राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का 22-23 अक्टूबर को छत्तीसगढ़ दौरा: रायपुर और जगदलपुर में सांस्कृतिक कार्यक्रम
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु 22 और 23 अक्टूबर 2026 को छत्तीसगढ़ के दो दिवसीय दौरे पर रहेंगी, जिसमें रायपुर और जगदलपुर में कई महत्वपूर्ण सांस्कृतिक व सार्वजनिक कार्यक्रमों में उनकी भागीदारी प्रस्तावित है। यह दौरा छत्तीसगढ़ की आदिवासी परंपराओं, फसल उत्सव और सामुदायिक सेवा को राष्ट्रीय मंच पर रेखांकित करेगा।
पहले दिन का कार्यक्रम: रायपुर
22 अक्टूबर को राष्ट्रपति मुर्मु रायपुर में होंगी। वह लोक भवन में 'माता हसी देवी जी' के सम्मान में एक विशेष स्मारक सिक्का जारी करेंगी। यह सिक्का इस सम्मानित आध्यात्मिक हस्ती को श्रद्धांजलि अर्पित करता है।
उसी दिन राष्ट्रपति नुआखाई पर्व के अवसर पर आयोजित दो प्रमुख आयोजनों — 'सेवा सम्मान पर्व' और 'युवा प्रबोधन' कार्यक्रम — में भी हिस्सा लेंगी। नुआखाई इस क्षेत्र का एक परंपरागत फसल उत्सव है जिसका छत्तीसगढ़ और ओडिशा के समुदायों में गहरा सांस्कृतिक महत्व है। गौरतलब है कि राष्ट्रपति मुर्मु स्वयं ओडिशा की आदिवासी पृष्ठभूमि से आती हैं, जिससे इस पर्व के साथ उनका जुड़ाव विशेष रूप से प्रतीकात्मक है।
दूसरे दिन का कार्यक्रम: जगदलपुर और बस्तर दशहरा
23 अक्टूबर को राष्ट्रपति बस्तर क्षेत्र के जगदलपुर पहुँचेंगी। वहाँ वह पारंपरिक आदिवासी सभा 'मुरिया दरबार' में शामिल होंगी, जो स्थानीय सांस्कृतिक कैलेंडर का एक अभिन्न अंग है।
इसके बाद राष्ट्रपति बस्तर दशहरा के अवसर पर आयोजित सार्वजनिक कार्यक्रम में भाग लेंगी। बस्तर दशहरा देश के अन्य हिस्सों में मनाए जाने वाले दशहरा से पूरी तरह भिन्न है — यह आदिवासी परंपराओं से गहराई से जुड़ा एक बहु-दिवसीय महोत्सव है जिसमें विशिष्ट रीति-रिवाज, देवी पूजन और भव्य जुलूस शामिल होते हैं। यह उत्सव देवी दंतेश्वरी की आराधना पर केंद्रित होता है और इसे विश्व के सबसे लंबे चलने वाले आदिवासी उत्सवों में से एक माना जाता है।
दौरे का सांस्कृतिक और राजनीतिक महत्व
यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार आदिवासी क्षेत्रों में अपनी सक्रियता बढ़ाने पर जोर दे रही है। राष्ट्रपति मुर्मु की उपस्थिति — एक आदिवासी महिला के रूप में देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर — इन क्षेत्रों के समुदायों के लिए प्रतीकात्मक महत्व रखती है।
दो दिवसीय यात्रा कार्यक्रम में रायपुर (शहरी केंद्र) और जगदलपुर (आदिवासी बहुल बस्तर क्षेत्र) दोनों को शामिल किया गया है, जिससे राष्ट्रपति को छत्तीसगढ़ के विविध सामाजिक-सांस्कृतिक परिदृश्य से जुड़ने का अवसर मिलेगा।
आम जनता और समाज पर असर
राष्ट्रपति के इस दौरे से स्थानीय जनजातीय समुदायों की परंपराओं और उत्सवों को राष्ट्रीय पहचान मिलेगी। युवा प्रबोधन कार्यक्रम में उनकी भागीदारी युवा पीढ़ी को सामुदायिक सेवा और सांस्कृतिक गौरव की दिशा में प्रेरित करने का संदेश देती है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के उच्च-स्तरीय दौरे आदिवासी क्षेत्रों में सरकार के साथ विश्वास बहाल करने में सहायक होते हैं।
आगे की राह
राष्ट्रपति मुर्मु के दोनों दिन के कार्यक्रमों की विस्तृत रूपरेखा राष्ट्रपति भवन द्वारा जारी कार्यक्रम के अनुसार है। 23 अक्टूबर को जगदलपुर में बस्तर दशहरा के समारोह अपने चरम पर होंगे, जिसमें राष्ट्रपति की उपस्थिति इस पारंपरिक आयोजन की भव्यता को और बढ़ाएगी।