रबी अभियान 2026-27: शिवराज सिंह चौहान बोले — किसानों के साथ अटल है मोदी सरकार, 163 लाख मीट्रिक टन उर्वरक भंडार तैयार
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 29 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन — रबी अभियान 2026 के अवसर पर स्पष्ट किया कि अल-नीनो की आशंका, मानसून में 12 प्रतिशत की असमान कमी और अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में उर्वरकों की बढ़ती कीमतों के बावजूद केंद्र सरकार किसानों के हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि चाहे मौसम की मार हो या प्राकृतिक आपदा, सरकार हर परिस्थिति में किसानों के साथ खड़ी है।
सम्मेलन की तैयारी और प्रशासनिक ढाँचा
चौहान ने बताया कि रबी सीजन की यह तैयारी किसी अचानक निर्णय का नतीजा नहीं, बल्कि एक सुनियोजित त्रिस्तरीय प्रशासनिक प्रक्रिया का परिणाम है। पिछले 15 दिनों से राज्य सरकारें जिला और राज्य स्तर पर रबी अभियान की तैयारियों में जुटी थीं। सम्मेलन के पहले दिन सभी राज्यों के कृषि प्रधान सचिवों, कृषि उत्पादन आयुक्तों और उनके तकनीकी विशेषज्ञों की टीमें दिल्ली पहुँचीं। सुबह 10 बजे से रात 8 बजे तक लगातार 10 घंटे केंद्र और राज्यों के बीच कृषि के हर पहलू और विभिन्न योजनाओं की राज्यवार सघन समीक्षा की गई।
सम्मेलन के दूसरे दिन विभिन्न राज्यों के कृषि मंत्री स्वयं उपस्थित रहे और अपने-अपने राज्यों की प्राथमिकताओं व आवश्यकताओं को साझा किया, जिसके आधार पर रबी की राष्ट्रीय कार्ययोजना को अंतिम रूप दिया जा रहा है।
कृषि विकास के ऐतिहासिक आँकड़े
चौहान ने भारत में कृषि विकास को तीन ऐतिहासिक चरणों में प्रस्तुत किया। प्रथम चरण (1967–1995) में खाद्यान्न उत्पादन की औसत वार्षिक वृद्धि 4.1 मिलियन टन रही। द्वितीय चरण (1996–2014) में यह घटकर 3.9 मिलियन टन रह गई। तृतीय चरण (2015 के बाद) में यह उछलकर 8.4 मिलियन टन प्रति वर्ष पर पहुँच गई। उन्होंने बताया कि 1967 से 2014 तक कृषि की औसत विकास दर लगभग 3 प्रतिशत के आसपास थी, जो 2015 के बाद बढ़कर 4.5 प्रतिशत हो गई है — यानी औसत विकास दर में 50 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि।
मानसून की स्थिति और खरीफ रकबा
चौहान ने बताया कि अप्रैल 2026 से ही केंद्र सरकार ने अल-नीनो से निपटने के व्यापक प्रबंध शुरू कर दिए थे। शुरुआती दौर में मानसूनी वर्षा में 14 प्रतिशत की कमी थी, जो पिछले तीन-चार दिनों की अच्छी बारिश के बाद घटकर 12 प्रतिशत रह गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कृषि विज्ञान के मानकों के अनुसार 19 प्रतिशत से कम की कमी को गंभीर सूखा संकट नहीं माना जाता।
केंद्र, राज्यों, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) और किसानों के संयुक्त प्रयासों से खरीफ बुवाई के रकबे में मात्र 1 प्रतिशत की मामूली कमी आई है। सबसे अधिक गिरावट धान की फसल में रही, जहाँ लगभग 16.32 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल घटा। वहीं उड़द, बाजरा, ज्वार, तिल, सूरजमुखी और तुअर (अरहर) जैसी दलहनी, तिलहनी और मोटे अनाजों के रकबे में उत्साहजनक बढ़ोतरी दर्ज की गई।
कर्नाटक, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, राजस्थान और गुजरात में भारी वर्षा, बाढ़ या सूखे के चलते लगभग 6,11,000 हेक्टेयर क्षेत्र में फसल प्रभावित होने की प्रारंभिक सूचना मिली है, जिसका विस्तृत वैज्ञानिक आकलन कराया जा रहा है।
उर्वरक भंडार और किसानों को आश्वासन
वैश्विक बाज़ार में उर्वरकों की कीमतें दोगुनी तक बढ़ने की स्थिति में चौहान ने किसानों को स्पष्ट भरोसा दिलाया। रबी सीजन 2026-27 के लिए सभी राज्यों की ओर से कुल 380 लाख मीट्रिक टन उर्वरक (डीएपी, यूरिया, एनपीके आदि) की माँग प्रस्तुत की गई है। देश में इस समय 163 लाख मीट्रिक टन से अधिक उर्वरक का विशाल भंडार पहले से मौजूद है — जबकि पिछले वर्ष इसी समय यह स्टॉक मात्र 122 लाख मीट्रिक टन था। उन्होंने स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय कीमतों का कोई भी वित्तीय बोझ भारतीय किसान पर नहीं पड़ने दिया जाएगा।
मिट्टी परीक्षण पर आधारित एक पायलट परियोजना के तहत प्रमुख राज्यों के दो-दो जिलों में रासायनिक खादों के संतुलित उपयोग का परीक्षण किया गया, जिसके परिणामस्वरूप उर्वरक खपत में 27 प्रतिशत की कमी आई और देश को ₹1,400 करोड़ से अधिक की सीधी बचत हुई।
खेत बचाओ अभियान और डिजिटल कृषि
चौहान ने बताया कि 22 अक्टूबर से 30 नवंबर 2026 तक पूरे देश में 'खेत बचाओ अभियान' चलाया जाएगा। इस अभियान के दौरान ICAR के वैज्ञानिक, कृषि विज्ञान केंद्रों (KVK) के विशेषज्ञ, ATMA की टीमें, राज्य कृषि विभाग के अधिकारी और केंद्रीय व राज्य मंत्री सीधे गाँवों और खेतों में किसानों के बीच जाएँगे। अभियान के तहत मिट्टी की ज़रूरत के अनुसार संतुलित उर्वरक उपयोग, उन्नत किस्म का चयन और सभी पात्र किसानों के किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) बनवाने का काम किया जाएगा।
डिजिटल कृषि के मोर्चे पर एग्रीस्टैक के माध्यम से विशिष्ट फार्मर आईडी बनाने का काम तेज़ी से चल रहा है, जिससे सरकारी योजनाओं और तकनीकी सलाह को सीधे किसान के मोबाइल तक पहुँचाया जा सके।
उत्पादन लक्ष्य और एमएसपी संरक्षण
वर्ष 2025-26 में 362.60 मिलियन टन के लक्ष्य के मुकाबले किसानों ने 376.56 मिलियन टन खाद्यान्न का बंपर उत्पादन किया। वर्ष 2026-27 के लिए अल-नीनो की परिस्थितियों का वैज्ञानिक आकलन करते हुए 373.93 मिलियन टन का कुल लक्ष्य रखा गया है, जिसमें रबी सीजन का अकेला लक्ष्य 177.72 मिलियन टन है।
न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) संरक्षण के तहत यदि बाज़ार में कीमतें MSP से नीचे जाती हैं, तो केंद्र सरकार की नोडल एजेंसियाँ — नेफेड और एनसीसीएफ — राज्यों का इंतज़ार किए बिना सीधे मंडियों में उतरकर खरीद शुरू करेंगी। इसके अलावा RKVY और कृषोन्नति योजना के तहत राज्यों को पहले ₹4,000 करोड़ और फिर ₹3,000 करोड़ से अधिक — कुल मिलाकर ₹7,000 करोड़ से अधिक — की धनराशि पहले ही हस्तांतरित की जा चुकी है।
पराली और प्रदूषण विवाद पर कृषि मंत्री का रुख
दिल्ली-एनसीआर के वायु प्रदूषण में पराली की भूमिका पर चौहान ने आँकड़ों के साथ स्पष्ट किया कि वर्ष 2019-20 में प्रदूषण में पराली का योगदान लगभग 7 प्रतिशत था, जो अब घटकर 2.5 प्रतिशत रह गया है। उन्होंने कहा कि किसानों को प्रदूषण का एकमात्र खलनायक ठहराना और उन्हें प्रताड़ित करना उचित नहीं है। कृषि मंत्रालय किसानों को आधुनिक मशीनरी और संवाद के ज़रिए समस्या का हल निकालने के पक्ष में है, न कि बंदिशें थोपकर।
गन्ने में 'रेड रॉट' और कपास में 'पिंक बॉलवर्म' कीट की रोकथाम के लिए ICAR के वैज्ञानिक युद्धस्तर पर रोग-प्रतिरोधी नई किस्में विकसित कर रहे हैं। भारत गन्ने के उत्पादन में विश्व में शीर्ष स्थान पर बना हुआ है। आगे 3 अक्टूबर 2026 को कर्नाटक और महाराष्ट्र में विशेष केंद्रीय टीमें भेजी जाएँगी और चौहान ने स्वयं भी इन राज्यों का दौरा करने की घोषणा की है।