21 अक्टूबर 2026
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PM मोदी ने एक्स पर साझा किया संस्कृत सुभाषित: बलिदानी महापुरुषों का उपकार कभी न भूलें

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PM मोदी ने एक्स पर साझा किया संस्कृत सुभाषित: बलिदानी महापुरुषों का उपकार कभी न भूलें

सारांश

प्रधानमंत्री मोदी ने एक्स पर 'सुभाषितरत्नभाण्डागारम्' से संस्कृत श्लोक साझा किया — संदेश है कि सच्चे लोग बलिदानी महापुरुषों का उपकार कभी नहीं भूलते। नारियल वृक्ष की उपमा के ज़रिए कृतज्ञता और समर्पण की शिक्षा दी गई है।

मुख्य बातें

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 21 अक्टूबर 2026 को एक्स पर संस्कृत सुभाषित साझा किया।
श्लोक 'सुभाषितरत्नभाण्डागारम्' ग्रंथ से लिया गया है, जिसमें 10,000 से अधिक सुभाषित संकलित हैं।
श्लोक में नारियल वृक्ष की उपमा के ज़रिए कृतज्ञता और बलिदानी महापुरुषों के प्रति समर्पण का संदेश दिया गया है।
ग्रंथ 6 से 7 प्रकरणों में विभाजित है — मङ्गलाचरण, राज प्रकरण, चित्र प्रकरण, अन्योक्ति प्रकरण आदि शामिल हैं।
पीएम मोदी नियमित रूप से संस्कृत एवं शास्त्रीय साहित्य के उद्धरण सोशल मीडिया पर साझा करते रहते हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 21 अक्टूबर 2026, बुधवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक संस्कृत सुभाषित साझा किया, जो कृतज्ञता और बलिदानी महापुरुषों के प्रति समर्पण का संदेश देता है। यह श्लोक प्रसिद्ध ग्रंथ 'सुभाषितरत्नभाण्डागारम्' से लिया गया है, जिसमें लगभग 10,000 से अधिक सुभाषित संकलित हैं।

साझा किया गया श्लोक

प्रधानमंत्री मोदी ने एक्स पर जो संस्कृत श्लोक पोस्ट किया, वह इस प्रकार है — 'प्रथमवयसि पीतं तोयमल्पं स्मरन्तः शिरसि निहितभारा नारिकेला नराणाम्। ददति जलमनल्पास्वादमाजीवितान्तं न हि कृतमुपकारं साधवो विस्मरन्ति॥' इस श्लोक में नारियल के वृक्ष की उपमा दी गई है, जो अपनी प्रारम्भिक अवस्था में मिले थोड़े से जल को जीवनभर स्मरण रखता है और मनुष्यों को मधुर जल प्रदान करता रहता है।

श्लोक का अर्थ और संदेश

इस सुभाषित का भाव यह है कि जिस प्रकार नारियल का वृक्ष अपने सिर पर भार सहते हुए भी जीवनभर मनुष्यों को मीठा जल देता रहता है, उसी प्रकार सच्चे उदात्त व्यक्ति — विशेषतः बलिदानी महापुरुषों के प्रति किए गए उपकार को — कभी नहीं भूलते। वे उनके त्याग, तप और समर्पण के प्रति गहन कृतज्ञता रखते हुए अपने जीवन को उनके आदर्शों के अनुरूप समर्पित करते हैं।

यह श्लोक कृतज्ञता के महान गुण की शिक्षा देता है — किसी भी नेक कार्य को स्नेहपूर्वक याद रखें, कृतज्ञता महसूस करें और बदले में स्वयं भी परोपकार करें। ऐसे विचार मात्र से ही मन कोमल और विस्तृत हो जाता है।

ग्रंथ की पृष्ठभूमि

प्रधानमंत्री द्वारा साझा यह सुभाषित 'सुभाषितरत्नभाण्डागारम्' ग्रंथ से लिया गया है। यह ग्रंथ मुख्यतः 6 से 7 प्रकरणों (अध्यायों) में विभाजित है — मङ्गलाचरण, सामान्य प्रकरण, राज प्रकरण, चित्र प्रकरण, अन्योक्ति प्रकरण, नवरस प्रकरण और सप्तम 'संकीर्णक' प्रकरण। इस ग्रंथ में काव्य, नाटक, चम्पू, भाण, प्रहसन, पुराण, इतिहास तथा विभिन्न आख्यायिकाओं से लगभग 10,000 से अधिक सुभाषित विषय-क्रमानुसार संकलित हैं।

आम जनता पर असर

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री मोदी समय-समय पर संस्कृत के सुभाषित, वैदिक श्लोक और नीतिपरक उद्धरण सोशल मीडिया पर साझा करते रहते हैं, जिससे भारतीय शास्त्रीय साहित्य के प्रति युवा पीढ़ी में जागरूकता बढ़ती है। यह पोस्ट ऐसे समय में आई है जब राष्ट्रीय स्तर पर बलिदान दिवस और राष्ट्रीय एकता सप्ताह का आयोजन होता है, जो कृतज्ञता और देशभक्ति के भाव को और गहरा करता है।

इस श्लोक का पाठ करने से हृदय मर्मस्पर्शी होता है और कृतज्ञता का भाव उत्पन्न होता है — यह केवल राजनीतिक संदेश नहीं, बल्कि सांस्कृतिक विरासत को जीवित रखने का एक प्रयास भी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि राजनीतिक संदर्भ में भी पठनीय है — बलिदानी महापुरुषों के प्रति कृतज्ञता का आह्वान एक ऐसे समय में आया है जब राष्ट्रीय प्रतीकों और स्वतंत्रता सेनानियों की विरासत पर राजनीतिक दावेदारी तेज है। हालाँकि इस प्रकार के सुभाषितों का सीधा नीतिगत प्रभाव नहीं होता, किंतु ये सांस्कृतिक एजेंडे को मज़बूत करने में सहायक होते हैं।
RashtraPress
21 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

PM मोदी ने कौन सा संस्कृत सुभाषित साझा किया?
PM मोदी ने 21 अक्टूबर 2026 को एक्स पर 'प्रथमवयसि पीतं तोयमल्पं स्मरन्तः...' श्लोक साझा किया, जो 'सुभाषितरत्नभाण्डागारम्' ग्रंथ से लिया गया है। इस श्लोक में नारियल वृक्ष की उपमा से कृतज्ञता और बलिदानी महापुरुषों के प्रति समर्पण का संदेश दिया गया है।
इस संस्कृत श्लोक का हिंदी में अर्थ क्या है?
इस श्लोक का अर्थ है कि जैसे नारियल का वृक्ष अपनी प्रारम्भिक अवस्था में मिले थोड़े जल को जीवनभर याद रखता है और मनुष्यों को मीठा जल देता रहता है, उसी प्रकार सच्चे उदात्त व्यक्ति बलिदानी महापुरुषों के प्रति किए गए उपकार को कभी नहीं भूलते। वे उनके त्याग और समर्पण के प्रति सदा कृतज्ञ रहते हैं।
'सुभाषितरत्नभाण्डागारम्' ग्रंथ क्या है?
'सुभाषितरत्नभाण्डागारम्' एक प्रसिद्ध संस्कृत ग्रंथ है जिसमें 10,000 से अधिक सुभाषित संकलित हैं। यह ग्रंथ 6 से 7 प्रकरणों में विभाजित है और इसमें काव्य, नाटक, पुराण, इतिहास तथा आख्यायिकाओं से नीतिपरक श्लोक विषय-क्रमानुसार संग्रहित किए गए हैं।
PM मोदी के एक्स पोस्ट का उद्देश्य क्या था?
प्रधानमंत्री मोदी ने यह पोस्ट बलिदानी महापुरुषों के प्रति कृतज्ञता का संदेश देने के लिए साझा किया। यह पोस्ट संस्कृत साहित्य और भारतीय शास्त्रीय विरासत को डिजिटल मंच पर प्रसारित करने की उनकी नियमित पहल का भी हिस्सा है।
PM मोदी कितनी बार संस्कृत सुभाषित सोशल मीडिया पर साझा करते हैं?
प्रधानमंत्री मोदी समय-समय पर संस्कृत के सुभाषित, वैदिक श्लोक और नीतिपरक उद्धरण एक्स पर साझा करते रहते हैं। यह उनकी सोशल मीडिया उपस्थिति का एक नियमित हिस्सा है, जिससे भारतीय शास्त्रीय साहित्य के प्रति जागरूकता बढ़ती है।
राष्ट्र प्रेस
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