राहुल गांधी पर उत्तराखंड FIR: पवन खेड़ा बोले — सवाल उठाने वालों को निशाना बनाती है BJP
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस के राज्यसभा सांसद पवन खेड़ा ने 31 अगस्त को नई दिल्ली में तीन अलग-अलग मुद्दों पर केंद्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर तीखा हमला बोला — उत्तराखंड में कांग्रेस नेता राहुल गांधी के खिलाफ दर्ज नई FIR, सर्वोच्च न्यायालय की छात्रों से जुड़ी हालिया टिप्पणी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत के न्यूयॉर्क में दिए बयान पर। खेड़ा का कहना है कि यह FIR किसी व्यक्ति पर नहीं, बल्कि शोषित और वंचित वर्गों की आवाज़ उठाने की परंपरा पर हमला है।
उत्तराखंड FIR पर कांग्रेस का रुख
पवन खेड़ा ने कहा कि राहुल गांधी पर पहले से ही 40-50 मामले दर्ज हैं और यह नई FIR उस सूची में एक और इज़ाफ़ा भर है। उन्होंने कहा, 'पहले से ही 40-50 मामले हैं, एक और जुड़ जाएगा, इसलिए इसकी चिंता न करें।' उनके अनुसार असली सवाल यह है कि BJP इस FIR के ज़रिए क्या संदेश देना चाहती है।
खेड़ा ने कहा कि यह संदेश 'पूरे शोषित, वंचित और दलित समुदाय के लिए है कि अगर उन्होंने कभी आवाज़ उठाई है या किसी ने उनके लिए आवाज़ उठाई है तो आवाज़ उठाने वाले व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।' उन्होंने इस FIR को BJP और RSS की मानसिकता का 'एक और उदाहरण' बताया।
सर्वोच्च न्यायालय की टिप्पणी का स्वागत
सर्वोच्च न्यायालय ने हाल ही में कहा था कि छात्रों को सवाल पूछने से नहीं रोका जाना चाहिए। इस पर खेड़ा ने कहा, 'सुप्रीम कोर्ट की इस टिप्पणी का हम स्वागत करते हैं।' उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान में सरकार से सवाल पूछने वाले पर 'खालिस्तानी और आतंकवादी जैसे आरोप लगा दिए जाते हैं।'
यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब विपक्षी दल लगातार यह आरोप लगाते रहे हैं कि असहमति की आवाज़ों को संस्थागत दबाव के ज़रिए दबाया जा रहा है।
मोहन भागवत के न्यूयॉर्क बयान पर पलटवार
RSS प्रमुख मोहन भागवत ने न्यूयॉर्क में कहा था कि भारत की पहचान विविधता में एकता से है और जो हिंदू यह मानता है कि भारत में मुसलमान नहीं चाहिए, वह हिंदू नहीं रह सकता। इस बयान पर खेड़ा ने कहा, 'हाथी के दांत खाने के और दिखाने के कुछ और होते हैं।'
खेड़ा ने कहा कि देश के बाहर और देश के भीतर RSS की भाषा में फ़र्क है। उन्होंने तर्क दिया कि अगर 'अखंड भारत' की परिकल्पना साकार हो, तो भारत में मुसलमानों की आबादी वर्तमान 14-15 प्रतिशत से बढ़कर 45 प्रतिशत तक पहुँच जाएगी — और उन्होंने सवाल उठाया कि क्या RSS उसे स्वीकार कर पाएगा।
विपक्ष की व्यापक रणनीति
गौरतलब है कि यह तीनों मुद्दे — FIR, न्यायपालिका की स्वतंत्रता और RSS के बयान — कांग्रेस की उस व्यापक रणनीति का हिस्सा हैं जिसमें वह संवैधानिक मूल्यों और अल्पसंख्यक अधिकारों के सवाल पर BJP को घेरने की कोशिश कर रही है। आलोचकों का कहना है कि राहुल गांधी पर बढ़ते मुकदमे विपक्षी आवाज़ों को दबाने का एक तरीका हैं, जबकि सरकार इन आरोपों को खारिज करती है। आने वाले हफ्तों में इस FIR पर कानूनी और राजनीतिक घटनाक्रम दोनों पर नज़र बनी रहेगी।