। इन ऑडियो के माध्यम से उन्होंने उस समय के हालात को जीवंत रूप से दर्शाया, जब लोकतंत्र को कुचलने का प्रयास किया गया था।

पीएम मोदी ने कहा, "जन-भागीदारी की शक्ति से, बड़े-बड़े संकटों का मुकाबला किया जा सकता है।"

इसके बाद उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री मोरारजी भाई देसाई के एक ऑडियो का उल्लेख किया, जिसमें उन्होंने आपातकाल की क्रूरता को स्पष्ट रूप से बयां किया। मोरारजी भाई ने कहा था, "आखिर ये जो ज़ुल्म हुआ दो साल तक, जुल्म तो 5-7 साल से शुरू हो गया था। मगर वो शिखर पर पहुंच गया है दो साल में, जब लोगों पर इमरजेंसी थोप दी और अमानवीय बर्ताव किया गया। लोगों के स्वतंत्रता के हक छीन लिए गए, अखबारों को कोई स्वतंत्रता न रही। न्यायालय बिल्कुल निर्बल बना दिए गए। जिस ढंग से एक लाख से ज्यादा लोग जेल में बंद कर दिए गए, और फिर सरकार की मनमानी होती रही, उसकी मिसाल दुनिया के इतिहास में भी मिलना मुश्किल है।"

पीएम मोदी ने कहा कि मोरारजी भाई देसाई ने संक्षेप में, लेकिन बहुत ही स्पष्ट तरीके से इमरजेंसी के बारे में बताया है। आप सोच सकते हैं, वो दौर कैसा था। इमरजेंसी लगाने वालों ने ना सिर्फ हमारे संविधान की हत्या की बल्कि उनका इरादा न्यायपालिका को भी अपना गुलाम बनाए रखने का था। इस दौरान लोगों को बड़े पैमाने पर प्रताड़ित किया गया। इसके ऐसे अनेक उदाहरण हैं, जिन्हें कभी भी भुलाया नहीं जा सकता। जोर्ज फर्नाडीस को जंजीरों में बांधा गया। अनेक लोगों को कठोर यातनाएं दी गई। ‘मीसा’ के तहत किसी को भी ऐसे ही गिरफ्तार कर लिया जाता था। विद्यार्थियों को भी परेशान किया गया और अभिव्यक्ति की आजादी का भी गला घोंट दिया गया।

पीएम मोदी ने इस समय भारत की जनता की अदम्य शक्ति की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि उस काले दौर में भी भारतीय जनता न झुकी, न टूटी, और न ही लोकतंत्र के साथ कोई समझौता किया। अंततः, जनता-जनार्दन की जीत हुई और आपातकाल को हटाने के साथ-साथ इसे थोपने वाली ताकतों को भी सत्ता से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया।

इस संदर्भ में पीएम ने बाबू जगजीवन राम के एक ऑडियो का भी जिक्र किया, जिसमें उन्होंने कहा, "पिछला चुनाव, चुनाव नहीं था। भारत की जनता का एक महान अभियान था। उस समय की परिस्थितियों को बदल देने का, तानाशाही की धारा को मोड़ देने का और भारत में प्रजातंत्र के बुनियाद को मजबूत कर देने का।"

इसी तरह, पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के शब्दों को उद्धृत करते हुए पीएम मोदी ने कहा, "देश में जो कुछ हुआ, उसे केवल चुनाव नहीं कह सकते। एक शांतिपूर्ण क्रांति हुई है। लोकशक्ति की लहर ने लोकतंत्र की हत्या करने वालों को इतिहास के कूड़ेदान में फेंक दिया है।"

पीएम मोदी ने यह भी बताया कि आपातकाल थोपे जाने के 50 वर्ष हाल ही में पूरे हुए हैं। इस अवसर पर देशवासियों ने 'संविधान हत्या दिवस' मनाया, ताकि उस दौर की क्रूरता को याद रखा जाए और लोकतंत्र की रक्षा के लिए सजग रहा जाए। उन्होंने उन सभी वीरों को याद करने का आह्वान किया, जिन्होंने आपातकाल का डटकर मुकाबला किया और संविधान को सशक्त बनाए रखने में योगदान दिया।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह स्पष्ट है कि आपातकाल का यह अध्याय भारतीय लोकतंत्र की ताकत और लोगों की एकता का प्रतीक है। इस कठिन समय में, जन-भागीदारी और दृढ़ संकल्प ने भारत को और मजबूत बनाया। यह घटना हमें याद दिलाती है कि लोकतंत्र की रक्षा के लिए सजग रहना आवश्यक है।
RashtraPress
12 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पीएम मोदी ने इस मुद्दे पर क्या कहा?
पीएम मोदी ने कहा कि जन-भागीदारी की शक्ति से बड़े संकटों का मुकाबला किया जा सकता है और उन्होंने उस समय के नेताओं के ऑडियो संदेशों का उल्लेख किया।
आपातकाल के दौरान क्या हुआ था?
इस दौरान, लोगों को बड़ी संख्या में जेलों में बंद किया गया, मीडिया पर पाबंदियाँ लगाई गई और लोकतंत्र को कुचलने का प्रयास किया गया।
आपातकाल के खिलाफ लोगों ने क्या किया?
लोगों ने एकजुट होकर इस तानाशाही के खिलाफ आवाज उठाई और अंततः आपातकाल को समाप्त किया।
इस विषय पर कोई विशेष कार्यक्रम हुआ?
हां, हाल ही में 'संविधान हत्या दिवस' मनाया गया, ताकि उस काल की क्रूरता को याद किया जा सके।
राष्ट्र प्रेस
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