राहुल गांधी चुनाव आयोग को निशाना बना रहे हैं, संवैधानिक संस्थाएँ खतरे में: BJP प्रवक्ता आरपी सिंह
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रवक्ता आरपी सिंह ने 27 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में कहा कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी लगातार देश की संवैधानिक संस्थाओं को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं और इस समय उनके निशाने पर चुनाव आयोग है। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को लेकर राहुल गांधी के बयान, मुस्लिम पर्सनल लॉ पर दिल्ली उच्च न्यायालय की टिप्पणी और 30 सितंबर को प्रस्तावित इंडी गठबंधन की बैठक — तीनों मुद्दों पर विपक्ष को घेरा।
राहुल गांधी और सीईसी विवाद
आरपी सिंह ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी ने एक पूर्व आईएएस अधिकारी का वीडियो रीपोस्ट किया, जिसमें मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर किसी अधिकारी को भाजपा में शामिल होने के लिए कथित तौर पर प्रलोभन देने का आरोप लगाया गया था। उन्होंने कहा कि उस संबंधित अधिकारी पर खुद कथित भ्रष्टाचार के मामले लंबित हैं और वह मामला कांग्रेस के शासनकाल से जुड़ा बताया जा रहा है।
सिंह ने कहा कि संवैधानिक संस्थाओं पर आरोप लगाने से पहले आरोप लगाने वाले व्यक्तियों की पृष्ठभूमि को भी ध्यान में रखना चाहिए। उल्लेखनीय है कि इन आरोपों पर संबंधित पक्षों — राहुल गांधी, ज्ञानेश कुमार या पूर्व आईएएस अधिकारी — की प्रतिक्रिया आरपी सिंह के बयान में शामिल नहीं की गई।
इंडी गठबंधन की एकजुटता पर सवाल
30 सितंबर को प्रस्तावित इंडी गठबंधन की बैठक को लेकर आरपी सिंह ने विपक्षी दलों के आपसी विरोधाभासों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी (AAP), भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) और तृणमूल कांग्रेस (TMC) की नेता ममता बनर्जी अलग-अलग राज्यों में एक-दूसरे के राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी हैं।
उन्होंने केरल का उदाहरण देते हुए कहा कि वहाँ कांग्रेस और वाम दल परस्पर विरोधी खेमों में हैं। ऐसे में राष्ट्रीय मंच पर उनकी एकता की विश्वसनीयता पर स्वाभाविक प्रश्नचिह्न लगता है। सिंह ने इस गठजोड़ को 'भानुमति का कुनबा' की संज्ञा दी।
मुस्लिम पर्सनल लॉ और POCSO पर BJP का रुख
दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा मुस्लिम पर्सनल लॉ पर की गई हालिया टिप्पणी का हवाला देते हुए आरपी सिंह ने कहा कि अदालत ने स्पष्ट किया है कि मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड से जुड़े प्रावधान POCSO अधिनियम और देश के लागू आपराधिक कानूनों से ऊपर नहीं हैं। उन्होंने कहा कि यदि 18 वर्ष से कम आयु की किसी लड़की के साथ विवाह किया जाता है और वह शिकायत दर्ज कराती है, तो POCSO के तहत कार्रवाई हो सकती है।
सिंह ने स्पष्ट किया कि व्यक्तिगत कानूनों और संवैधानिक-वैधानिक प्रावधानों के बीच टकराव की स्थिति में संविधान सर्वोच्च रहेगा और कानूनी कार्रवाई होगी। यह टिप्पणी उस संदर्भ में आई है जब यूनिफॉर्म सिविल कोड पर राष्ट्रीय बहस एक बार फिर तेज़ हो रही है।
AAP और पंजाब विवाद
कांग्रेस नेता सुखपाल सिंह खैरा के उस आरोप पर कि AAP नेता पंजाब में राज्य मंत्रियों को आवंटित सरकारी आवासों में रह रहे हैं, आरपी सिंह ने कहा कि कुछ आवास खाली कराए गए हैं और यह मुद्दा पंजाब की राजनीति में विवादास्पद बना हुआ है। उन्होंने यह भी कटाक्ष किया कि दिल्ली में सत्ता गँवाने के बाद कुछ नेता अब पंजाब में भूमिका तलाश रहे हैं। इन आरोपों पर संबंधित नेताओं की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया अभी तक सामने नहीं आई है।
आगे क्या
इंडी गठबंधन की 30 सितंबर की बैठक के बाद विपक्षी एकजुटता की असली तस्वीर सामने आने की उम्मीद है। BJP की तीखी प्रतिक्रिया यह संकेत देती है कि चुनाव आयुक्त विवाद और मुस्लिम पर्सनल लॉ — दोनों मुद्दे आने वाले दिनों में संसद और सार्वजनिक विमर्श में और गर्म होंगे।