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नशामुक्ति का संकल्प: पंजाब का परिवार नंगे पैर तय कर रहा 2,500 किमी की पदयात्रा, 2013 से जारी है अभियान

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नशामुक्ति का संकल्प: पंजाब का परिवार नंगे पैर तय कर रहा 2,500 किमी की पदयात्रा, 2013 से जारी है अभियान

सारांश

अमृतसर का एक परिवार वर्ष 2013 से हर साल नंगे पैर 2,500 किलोमीटर की पदयात्रा कर रहा है — पंजाब से नांदेड़ तक — सिर्फ इसलिए कि युवा पीढ़ी नशे की दलदल से बाहर निकले। यह 13वाँ साल है, और संकल्प पहले से कहीं ज़्यादा मज़बूत है।

मुख्य बातें

सरदार लाल सिंह का परिवार अमृतसर से नांदेड़ स्थित सचखंड हजूर साहिब तक नंगे पैर 2,500 किमी की पदयात्रा कर रहा है।
यह यात्रा 2013 से लगातार जारी है — 2025 में यह 13वाँ साल है।
पदयात्रा का मुख्य उद्देश्य पंजाब के युवाओं को नशे की लत से दूर रखने के लिए जागरूकता फैलाना है।
विशेषज्ञों के अनुसार, किशोरावस्था में नशे की शुरुआत प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स के विकास को प्रभावित कर मानसिक स्वास्थ्य को दीर्घकालिक नुकसान पहुँचाती है।
जुवेनाइल जस्टिस एक्ट और राष्ट्रीय चाइल्ड हेल्पलाइन के ज़रिए नशा-प्रभावित युवाओं को सरकारी सहायता उपलब्ध है।

पंजाब के अमृतसर का एक परिवार युवाओं को नशे की लत से बचाने के लिए नंगे पैर 2,500 किलोमीटर की पदयात्रा कर रहा है — अमृतसर से महाराष्ट्र के नांदेड़ स्थित सचखंड हजूर साहिब तक। यह यात्रा 19 जुलाई को येवला (महाराष्ट्र) से गुज़री, जहाँ परिवार ने स्थानीय लोगों को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक किया।

यात्रा का उद्देश्य और पृष्ठभूमि

पदयात्री सरदार लाल सिंह ने बताया, 'हम अमृतसर से आए हैं। हमने अपने गाँव से सचखंड हजूर साहिब, नांदेड़ तक लगभग 2,500 किलोमीटर की पैदल यात्रा शुरू की है। पंजाब में नशे की समस्या काफी बढ़ गई है। हम सभी के सुख-समृद्धि और भलाई की अरदास करते हैं। हमारी यह यात्रा युवाओं को नशे के खिलाफ जागरूक करने के लिए समर्पित है।' उन्होंने यह भी बताया कि यह उनका 13वाँ साल है — परिवार वर्ष 2013 से यह यात्रा लगातार कर रहा है।

पंजाब में नशे की गंभीर स्थिति

पंजाब में नशे की समस्या लंबे समय से सार्वजनिक चिंता का विषय रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, किशोरावस्था में मस्तिष्क का विकास पूरी तरह नहीं हुआ होता — विशेष रूप से निर्णय लेने वाला हिस्सा यानी प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स इस दौरान विकसित हो रहा होता है। ऐसे में कम उम्र में नशे की शुरुआत जीवनभर मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं, याददाश्त और सोचने-समझने की क्षमता में कमी, तथा व्यवहार संबंधी परेशानियों का कारण बन सकती है।

परिवार और समाज की भूमिका

विशेषज्ञों का कहना है कि नशे की रोकथाम में परिवार और समाज की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। बच्चों और युवाओं से खुलकर एवं संवेदनशीलता के साथ बातचीत करना ज़रूरी है। समय पर पहचान, विशेषज्ञों की सलाह और कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी जैसे उपचार प्रभावी साबित होते हैं।

सरकारी सुरक्षा तंत्र और उपलब्ध सहायता

भारत में नशे से प्रभावित बच्चों और युवाओं को जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के तहत कानूनी संरक्षण प्राप्त है। इसके अलावा नेशनल सेंटर फॉर ड्रग एब्यूज प्रिवेंशन और राष्ट्रीय चाइल्ड हेल्पलाइन जैसी सरकारी सेवाओं के माध्यम से परामर्श और पुनर्वास की सुविधा उपलब्ध है।

आगे क्या

सरदार लाल सिंह का परिवार अपनी पदयात्रा जारी रखते हुए रास्ते में पड़ने वाले हर गाँव और शहर में जागरूकता फैला रहा है। यह अभियान दर्शाता है कि सामाजिक बदलाव के लिए व्यक्तिगत संकल्प और सामुदायिक प्रयास कितने ज़रूरी हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि उस सामाजिक संकट की स्वीकृति है जिसे सरकारी नीतियाँ अब तक पूरी तरह नहीं सुलझा पाई हैं। पंजाब में नशे की समस्या दशकों पुरानी है, और राज्य सरकारों के बड़े-बड़े नशामुक्ति अभियानों के बावजूद ज़मीनी हालात बहुत नहीं बदले। यह परिवार हर साल 2,500 किलोमीटर चलकर जो संदेश देता है, वह किसी सरकारी विज्ञापन से ज़्यादा असरदार हो सकता है — क्योंकि यह बलिदान की भाषा में बोलता है। सवाल यह है कि ऐसे व्यक्तिगत प्रयासों को सामुदायिक और संस्थागत समर्थन कब मिलेगा।
RashtraPress
19 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंजाब के इस परिवार की पदयात्रा कहाँ से कहाँ तक है?
यह पदयात्रा पंजाब के अमृतसर से महाराष्ट्र के नांदेड़ स्थित सचखंड हजूर साहिब तक लगभग 2,500 किलोमीटर की है। परिवार यह यात्रा नंगे पैर करता है।
यह पदयात्रा कब से शुरू हुई और कौन कर रहा है?
सरदार लाल सिंह का परिवार वर्ष 2013 से यह पदयात्रा लगातार कर रहा है। 2025 में यह उनका 13वाँ साल है।
इस पदयात्रा का मुख्य उद्देश्य क्या है?
पदयात्रा का मुख्य उद्देश्य युवाओं को नशे की लत से दूर रखने के लिए समाज में जागरूकता फैलाना है। रास्ते में लोगों को नशे के दुष्प्रभावों के बारे में जानकारी दी जाती है।
युवाओं पर नशे के क्या दुष्प्रभाव होते हैं?
विशेषज्ञों के अनुसार, किशोरावस्था में नशे की शुरुआत प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स के विकास को बाधित करती है, जिससे मानसिक स्वास्थ्य, याददाश्त और निर्णय लेने की क्षमता पर दीर्घकालिक नकारात्मक असर पड़ता है।
नशे से प्रभावित युवाओं के लिए भारत में क्या सरकारी सहायता उपलब्ध है?
भारत में नशे से प्रभावित बच्चों और युवाओं को जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के तहत संरक्षण प्राप्त है। नेशनल सेंटर फॉर ड्रग एब्यूज प्रिवेंशन और राष्ट्रीय चाइल्ड हेल्पलाइन के ज़रिए परामर्श और पुनर्वास की सुविधा भी उपलब्ध है।
राष्ट्र प्रेस
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