छोटी फिल्मों को भी मिल सकती है सिनेमाघरों में जगह, दर्शकों से जुड़ना है आवश्यक: प्रकाश झा

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छोटी फिल्मों को भी मिल सकती है सिनेमाघरों में जगह, दर्शकों से जुड़ना है आवश्यक: प्रकाश झा

सारांश

प्रकाश झा का मानना है कि छोटे बजट की फिल्मों को थिएटर में स्थान मिल सकता है, बशर्ते वे दर्शकों से सही तरीके से जुड़ें। उनके अनुसार, फिल्म उद्योग में सभी प्रकार की फिल्मों के लिए अवसर मौजूद हैं।

Key Takeaways

  • छोटी फिल्मों के लिए थिएटर में अवसर हैं।
  • दर्शकों से जुड़ना महत्वपूर्ण है।
  • आर्थिक चुनौतियाँ हैं लेकिन समाधान संभव हैं।
  • फिल्म का उद्देश्य भावनात्मक संबंध बनाना है।
  • ओटीटी विकल्प भी उपलब्ध हैं।

मुंबई, 12 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। फिल्म उद्योग में लंबे समय से यह चर्चा होती रही है कि बड़े प्रोडक्शन और नामी सितारों की फिल्मों के मुकाबले छोटे बजट की फिल्मों को सिनेमाघरों में उतनी मान्यता नहीं मिलती। इस विषय पर राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता निर्देशक प्रकाश झा ने राष्ट्र प्रेस को दिए एक साक्षात्कार में अपने विचार साझा किए हैं। उनका कहना है कि फिल्म उद्योग में हर प्रकार की फिल्मों के लिए स्थान मौजूद है, लेकिन असली चुनौती यह है कि फिल्म दर्शकों के साथ कितनी गहराई से जुड़ती है।

प्रकाश झा ने राष्ट्र प्रेस के साथ बातचीत के दौरान कहा, ''अभी भी सिनेमाघरों में छोटी फिल्मों के लिए अवसर हैं। कई छोटे बजट की फिल्में थिएटर में प्रदर्शित होती हैं और दर्शकों के पास पहुंचती भी हैं। उदाहरण के लिए, जमशेदपुर के मल्टीप्लेक्स में एक ही समय में कई फिल्में चलती रहती हैं। कभी-कभी वहां एक साथ लगभग 12 फिल्में भी दिखाई जाती हैं। इनमें से कुछ का एक शो, कुछ का दो शो और कुछ का चार शो भी होता है। अलग-अलग फिल्मों को उनकी मांग और दर्शकों की रुचि के अनुसार समय और स्क्रीन आवंटित किया जाता है।''

उन्होंने कहा, ''छोटे बजट की फिल्मों को आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। जब कोई फिल्म थिएटर में रिलीज होती है, तो इसके साथ कई खर्च जुड़ते हैं, जैसे कि सिनेमाघर का किराया, फिल्म का प्रचार, तकनीकी सेवाओं का खर्च और वितरण से जुड़े अन्य खर्च। इन सबके कारण फिल्म की लागत बढ़ जाती है। छोटे बजट की फिल्मों के लिए यह खर्च कई बार बहुत बड़ा हो सकता है, जिससे उनके मुनाफे में कमी आती है। यही कारण है कि कई निर्माता जोखिम लेने के बजाय सीधे ओटीटी प्लेटफार्म का रुख कर लेते हैं।''

प्रकाश झा ने आगे कहा, ''अगर मुझे लगता है कि थिएटर में रिलीज करने में अधिक खर्च और जोखिम है, तो मैं ओटीटी को प्राथमिकता दूंगा। लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि थिएटर में छोटे बजट की फिल्मों के लिए कोई स्थान नहीं है। आज के समय में पहले से अधिक अवसर हैं, बस सही तरीके से दर्शकों तक पहुंचने की आवश्यकता है।''

उन्होंने फिल्म निर्माण के दृष्टिकोण पर भी अपने विचार व्यक्त किए। प्रकाश झा ने कहा, ''जब भी कोई फिल्म बनाई जाती है, तो सबसे पहले यह सोचना चाहिए कि फिल्म किस प्रकार की है और यह किस दर्शक वर्ग के लिए बनाई जा रही है। साथ ही, यह भी आवश्यक है कि फिल्म दर्शकों से कैसे जुड़ सकती है। फिल्म चाहे कितनी भी बेहतरीन क्यों न हो, यदि यह दर्शकों के दिल को नहीं छू पाती, तो उसकी सफलता मुश्किल हो जाती है।''

उन्होंने आगे कहा, ''फिल्म का असली उद्देश्य दर्शकों के साथ एक भावनात्मक संबंध बनाना होना चाहिए। यदि फिल्म दर्शकों को अपने साथ जोड़ लेती है, तो वह सफल हो जाती है। लेकिन यदि फिल्म दर्शकों से नहीं जुड़ पाती, तो उसकी कहानी या संदेश कितना भी मजबूत क्यों न हो, वह दर्शकों पर प्रभाव नहीं छोड़ पाती।''

Point of View

छोटे बजट की फिल्मों के लिए सिनेमाघरों में जगह है, बशर्ते वे दर्शकों से सही तरीके से जुड़ सकें। आर्थिक चुनौतियों के बावजूद, उद्योग में विविधता बनाए रखना आवश्यक है।
NationPress
14/03/2026

Frequently Asked Questions

क्या छोटी फिल्में सिनेमाघरों में सफल हो सकती हैं?
हाँ, अगर वे दर्शकों से सही तरीके से जुड़ती हैं।
छोटे बजट की फिल्मों को किन चुनौतियों का सामना करना पड़ता है?
आर्थिक चुनौतियों के साथ-साथ प्रचार और वितरण खर्च भी शामिल हैं।
प्रकाश झा का दृष्टिकोण क्या है?
उनका मानना है कि दर्शकों से जुड़ना आवश्यक है, चाहे फिल्म का बजट कितना भी छोटा हो।
क्या ओटीटी प्लेटफार्म का उपयोग करना बेहतर है?
कुछ निर्माताओं के लिए, हाँ। लेकिन थिएटर में भी अवसर हैं।
फिल्म का असली उद्देश्य क्या होना चाहिए?
दर्शकों के साथ एक भावनात्मक संबंध बनाना।
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