बाजार की पाठशाला: पीपीएफ में 5 अप्रैल से पहले निवेश करने से मिल सकता है अतिरिक्त लाभ - जानें मुनाफे का गणित
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली, 3 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। जनता प्रोविडेंट फंड अर्थात् पीपीएफ आज भी दीर्घकालिक सुरक्षित और कर-मुक्त रिटर्न देने वाले सबसे विश्वसनीय निवेश विकल्पों में से एक है। 15 वर्ष की लॉक-इन अवधि (जिसे आगे 5-5 वर्ष के खंड में बढ़ाया जा सकता है) के साथ यह योजना निवेशकों को स्थिर और जोखिम-मुक्त लाभ प्रदान करती है। वर्तमान में, सरकार इस योजना पर अप्रैल-जून 2026 तिमाही के लिए 7.1 प्रतिशत वार्षिक ब्याज दे रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि निवेशक अपने लाभ को अधिकतम करना चाहते हैं, तो उन्हें 5 अप्रैल से पहले पीपीएफ में निवेश करना चाहिए। वित्तीय वर्ष की शुरुआत में उठाया गया यह छोटा-सा कदम दीर्घकाल में लाखों रुपए का अतिरिक्त लाभ दे सकता है।
वास्तव में, पीपीएफ में ब्याज की गणना प्रत्येक महीने की 5 तारीख और महीने के अंत के बीच के न्यूनतम शेष राशि पर की जाती है। इसका अर्थ यह है कि यदि आप 1 अप्रैल से 5 अप्रैल के बीच धनराशि जमा करते हैं, तो उस राशि पर पूरे वर्ष का ब्याज प्राप्त होता है। लेकिन यदि आप 5 अप्रैल के बाद निवेश करते हैं, तो उस महीने का ब्याज नहीं मिलता और हर वर्ष एक महीने का ब्याज कम हो जाता है।
उदाहरण के लिए, यदि कोई निवेशक 5 अप्रैल से पहले अधिकतम 1.5 लाख रुपये निवेश करता है, तो उसे पूरे 12 महीनों का ब्याज मिलता है, जो लगभग 10,650 रुपये होता है। वहीं, यदि यही राशि 6 अप्रैल को जमा की जाए, तो ब्याज घटकर करीब 9,763 रुपये रह जाता है। यानी एक वर्ष में करीब 887 रुपये का अंतर आ जाता है, जो समय के साथ संवृद्धि के कारण काफी बड़ा हो जाता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, दीर्घकाल में इस अंतर का प्रभाव और भी अधिक दिखाई देता है। यदि कोई निवेशक प्रत्येक वर्ष 1.5 लाख रुपये वित्तीय वर्ष की शुरुआत में जमा करता है, तो 15 वर्ष में उसका कुल निवेश 22.5 लाख रुपये से बढ़कर लगभग 40.68 लाख रुपये हो सकता है, जिसमें लगभग 18.18 लाख रुपये ब्याज के रूप में मिलते हैं।
वहीं, यदि यही निवेश हर वर्ष देर से किया जाए, तो मैच्योरिटी वैल्यू घटकर लगभग 37.80 लाख रुपये रह सकती है और ब्याज करीब 15.31 लाख रुपये ही मिलेगा। इसका अर्थ है कि केवल समय पर निवेश न करने के कारण लगभग 2.9 लाख रुपये तक का नुकसान हो सकता है।
इस प्रकार, पीपीएफ में निवेश करते समय केवल धनराशि ही नहीं, बल्कि सही समय भी अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। वित्तीय वर्ष की शुरुआत में निवेश करने से संवृद्धि का पूरा लाभ मिलता है और दीर्घकाल में बेहतर रिटर्न प्राप्त किया जा सकता है।