अखनूर में भारतीय सेना का नशा मुक्ति अभियान, दोरीडागर स्कूल की छात्राओं ने जताई कृतज्ञता

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अखनूर में भारतीय सेना का नशा मुक्ति अभियान, दोरीडागर स्कूल की छात्राओं ने जताई कृतज्ञता

सारांश

भारतीय सेना ने अखनूर के दोरीडागर हायर सेकेंडरी स्कूल में नशा मुक्ति जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया। उपराज्यपाल मनोज सिन्हा के 100 दिनों के नशामुक्त जम्मू-कश्मीर अभियान की कड़ी में आयोजित इस कार्यक्रम में छात्राओं ने सेना का आभार जताया।

मुख्य बातें

भारतीय सेना ने 21 मई 2026 को अखनूर के दोरीडागर हायर सेकेंडरी स्कूल में नशा मुक्ति जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया।
जवानों ने छात्रों को बताया कि नशे से शरीर के अंग क्षतिग्रस्त होते हैं और परिवार टूट जाता है।
उपराज्यपाल मनोज सिन्हा के 100 दिनों के नशामुक्त जम्मू-कश्मीर अभियान के तहत यह कार्यक्रम आयोजित हुआ।
छात्राओं आनवी शर्मा , सोनिया शर्मा और सोनाक्षी शर्मा ने सेना का आभार व्यक्त किया।
सेना अखनूर जैसे सीमावर्ती क्षेत्रों में नियमित रूप से स्कूलों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करती है।

भारतीय सेना ने 21 मई 2026 को अखनूर के दोरीडागर हायर सेकेंडरी स्कूल में एक नशा मुक्ति जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया, जिसमें सेना के जवानों ने स्कूली बच्चों को नशे के दुष्प्रभावों और इससे दूर रहने की अहमियत के बारे में विस्तार से समझाया। यह कार्यक्रम जम्मू-कश्मीर को नशामुक्त बनाने की दिशा में सेना की सामुदायिक पहल का हिस्सा है।

कार्यक्रम में क्या हुआ

सेना के जवानों ने छात्र-छात्राओं को बताया कि नशीले पदार्थों के सेवन से शरीर के अंग क्षतिग्रस्त हो जाते हैं और पूरा परिवार तबाह हो सकता है। जवानों ने बच्चों को प्रेरित किया कि वे स्वयं नशे से दूर रहें और अपने साथियों को भी इस बुराई से बचाएँ। कार्यक्रम में विभिन्न कक्षाओं की छात्राओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।

छात्राओं की प्रतिक्रिया

कार्यक्रम के बाद छात्रा आनवी शर्मा ने कहा कि सेना ने उन्हें बताया कि ड्रग्स से अंग क्षतिग्रस्त हो जाते हैं और इनसे दूर रहना ज़रूरी है। उन्होंने कहा, 'भारतीय सेना को दिल से शुक्रिया। सेना सीमा की सुरक्षा के साथ ही समय-समय पर स्कूल आकर इस तरह के कार्यक्रम करती है।'

11वीं की छात्रा सोनिया शर्मा ने कहा कि सेना के जवानों ने उन्हें बताया कि नशे की लत से न केवल व्यक्ति का स्वास्थ्य बर्बाद होता है, बल्कि उसका परिवार भी टूट जाता है। उन्होंने सेना का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह जानकारी उनके जीवन में काम आएगी।

12वीं की छात्रा सोनाक्षी शर्मा ने कहा कि जब भी कोई जागरूकता अभियान चलता है, सेना के जवान अपना कीमती समय निकालकर छात्रों को प्रेरित करने आते हैं। उन्होंने भारतीय सेना को धन्यवाद दिया।

उपराज्यपाल का 100 दिनों का नशामुक्ति अभियान

छात्रा आनवी शर्मा ने यह भी उल्लेख किया कि उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने जम्मू-कश्मीर को 100 दिनों में नशामुक्त करने का अभियान शुरू किया है। भारतीय सेना का यह स्कूल कार्यक्रम उसी व्यापक अभियान की कड़ी के रूप में देखा जा रहा है। गौरतलब है कि सेना पहले भी ऑपरेशन सिंदूर और बाढ़ राहत जैसे अवसरों पर क्षेत्र के नागरिकों की मदद कर चुकी है।

सेना की सामुदायिक भूमिका

भारतीय सेना जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा कर्तव्यों के अलावा सामुदायिक विकास और जागरूकता कार्यक्रमों में भी सक्रिय भूमिका निभाती रही है। अखनूर जैसे सीमावर्ती क्षेत्रों में स्कूलों तक पहुँचकर युवाओं को नशे के खतरों से आगाह करना इसी प्रतिबद्धता का हिस्सा है। विशेषज्ञों का मानना है कि स्कूल स्तर पर की गई जागरूकता दीर्घकालिक रूप से नशे की समस्या को कम करने में सबसे प्रभावी होती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जहाँ वर्दीधारी जवान अब बंदूक के साथ-साथ जागरूकता का हथियार भी उठा रहे हैं। उपराज्यपाल के 100 दिनों के नशामुक्ति अभियान के साथ सेना का यह तालमेल प्रशंसनीय है, लेकिन असली परीक्षा यह होगी कि क्या ये कार्यक्रम केवल आयोजनों तक सीमित रहते हैं या इनका दीर्घकालिक प्रभाव युवाओं के व्यवहार में दिखता है। सीमावर्ती जिलों में नशे की समस्या की जड़ें गहरी हैं और स्कूल स्तर की जागरूकता ज़रूरी है, पर पर्याप्त नहीं।
RashtraPress
21 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारतीय सेना ने अखनूर में नशा मुक्ति कार्यक्रम क्यों आयोजित किया?
भारतीय सेना ने उपराज्यपाल मनोज सिन्हा के 100 दिनों में जम्मू-कश्मीर को नशामुक्त करने के अभियान के तहत यह कार्यक्रम आयोजित किया। सेना सीमावर्ती क्षेत्रों में नियमित रूप से स्कूलों में जाकर युवाओं को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करती है।
दोरीडागर हायर सेकेंडरी स्कूल के कार्यक्रम में क्या बताया गया?
सेना के जवानों ने छात्रों को बताया कि नशीले पदार्थों के सेवन से शरीर के अंग क्षतिग्रस्त हो जाते हैं और पूरा परिवार बर्बाद हो सकता है। उन्होंने बच्चों को नशे से दूर रहने और अपने साथियों को भी इससे बचाने की प्रेरणा दी।
उपराज्यपाल मनोज सिन्हा का 100 दिनों का नशामुक्ति अभियान क्या है?
उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने जम्मू-कश्मीर को 100 दिनों के भीतर नशामुक्त करने का लक्ष्य रखा है। इस अभियान के तहत सरकारी एजेंसियों और सेना सहित विभिन्न संस्थाएँ स्कूलों, कॉलेजों और सामुदायिक स्तर पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कर रही हैं।
कार्यक्रम के बाद छात्राओं ने क्या कहा?
छात्राओं आनवी शर्मा, सोनिया शर्मा और सोनाक्षी शर्मा ने भारतीय सेना का आभार जताया। उन्होंने कहा कि सेना के जवान सीमा की सुरक्षा के साथ-साथ अपना कीमती समय निकालकर स्कूलों में आते हैं और बच्चों को प्रेरित करते हैं।
क्या भारतीय सेना जम्मू-कश्मीर में इस तरह के कार्यक्रम नियमित रूप से करती है?
हाँ, भारतीय सेना जम्मू-कश्मीर के सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा कर्तव्यों के अलावा सामुदायिक जागरूकता कार्यक्रम भी नियमित रूप से आयोजित करती है। इससे पहले सेना ने ऑपरेशन सिंदूर और बाढ़ राहत जैसे अवसरों पर भी स्थानीय नागरिकों की मदद की है।
राष्ट्र प्रेस
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