27 सितंबर 2026
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राहुल गांधी चुनाव आयोग को बदनाम करने में लगे हैं: भाजपा प्रवक्ता आरपी सिंह का पलटवार

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राहुल गांधी चुनाव आयोग को बदनाम करने में लगे हैं: भाजपा प्रवक्ता आरपी सिंह का पलटवार

सारांश

भाजपा प्रवक्ता आरपी सिंह ने राहुल गांधी पर आरोप लगाया कि वे संवैधानिक संस्थाओं को बदनाम करने की मुहिम में हैं और अब निशाने पर चुनाव आयोग है। इंडी गठबंधन की एकता पर भी सवाल उठाए और मुस्लिम पर्सनल लॉ पर दिल्ली उच्च न्यायालय की टिप्पणी का समर्थन किया।

मुख्य बातें

भाजपा प्रवक्ता आरपी सिंह ने 27 सितंबर 2026 को राहुल गांधी पर आरोप लगाया कि वे संवैधानिक संस्थाओं को लगातार निशाना बना रहे हैं।
राहुल गांधी द्वारा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर एक पूर्व आईएएस अधिकारी का वीडियो रीपोस्ट करने को भ्रामक बताया गया।
आरपी सिंह ने 30 सितंबर को प्रस्तावित इंडी गठबंधन की बैठक को 'भानुमति का कुनबा' कहकर उसकी एकता पर सवाल उठाए।
दिल्ली उच्च न्यायालय की टिप्पणी का हवाला देते हुए कहा — मुस्लिम पर्सनल लॉ पॉक्सो अधिनियम और संविधान से ऊपर नहीं।
इन सभी आरोपों पर राहुल गांधी , ज्ञानेश कुमार या संबंधित विपक्षी दलों की प्रतिक्रिया अभी तक सामने नहीं आई है।

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रवक्ता आरपी सिंह ने 27 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि वह लगातार संवैधानिक संस्थाओं को निशाना बनाते रहे हैं और अब उनके निशाने पर भारत निर्वाचन आयोग है। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को लेकर राहुल गांधी के बयानों को भ्रामक और बेबुनियाद बताया।

मुख्य चुनाव आयुक्त पर विवाद

आरपी सिंह ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी ने एक पूर्व आईएएस अधिकारी का वीडियो रीपोस्ट किया, जिसमें मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर कथित तौर पर किसी अधिकारी को भाजपा में शामिल होने का प्रलोभन देने का आरोप लगाया गया था। सिंह ने दावा किया कि उक्त अधिकारी के खिलाफ भ्रष्टाचार के कथित मामले भी दर्ज हैं और वह मामला कांग्रेस के शासनकाल से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि संवैधानिक संस्थाओं पर आरोप लगाने से पहले आरोप लगाने वालों की पृष्ठभूमि भी देखी जानी चाहिए। गौरतलब है कि इन आरोपों पर राहुल गांधी या संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

इंडी गठबंधन की बैठक पर सवाल

30 सितंबर 2026 को प्रस्तावित इंडी गठबंधन की बैठक को लेकर आरपी सिंह ने विपक्षी दलों के बीच वैचारिक विरोधाभासों को उजागर किया। उन्होंने कहा कि जो दल अलग-अलग राज्यों में एक-दूसरे के खिलाफ चुनाव लड़ते हैं, वे राष्ट्रीय स्तर पर किस साझे मुद्दे पर एकजुट होंगे, यह स्पष्ट नहीं है।

सिंह ने आम आदमी पार्टी (AAP), भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) और तृणमूल कांग्रेस (TMC) प्रमुख ममता बनर्जी का उदाहरण देते हुए पूछा कि क्या ये दल वास्तव में एकजुट होकर काम कर सकते हैं। उन्होंने केरल का विशेष उदाहरण दिया, जहाँ कांग्रेस और वाम दल परंपरागत रूप से एक-दूसरे के राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी हैं। सिंह ने इस गठबंधन को 'भानुमति का कुनबा' की संज्ञा दी।

पंजाब में आवास विवाद

कांग्रेस नेता सुखपाल सिंह खैरा के उस आरोप पर — कि आम आदमी पार्टी के नेता राज्य मंत्रियों को आवंटित सरकारी आवासों में रह रहे हैं — भाजपा प्रवक्ता ने दावा किया कि कुछ आवास खाली कराए गए हैं और यह मुद्दा पंजाब की राजनीति में विवाद का केंद्र बना हुआ है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि दिल्ली में सत्ता गँवाने के बाद कुछ AAP नेता अब पंजाब में राजनीतिक सक्रियता बढ़ा रहे हैं। हालाँकि, इन दावों पर संबंधित नेताओं की प्रतिक्रिया सार्वजनिक नहीं हुई है।

मुस्लिम पर्सनल लॉ और दिल्ली हाई कोर्ट

मुस्लिम पर्सनल लॉ को लेकर दिल्ली उच्च न्यायालय की हालिया टिप्पणी का हवाला देते हुए आरपी सिंह ने कहा कि यदि 18 वर्ष से कम आयु की किसी लड़की का विवाह किया जाता है और वह शिकायत दर्ज कराती है, तो पॉक्सो अधिनियम के तहत कार्रवाई हो सकती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अदालत ने माना है कि मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के प्रावधान पॉक्सो एक्ट और देश के अपराधिक कानूनों से ऊपर नहीं हैं। उन्होंने कहा, 'देश में किसी भी व्यक्तिगत कानून को आपराधिक कानूनों और संविधान से ऊपर नहीं माना जा सकता।'

आगे क्या होगा

यह बयान ऐसे समय आया है जब विपक्षी गठबंधन 30 सितंबर की अपनी बैठक की तैयारी में जुटा है और चुनाव आयुक्त की नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक तनाव पहले से बना हुआ है। भाजपा के इस पलटवार के बाद कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों की प्रतिक्रिया राजनीतिक बहस को और तेज कर सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

संवैधानिक विशेषज्ञ भी उठाते रहे हैं। जब आरोप-प्रत्यारोप का यह चक्र चलता है, तो असली बहस — कि क्या चुनाव आयुक्त की नियुक्ति प्रक्रिया पर्याप्त रूप से पारदर्शी है — पृष्ठभूमि में चली जाती है। इंडी गठबंधन की आंतरिक दरारों पर सिंह का विश्लेषण तथ्यात्मक रूप से सटीक हो सकता है, परंतु यह तर्क भी सत्तारूढ़ दल की जवाबदेही से ध्यान हटाने का काम करता है।
RashtraPress
27 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आरपी सिंह ने राहुल गांधी पर क्या आरोप लगाए?
भाजपा प्रवक्ता आरपी सिंह ने 27 सितंबर 2026 को आरोप लगाया कि राहुल गांधी लगातार संवैधानिक संस्थाओं को निशाना बनाते रहे हैं और अभी उनके निशाने पर भारत निर्वाचन आयोग है। सिंह का कहना था कि राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर आधारित एक पूर्व आईएएस अधिकारी का विवादित वीडियो रीपोस्ट किया।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार विवाद क्या है?
राहुल गांधी ने एक पूर्व आईएएस अधिकारी का वीडियो रीपोस्ट किया जिसमें CEC ज्ञानेश कुमार पर कथित तौर पर किसी अधिकारी को भाजपा में शामिल होने का प्रलोभन देने का आरोप था। भाजपा प्रवक्ता आरपी सिंह ने इस वीडियो को भ्रामक बताते हुए कहा कि संबंधित अधिकारी पर भ्रष्टाचार के कथित मामले कांग्रेस के शासनकाल से जुड़े हैं।
इंडी गठबंधन की 30 सितंबर की बैठक पर भाजपा ने क्या कहा?
आरपी सिंह ने 30 सितंबर 2026 को प्रस्तावित इंडी गठबंधन की बैठक को 'भानुमति का कुनबा' बताया। उन्होंने सवाल उठाया कि जो दल राज्य स्तर पर एक-दूसरे के खिलाफ चुनाव लड़ते हैं — जैसे केरल में कांग्रेस और वाम दल — वे राष्ट्रीय मंच पर किस साझे एजेंडे पर एकजुट होंगे।
मुस्लिम पर्सनल लॉ पर दिल्ली हाई कोर्ट की टिप्पणी क्या थी?
आरपी सिंह के अनुसार, दिल्ली उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के प्रावधान पॉक्सो अधिनियम और देश के आपराधिक कानूनों से ऊपर नहीं हैं। अदालत की टिप्पणी के मुताबिक, यदि 18 वर्ष से कम आयु की लड़की से विवाह कर शिकायत दर्ज होती है तो पॉक्सो एक्ट के तहत कार्रवाई हो सकती है।
पंजाब में AAP के सरकारी आवास विवाद पर भाजपा का क्या कहना है?
कांग्रेस नेता सुखपाल सिंह खैरा के आरोप पर — कि AAP नेता राज्य मंत्रियों को आवंटित सरकारी आवासों में रह रहे हैं — आरपी सिंह ने दावा किया कि कुछ आवास खाली कराए गए हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि दिल्ली में सत्ता गँवाने के बाद कुछ AAP नेता पंजाब में सक्रियता बढ़ा रहे हैं।
राष्ट्र प्रेस
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