नशामुक्ति का संकल्प: पंजाब का परिवार नंगे पैर तय कर रहा 2,500 किमी की पदयात्रा, 2013 से जारी है अभियान
सारांश
मुख्य बातें
पंजाब के अमृतसर का एक परिवार युवाओं को नशे की लत से बचाने के लिए नंगे पैर 2,500 किलोमीटर की पदयात्रा कर रहा है — अमृतसर से महाराष्ट्र के नांदेड़ स्थित सचखंड हजूर साहिब तक। यह यात्रा 19 जुलाई को येवला (महाराष्ट्र) से गुज़री, जहाँ परिवार ने स्थानीय लोगों को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक किया।
यात्रा का उद्देश्य और पृष्ठभूमि
पदयात्री सरदार लाल सिंह ने बताया, 'हम अमृतसर से आए हैं। हमने अपने गाँव से सचखंड हजूर साहिब, नांदेड़ तक लगभग 2,500 किलोमीटर की पैदल यात्रा शुरू की है। पंजाब में नशे की समस्या काफी बढ़ गई है। हम सभी के सुख-समृद्धि और भलाई की अरदास करते हैं। हमारी यह यात्रा युवाओं को नशे के खिलाफ जागरूक करने के लिए समर्पित है।' उन्होंने यह भी बताया कि यह उनका 13वाँ साल है — परिवार वर्ष 2013 से यह यात्रा लगातार कर रहा है।
पंजाब में नशे की गंभीर स्थिति
पंजाब में नशे की समस्या लंबे समय से सार्वजनिक चिंता का विषय रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, किशोरावस्था में मस्तिष्क का विकास पूरी तरह नहीं हुआ होता — विशेष रूप से निर्णय लेने वाला हिस्सा यानी प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स इस दौरान विकसित हो रहा होता है। ऐसे में कम उम्र में नशे की शुरुआत जीवनभर मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं, याददाश्त और सोचने-समझने की क्षमता में कमी, तथा व्यवहार संबंधी परेशानियों का कारण बन सकती है।
परिवार और समाज की भूमिका
विशेषज्ञों का कहना है कि नशे की रोकथाम में परिवार और समाज की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। बच्चों और युवाओं से खुलकर एवं संवेदनशीलता के साथ बातचीत करना ज़रूरी है। समय पर पहचान, विशेषज्ञों की सलाह और कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी जैसे उपचार प्रभावी साबित होते हैं।
सरकारी सुरक्षा तंत्र और उपलब्ध सहायता
भारत में नशे से प्रभावित बच्चों और युवाओं को जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के तहत कानूनी संरक्षण प्राप्त है। इसके अलावा नेशनल सेंटर फॉर ड्रग एब्यूज प्रिवेंशन और राष्ट्रीय चाइल्ड हेल्पलाइन जैसी सरकारी सेवाओं के माध्यम से परामर्श और पुनर्वास की सुविधा उपलब्ध है।
आगे क्या
सरदार लाल सिंह का परिवार अपनी पदयात्रा जारी रखते हुए रास्ते में पड़ने वाले हर गाँव और शहर में जागरूकता फैला रहा है। यह अभियान दर्शाता है कि सामाजिक बदलाव के लिए व्यक्तिगत संकल्प और सामुदायिक प्रयास कितने ज़रूरी हैं।