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PM मोदी ने एक्स पर साझा किया भर्तृहरि का श्लोक: धैर्य और दृढ़ निश्चय से मिलती है सफलता

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PM मोदी ने एक्स पर साझा किया भर्तृहरि का श्लोक: धैर्य और दृढ़ निश्चय से मिलती है सफलता

सारांश

प्रधानमंत्री मोदी ने एक्स पर भर्तृहरि के नीतिशतकम् का श्लोक साझा किया, जो समुद्र मंथन की पौराणिक कथा के माध्यम से बताता है कि धीर और दृढ़ निश्चयी व्यक्ति प्रलोभनों और संकटों से विचलित हुए बिना अपने लक्ष्य तक पहुँचते हैं।

मुख्य बातें

PM नरेंद्र मोदी ने 1 अक्टूबर 2026 को एक्स पर महर्षि भर्तृहरि के नीतिशतकम् से संस्कृत सुभाषित साझा किया।
श्लोक का संदेश: धीर और दृढ़ निश्चयी व्यक्ति अपने निश्चित लक्ष्य की प्राप्ति तक निरंतर प्रयत्नशील रहते हैं।
श्लोक समुद्र मंथन की पौराणिक कथा पर आधारित है — देवता रत्नों से संतुष्ट नहीं हुए, विष से भयभीत नहीं हुए, अमृत मिलने तक नहीं रुके।
जीवन के तीन सूत्र रेखांकित: प्रलोभन से ऊपर उठना , संकट से न घबराना , और लक्ष्य के प्रति अडिग रहना ।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 1 अक्टूबर 2026 को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक प्रेरणादायक संस्कृत सुभाषित साझा किया, जिसमें धैर्य और दृढ़ संकल्प को सफलता की कुंजी बताया गया। यह श्लोक महर्षि भर्तृहरि के प्रसिद्ध ग्रंथ नीतिशतकम् से लिया गया है।

कौन सा श्लोक साझा किया

प्रधानमंत्री मोदी द्वारा साझा किया गया संस्कृत श्लोक इस प्रकार है: 'रत्नैर्महाब्धेस्तुतुषुर्न देवा न भेजिरे भीमविषेण भीतिम्। सुधां विना न प्रययुर्विरामं न निश्चितार्थाद्विरमन्ति धीराः॥' इस श्लोक का भावार्थ है कि जिस प्रकार देवताओं ने समुद्र मंथन में रत्न पाकर भी संतोष नहीं किया, भयंकर विष से भयभीत नहीं हुए और अमृत की प्राप्ति तक प्रयास जारी रखे — उसी प्रकार धीर और दृढ़ निश्चयी व्यक्ति अपने निश्चित लक्ष्य की प्राप्ति तक निरंतर प्रयत्नशील रहते हैं।

पौराणिक संदर्भ

इस श्लोक की पृष्ठभूमि समुद्र मंथन की पौराणिक कथा से जुड़ी है। पौराणिक आख्यानों के अनुसार, जब देवताओं और दैत्यों ने मिलकर क्षीरसागर का मंथन किया, तो उससे क्रमशः बहुमूल्य रत्न, भयंकर हलाहल विष और अंततः अमृत की प्राप्ति हुई। रत्नों को पाकर कोई सामान्य व्यक्ति प्रलोभन में आ सकता था, किंतु देवताओं का एकमात्र ध्येय अमृत प्राप्त करना था। हलाहल विष के प्रकट होने पर भी वे विचलित नहीं हुए और अमृत मिलने तक उन्होंने अपने प्रयास नहीं रोके।

श्लोक का व्यावहारिक संदेश

महर्षि भर्तृहरि के नीतिशतकम् का यह श्लोक जीवन में तीन महत्वपूर्ण गुणों को रेखांकित करता है — प्रलोभनों से ऊपर उठने की क्षमता, संकटों का निर्भयता से सामना करने का साहस, और लक्ष्य के प्रति अडिग प्रतिबद्धता। गौरतलब है कि भर्तृहरि रचित नीतिशतकम् भारतीय नीति-साहित्य के सर्वाधिक उद्धृत ग्रंथों में से एक है और इसमें जीवन के व्यावहारिक दर्शन को संस्कृत श्लोकों के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है।

प्रधानमंत्री की सुभाषित-परंपरा

प्रधानमंत्री मोदी द्वारा एक्स पर प्राचीन भारतीय ग्रंथों से सुभाषित और श्लोक साझा करने की यह परंपरा समय-समय पर जारी रहती है। यह पहल भारतीय शास्त्रीय साहित्य और दर्शन को वृहत्तर जनमानस तक पहुँचाने का एक माध्यम बन रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के सुभाषित समाज में धैर्य, लगन और सकारात्मक सोच को प्रोत्साहन देते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो भारतीय शास्त्रीय परंपरा को डिजिटल युग से जोड़ती है। यह श्लोक राजनीतिक संदेशों से इतर है, किंतु 'धैर्य और दृढ़ता' का यह सार्वजनिक उद्घोष ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब सरकार कई बड़े नीतिगत अभियान चला रही है। मुख्यधारा की कवरेज इसे अक्सर केवल 'प्रेरणादायक ट्वीट' के रूप में देखती है, जबकि नीतिशतकम् जैसे ग्रंथों को सार्वजनिक विमर्श में पुनर्जीवित करने का यह प्रयास भारतीय ज्ञान-परंपरा की व्यापक पुनर्प्रस्तुति का हिस्सा है।
RashtraPress
1 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

PM मोदी ने 1 अक्टूबर को कौन सा श्लोक साझा किया?
PM मोदी ने महर्षि भर्तृहरि के नीतिशतकम् से 'रत्नैर्महाब्धेस्तुतुषुर्न देवा...' श्लोक साझा किया। इसका भावार्थ है कि धीर और दृढ़ निश्चयी व्यक्ति अपने लक्ष्य की प्राप्ति तक निरंतर प्रयत्नशील रहते हैं।
नीतिशतकम् क्या है और इसे किसने लिखा?
नीतिशतकम् महर्षि भर्तृहरि द्वारा रचित प्राचीन संस्कृत ग्रंथ है, जिसमें जीवन के व्यावहारिक दर्शन को सौ श्लोकों के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है। यह भारतीय नीति-साहित्य के सर्वाधिक उद्धृत ग्रंथों में से एक है।
इस श्लोक में समुद्र मंथन का उल्लेख क्यों है?
श्लोक में समुद्र मंथन की पौराणिक कथा को रूपक के रूप में प्रयोग किया गया है। इसमें बताया गया है कि देवता रत्न पाकर नहीं रुके, हलाहल विष से भयभीत नहीं हुए और अमृत मिलने तक प्रयास जारी रखे — यही दृढ़ता का आदर्श उदाहरण है।
PM मोदी द्वारा एक्स पर सुभाषित साझा करने की परंपरा क्या है?
प्रधानमंत्री मोदी समय-समय पर प्राचीन भारतीय ग्रंथों से श्लोक और सुभाषित एक्स पर साझा करते हैं। यह पहल भारतीय शास्त्रीय साहित्य को व्यापक जनमानस तक पहुँचाने का माध्यम बनती है।
इस श्लोक का आम जीवन में क्या उपयोग है?
यह श्लोक तीन जीवन-सूत्र देता है — प्रलोभनों से ऊपर उठना, संकटों का निर्भयता से सामना करना और लक्ष्य के प्रति अडिग रहना। बड़ी सफलता के लिए इन तीनों गुणों का होना आवश्यक बताया गया है।
राष्ट्र प्रेस
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