23 अक्टूबर 2026
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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु पहली बार बस्तर के 'मुरिया दरबार' में शामिल, सीएम साय ने बताया ऐतिहासिक क्षण

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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु पहली बार बस्तर के 'मुरिया दरबार' में शामिल, सीएम साय ने बताया ऐतिहासिक क्षण

सारांश

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का बस्तर के ऐतिहासिक 'मुरिया दरबार' में पहली बार शामिल होना एक सांस्कृतिक मील का पत्थर है। 75 दिनों तक चलने वाले दुनिया के सबसे लंबे दशहरे को अब सर्वोच्च संवैधानिक पद की उपस्थिति मिली है — जो बस्तर की आदिवासी विरासत को राष्ट्रीय पहचान दिलाने की दिशा में बड़ा कदम है।

मुख्य बातें

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु 23 अक्टूबर 2026 को जगदलपुर के सिरहासार भवन में ऐतिहासिक मुरिया दरबार में शामिल हुईं — कथित तौर पर किसी राष्ट्रपति की यह पहली उपस्थिति।
बस्तर दशहरा दुनिया के सबसे लंबे उत्सवों में से एक है, जो 75 दिनों तक चलता है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय , गृह मंत्री विजय शर्मा और कृषि मंत्री रामविचार नेताम राष्ट्रपति के साथ जगदलपुर रवाना हुए।
राष्ट्रपति लाला बाग में एक सभा को भी संबोधित करेंगी।
सीएम साय ने कांग्रेस पर आदिवासी वोट बैंक राजनीति का आरोप लगाया और 'डबल इंजन' सरकार की नक्सलवाद-विरोधी सफलता का हवाला दिया।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु 23 अक्टूबर 2026 को रायपुर से जगदलपुर रवाना हुईं, जहाँ वे सिरहासार भवन में आयोजित ऐतिहासिक मुरिया दरबार में भाग लेंगी — बस्तर दशहरे के इस पारंपरिक आदिवासी आयोजन में किसी राष्ट्रपति की यह कथित तौर पर पहली उपस्थिति है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, गृह मंत्री विजय शर्मा और कृषि मंत्री रामविचार नेताम भी उनके साथ जगदलपुर के लिए रवाना हुए।

मुरिया दरबार: क्या है यह आयोजन

बस्तर दशहरा दुनिया के सबसे लंबे दशहरा उत्सवों में से एक माना जाता है, जो 75 दिनों तक चलता है। इस उत्सव में 'मुरिया दरबार' एक महत्वपूर्ण आदिवासी सांस्कृतिक परंपरा है, जिसमें स्थानीय जनजातियों के प्रतिनिधि एकत्रित होते हैं। मुख्यमंत्री साय के अनुसार, भारत की राष्ट्रपति का इस दरबार में शामिल होना इतिहास में संभवतः पहली बार हो रहा है।

सीएम साय का बयान: ऐतिहासिक स्वागत

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा, 'आज छत्तीसगढ़ के लिए एक ऐतिहासिक दिन है। बस्तर में दुनिया का सबसे लंबा दशहरा उत्सव मनाया जाता है, जो 75 दिनों तक चलता है और इसमें मुरिया दरबार भी शामिल है। शायद पहली बार, भारत की राष्ट्रपति मुरिया दरबार में शामिल हो रही हैं। छत्तीसगढ़ की तीन करोड़ जनता की ओर से, हम उनका हार्दिक स्वागत और अभिनंदन करते हैं।' उन्होंने यह भी बताया कि राष्ट्रपति लाला बाग में आयोजित एक सभा को भी संबोधित करेंगी।

आदिवासी विकास और राजनीतिक संदर्भ

मुख्यमंत्री साय ने इस अवसर पर कांग्रेस पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस पार्टी ने लगातार आदिवासी समुदायों का उपयोग 'वोट बैंक' के रूप में किया, जबकि आज आदिवासी समुदाय उससे दूर हो गया है। साय ने कहा कि 'डबल इंजन' सरकार के अंतर्गत बस्तर क्षेत्र से नक्सलवाद को खत्म करने में सफलता मिली है। उन्होंने केंद्र द्वारा जनजातीय कार्य मंत्रालय के गठन और राज्य में आदिवासी विकास के लिए बनाए गए विभिन्न प्राधिकरणों का भी उल्लेख किया।

नुआखाई पर राष्ट्रपति का संबोधन

गुरुवार को राष्ट्रपति मुर्मु ने रायपुर के सरदार बलबीर सिंह जुनेजा इंडोर स्टेडियम में नुआखाई के अवसर पर 'सेवा सम्मान पर्व एवं युवा प्रबोधन' कार्यक्रम को संबोधित किया था। इस अवसर पर उन्होंने युवाओं से कहा था कि वे बड़े सपने देखें, अपने विचारों को व्यापक बनाएं और अपनी सफलता को समाज एवं राष्ट्र की सेवा से जोड़ें।

राष्ट्रपति मुर्मु ने नुआखाई पर्व को केवल सांस्कृतिक समारोह नहीं, बल्कि 'समृद्ध परंपराओं, आपसी सद्भाव और सामाजिक एकता का उत्सव' बताया। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन हमें अपनी जड़ों से जोड़ते हैं और भारतीय जीवन मूल्यों को आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाने का अवसर देते हैं।

आगे क्या

राष्ट्रपति मुर्मु की इस यात्रा को बस्तर की आदिवासी संस्कृति को राष्ट्रीय मंच पर मान्यता देने वाला कदम माना जा रहा है। यह यात्रा ऐसे समय में आई है जब सरकार बस्तर में विकास और शांति प्रक्रिया को नए सिरे से गति देने का प्रयास कर रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि बस्तर की आदिवासी संस्कृति को यह राष्ट्रीय पहचान केवल उत्सव तक सीमित रहेगी या नीतिगत प्राथमिकताओं में भी इसका प्रतिबिंब दिखेगा। सीएम साय का कांग्रेस पर 'वोट बैंक' का आरोप राजनीतिक रूप से सुविधाजनक है, पर यह भी सच है कि दशकों से बस्तर विकास और हिंसा के बीच झूलता रहा है — किसी भी सरकार के लिए यह असहज सवाल बना रहेगा। नक्सलवाद के अंत का दावा जाँच की माँग करता है; ज़मीनी हकीकत और सरकारी आँकड़ों के बीच की खाई को भरने की ज़िम्मेदारी अभी बाकी है।
RashtraPress
23 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मुरिया दरबार क्या है और यह क्यों खास है?
मुरिया दरबार बस्तर दशहरे का एक पारंपरिक आदिवासी आयोजन है, जिसमें स्थानीय जनजातियों के प्रतिनिधि एकत्रित होते हैं। यह 75 दिनों तक चलने वाले बस्तर दशहरे का अभिन्न हिस्सा है, जिसे दुनिया के सबसे लंबे दशहरा उत्सवों में गिना जाता है।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु छत्तीसगढ़ दौरे पर क्यों आईं?
राष्ट्रपति मुर्मु बस्तर दशहरा उत्सव और मुरिया दरबार में शामिल होने के लिए जगदलपुर आईं। इससे पहले उन्होंने रायपुर में नुआखाई पर्व के अवसर पर 'सेवा सम्मान पर्व एवं युवा प्रबोधन' कार्यक्रम को भी संबोधित किया।
क्या किसी राष्ट्रपति ने पहले मुरिया दरबार में भाग लिया है?
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के अनुसार, यह कथित तौर पर पहली बार है जब भारत की राष्ट्रपति मुरिया दरबार में शामिल हो रही हैं। इसीलिए उन्होंने इसे छत्तीसगढ़ के लिए ऐतिहासिक दिन करार दिया।
सीएम साय ने कांग्रेस पर क्या आरोप लगाए?
मुख्यमंत्री साय ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने आदिवासी समुदायों का लगातार 'वोट बैंक' के रूप में उपयोग किया। उन्होंने कहा कि 'डबल इंजन' सरकार ने जहाँ बस्तर से नक्सलवाद खत्म करने में सफलता पाई, वहीं केंद्र ने जनजातीय कार्य मंत्रालय जैसे संस्थागत कदम भी उठाए।
राष्ट्रपति ने नुआखाई पर युवाओं को क्या संदेश दिया?
रायपुर के सरदार बलबीर सिंह जुनेजा इंडोर स्टेडियम में राष्ट्रपति मुर्मु ने युवाओं से बड़े सपने देखने और अपनी सफलता को समाज व राष्ट्र की सेवा से जोड़ने का आह्वान किया। उन्होंने नुआखाई को समृद्ध परंपराओं और सामाजिक एकता का उत्सव बताया।
राष्ट्र प्रेस
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