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एसआईआर विवाद: पंजाब भाजपा अध्यक्ष ढिल्लों का CM भगवंत मान पर तीखा हमला

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एसआईआर विवाद: पंजाब भाजपा अध्यक्ष ढिल्लों का CM भगवंत मान पर तीखा हमला

सारांश

पंजाब BJP अध्यक्ष ढिल्लों ने CM मान को उनके ही बयान से घेरा — जब मान ने विधानसभा में SIR पर सवाल उठाए, तो ढिल्लों ने पूछा कि आपकी ही पार्टी ने चुनाव आयोग को 'सब ठीक है' क्यों कहा था। यह AAP के भीतर का विरोधाभास अब सार्वजनिक बहस में आ गया है।

मुख्य बातें

पंजाब BJP अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने 23 अक्टूबर 2026 को CM भगवंत मान की विधानसभा टिप्पणी की कड़ी आलोचना की।
ढिल्लों का आरोप — SIR प्रक्रिया पूरी तरह राज्य सरकार के डिप्टी कमिश्नरों, SDM व बूथ अधिकारियों द्वारा संपन्न हुई; केंद्र की कोई भूमिका नहीं।
ढिल्लों ने AAP का अंतर्विरोध उजागर किया — CM ने विधानसभा में गड़बड़ी का आरोप लगाया, पर पार्टी नेताओं ने चुनाव आयोग को 'सब ठीक है' बताया।
BJP अध्यक्ष ने मान को चुनौती दी — एक भी मतदाता का नाम बताएँ जिसे सूची से गलत तरीके से हटाया गया हो।
ढिल्लों ने मान सरकार को 'अक्षम' बताते हुए कहा, केंद्र पर बेबुनियाद आरोप लगाकर जिम्मेदारी से नहीं बचा जा सकता।

पंजाब भारतीय जनता पार्टी (BJP) के अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026 को मुख्यमंत्री भगवंत मान की उस विधानसभा टिप्पणी पर कड़ी आपत्ति जताई, जिसमें मान ने मतदाता सूची के 'विशेष गहन पुनरीक्षण' (SIR) पर सवाल उठाए थे। ढिल्लों ने इस बयान को 'हैरान करने वाला' करार देते हुए मान पर अपनी ही सरकार की जिम्मेदारी से मुँह फेरने का आरोप लगाया।

मुख्य आरोप: 'आपके अधिकारियों ने करवाया, आप ही सवाल उठा रहे हैं'

ढिल्लों ने सीधे शब्दों में कहा, 'राज्य सरकार आप चलाते हैं, यह प्रक्रिया आपके अधिकारियों ने पूरी की, और खुद आपने ही एसआईआर का काम करवाया। अब आप ही इस पर सवाल उठा रहे हैं।' उन्होंने स्पष्ट किया कि डिप्टी कमिश्नरों, सब-डिविजनल मजिस्ट्रेटों (SDM) से लेकर बूथ स्तर के अधिकारियों तक — इस पूरी प्रक्रिया में शामिल सभी कर्मचारी राज्य सरकार के प्रशासनिक तंत्र के अधीन थे।

उन्होंने जोर देकर कहा कि इस प्रक्रिया में केंद्र सरकार की कोई सीधी भूमिका नहीं थी, इसलिए केंद्र पर आरोप लगाना तथ्यों के विपरीत है।

आप का दोहरा रुख: ढिल्लों ने खोला मोर्चा

भाजपा अध्यक्ष ने आम आदमी पार्टी (AAP) के भीतर का विरोधाभास उजागर करते हुए पूछा — 'एक तरफ मुख्यमंत्री विधानसभा में एसआईआर में गड़बड़ी का आरोप लगा रहे थे, तो दूसरी तरफ उनकी ही पार्टी के नेता चुनाव आयोग से कह रहे थे कि सब कुछ ठीक चल रहा है।' यह अंतर्विरोध, ढिल्लों के अनुसार, सरकार की कथनी और करनी के बीच की खाई को उजागर करता है।

उन्होंने यह भी याद दिलाया कि जब पंजाब में एसआईआर की प्रक्रिया शुरू हुई थी, तब मुख्यमंत्री मान ने स्वयं वादा किया था कि राज्य में किसी भी मतदाता का नाम सूची से नहीं हटाया जाएगा।

ढिल्लों की चुनौती: एक नाम बताएँ

ढिल्लों ने मान को सार्वजनिक रूप से चुनौती दी कि वे पंजाब में कम से कम एक ऐसे मतदाता का नाम बताएँ, जिसका नाम मतदाता सूची से गलत तरीके से हटाया गया हो। उन्होंने कहा, 'अगर किसी का नाम गलत तरीके से हटाया गया है तो मुख्यमंत्री को इसका जवाब देना होगा।'

उन्होंने यह भी कहा कि यदि वास्तव में कोई गड़बड़ी हुई है तो यह गंभीर मामला है — और इसके लिए राज्य सरकार स्वयं जिम्मेदार होगी, न कि केंद्र।

सरकार पर 'अक्षमता' का आरोप

भाजपा अध्यक्ष ने मान की टिप्पणियों को एक 'अक्षम सरकार' का प्रमाण बताया। उनके अनुसार सरकार ने स्पष्ट रूप से सोचने और सही निर्णय लेने की क्षमता खो दी है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि ऐसा प्रतीत होता है कि मान को अब अपने ही मंत्रियों और अधिकारियों पर भरोसा नहीं रहा।

ढिल्लों ने स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार पर बेबुनियाद आरोप लगाकर मान अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकते। यह राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप ऐसे समय में आया है जब पंजाब में अगले विधानसभा चुनाव की पृष्ठभूमि में मतदाता सूचियों की शुद्धता एक संवेदनशील राजनीतिक मुद्दा बनती जा रही है।

आगे की राह

फिलहाल AAP सरकार की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। भाजपा के इस हमले के बाद देखना होगा कि मुख्यमंत्री मान अपने विधानसभा बयान पर स्पष्टीकरण देते हैं या मामला और गहराता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो जिम्मेदारी राज्य प्रशासन की है, जो AAP सरकार के अधीन है। लेकिन असली राजनीतिक संदर्भ यह है कि मतदाता सूचियों का मुद्दा पंजाब में चुनावी तैयारियों के लिहाज से अत्यंत संवेदनशील है, और दोनों पक्ष इसे अपने-अपने तरीके से भुनाने में जुटे हैं। मुख्यधारा की कवरेज जो चूक जाती है वह यह है कि AAP नेताओं के चुनाव आयोग के समक्ष 'सब ठीक है' वाले बयान अभी सार्वजनिक रूप से सत्यापित नहीं हुए हैं — और जब तक मान इस पर ठोस जवाब नहीं देते, यह अंतर्विरोध उनकी विश्वसनीयता पर बोझ बना रहेगा।
RashtraPress
23 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंजाब में SIR (विशेष गहन पुनरीक्षण) विवाद क्या है?
SIR यानी 'विशेष गहन पुनरीक्षण' मतदाता सूचियों को अद्यतन करने की एक प्रशासनिक प्रक्रिया है। विवाद तब शुरू हुआ जब CM भगवंत मान ने विधानसभा में इस प्रक्रिया पर सवाल उठाए, जिसके बाद BJP ने उन पर अपनी ही सरकार की जिम्मेदारी से मुँह फेरने का आरोप लगाया।
केवल सिंह ढिल्लों ने CM मान पर क्या आरोप लगाए?
ढिल्लों ने आरोप लगाया कि SIR प्रक्रिया पूरी तरह राज्य सरकार के अधिकारियों — डिप्टी कमिश्नरों से लेकर बूथ स्तर के कर्मचारियों तक — ने पूरी की थी, इसलिए केंद्र को दोष देना गलत है। उन्होंने यह भी कहा कि जब प्रक्रिया चल रही थी, तब खुद AAP नेताओं ने चुनाव आयोग को 'सब ठीक है' बताया था।
क्या भगवंत मान ने SIR के दौरान मतदाता सूची को लेकर कोई वादा किया था?
भाजपा अध्यक्ष ढिल्लों के अनुसार, जब SIR प्रक्रिया शुरू हुई थी तब CM मान ने वादा किया था कि पंजाब में किसी भी मतदाता का नाम सूची से नहीं हटाया जाएगा। ढिल्लों ने मान को चुनौती दी है कि यदि कोई नाम गलत तरीके से हटा है तो वे एक भी ऐसे मतदाता का नाम सार्वजनिक करें।
इस विवाद में AAP का दोहरा रुख क्या है जो BJP ने उजागर किया?
BJP का दावा है कि एक तरफ CM मान विधानसभा में SIR में गड़बड़ी का आरोप लगा रहे थे, और दूसरी तरफ उनकी पार्टी के नेता चुनाव आयोग के समक्ष यह कह रहे थे कि प्रक्रिया सही तरीके से हुई है। यह विरोधाभास भाजपा के हमले का केंद्रबिंदु है।
इस विवाद का पंजाब की राजनीति पर क्या असर हो सकता है?
मतदाता सूचियों की शुद्धता पंजाब में आगामी चुनावों को देखते हुए एक संवेदनशील राजनीतिक मुद्दा है। AAP सरकार की ओर से अभी तक इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, और यह विवाद सत्तारूढ़ दल की विश्वसनीयता के लिए चुनौती बन सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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