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राहुल गांधी पर उत्तराखंड FIR: पवन खेड़ा बोले — सवाल उठाने वालों को निशाना बनाती है BJP

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राहुल गांधी पर उत्तराखंड FIR: पवन खेड़ा बोले — सवाल उठाने वालों को निशाना बनाती है BJP

सारांश

उत्तराखंड में राहुल गांधी पर दर्ज नई FIR को कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा ने शोषित वर्गों की आवाज़ दबाने की BJP-RSS मानसिकता का प्रतीक बताया। साथ ही मोहन भागवत के न्यूयॉर्क बयान को 'हाथी के दांत' की तरह — बाहर कुछ, भीतर कुछ — करार दिया।

मुख्य बातें

उत्तराखंड में राहुल गांधी के खिलाफ नई FIR दर्ज; कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा ने इसे BJP-RSS मानसिकता का उदाहरण बताया।
खेड़ा के अनुसार राहुल गांधी पर पहले से 40-50 मामले दर्ज हैं; यह FIR शोषित-वंचित वर्गों को चुप कराने का संदेश है।
सर्वोच्च न्यायालय की 'छात्रों को सवाल पूछने से न रोकें' वाली टिप्पणी का कांग्रेस ने स्वागत किया।
RSS प्रमुख मोहन भागवत ने न्यूयॉर्क में कहा — मुसलमानों को न मानने वाला हिंदू नहीं; खेड़ा ने देश के भीतर और बाहर की भाषा में 'दोहरेपन' का आरोप लगाया।
खेड़ा ने तर्क दिया कि 'अखंड भारत' बनने पर मुसलमानों की आबादी 45 प्रतिशत हो जाएगी — RSS उसे स्वीकार कर पाएगा?

कांग्रेस के राज्यसभा सांसद पवन खेड़ा ने 31 अगस्त को नई दिल्ली में तीन अलग-अलग मुद्दों पर केंद्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर तीखा हमला बोला — उत्तराखंड में कांग्रेस नेता राहुल गांधी के खिलाफ दर्ज नई FIR, सर्वोच्च न्यायालय की छात्रों से जुड़ी हालिया टिप्पणी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत के न्यूयॉर्क में दिए बयान पर। खेड़ा का कहना है कि यह FIR किसी व्यक्ति पर नहीं, बल्कि शोषित और वंचित वर्गों की आवाज़ उठाने की परंपरा पर हमला है।

उत्तराखंड FIR पर कांग्रेस का रुख

पवन खेड़ा ने कहा कि राहुल गांधी पर पहले से ही 40-50 मामले दर्ज हैं और यह नई FIR उस सूची में एक और इज़ाफ़ा भर है। उन्होंने कहा, 'पहले से ही 40-50 मामले हैं, एक और जुड़ जाएगा, इसलिए इसकी चिंता न करें।' उनके अनुसार असली सवाल यह है कि BJP इस FIR के ज़रिए क्या संदेश देना चाहती है।

खेड़ा ने कहा कि यह संदेश 'पूरे शोषित, वंचित और दलित समुदाय के लिए है कि अगर उन्होंने कभी आवाज़ उठाई है या किसी ने उनके लिए आवाज़ उठाई है तो आवाज़ उठाने वाले व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।' उन्होंने इस FIR को BJP और RSS की मानसिकता का 'एक और उदाहरण' बताया।

सर्वोच्च न्यायालय की टिप्पणी का स्वागत

सर्वोच्च न्यायालय ने हाल ही में कहा था कि छात्रों को सवाल पूछने से नहीं रोका जाना चाहिए। इस पर खेड़ा ने कहा, 'सुप्रीम कोर्ट की इस टिप्पणी का हम स्वागत करते हैं।' उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान में सरकार से सवाल पूछने वाले पर 'खालिस्तानी और आतंकवादी जैसे आरोप लगा दिए जाते हैं।'

यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब विपक्षी दल लगातार यह आरोप लगाते रहे हैं कि असहमति की आवाज़ों को संस्थागत दबाव के ज़रिए दबाया जा रहा है।

मोहन भागवत के न्यूयॉर्क बयान पर पलटवार

RSS प्रमुख मोहन भागवत ने न्यूयॉर्क में कहा था कि भारत की पहचान विविधता में एकता से है और जो हिंदू यह मानता है कि भारत में मुसलमान नहीं चाहिए, वह हिंदू नहीं रह सकता। इस बयान पर खेड़ा ने कहा, 'हाथी के दांत खाने के और दिखाने के कुछ और होते हैं।'

खेड़ा ने कहा कि देश के बाहर और देश के भीतर RSS की भाषा में फ़र्क है। उन्होंने तर्क दिया कि अगर 'अखंड भारत' की परिकल्पना साकार हो, तो भारत में मुसलमानों की आबादी वर्तमान 14-15 प्रतिशत से बढ़कर 45 प्रतिशत तक पहुँच जाएगी — और उन्होंने सवाल उठाया कि क्या RSS उसे स्वीकार कर पाएगा।

विपक्ष की व्यापक रणनीति

गौरतलब है कि यह तीनों मुद्दे — FIR, न्यायपालिका की स्वतंत्रता और RSS के बयान — कांग्रेस की उस व्यापक रणनीति का हिस्सा हैं जिसमें वह संवैधानिक मूल्यों और अल्पसंख्यक अधिकारों के सवाल पर BJP को घेरने की कोशिश कर रही है। आलोचकों का कहना है कि राहुल गांधी पर बढ़ते मुकदमे विपक्षी आवाज़ों को दबाने का एक तरीका हैं, जबकि सरकार इन आरोपों को खारिज करती है। आने वाले हफ्तों में इस FIR पर कानूनी और राजनीतिक घटनाक्रम दोनों पर नज़र बनी रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन जनमानस में धारणा पहले ही बन रही है। मोहन भागवत के बयान पर खेड़ा की 'अखंड भारत' वाली काट तार्किक रूप से तीखी है, पर मुख्यधारा की कवरेज इस आंतरिक विरोधाभास को अक्सर नज़रअंदाज़ कर देती है। सर्वोच्च न्यायालय की टिप्पणी का स्वागत करते हुए विपक्ष ने न्यायपालिका को अपने पक्ष में एक नैतिक संदर्भ बिंदु के रूप में स्थापित करने की कोशिश की है — यह रणनीति आगामी चुनावी मौसम में और तेज़ होगी।
RashtraPress
15 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

उत्तराखंड में राहुल गांधी के खिलाफ FIR क्यों दर्ज हुई?
उत्तराखंड में राहुल गांधी के खिलाफ एक नई FIR दर्ज की गई है, हालांकि इसके सटीक आरोपों का विवरण अभी सामने आ रहा है। कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा के अनुसार यह उन 40-50 मामलों की सूची में एक और इज़ाफ़ा है जो पहले से राहुल गांधी पर दर्ज हैं।
पवन खेड़ा ने इस FIR को किस रूप में देखा?
पवन खेड़ा ने इसे BJP और RSS की उस मानसिकता का उदाहरण बताया जिसमें शोषित, वंचित और दलित वर्गों के लिए आवाज़ उठाने वालों को निशाना बनाया जाता है। उनका कहना है कि यह FIR एक राजनीतिक संदेश है, कानूनी कार्रवाई नहीं।
मोहन भागवत ने न्यूयॉर्क में क्या कहा था?
RSS प्रमुख मोहन भागवत ने न्यूयॉर्क में कहा कि भारत की पहचान विविधता में एकता से है और जो हिंदू यह मानता है कि भारत में मुसलमान नहीं चाहिए, वह हिंदू नहीं रह सकता। पवन खेड़ा ने इसे देश के बाहर की भाषा और देश के भीतर की भाषा में 'दोहरेपन' का उदाहरण बताया।
सर्वोच्च न्यायालय की किस टिप्पणी का कांग्रेस ने स्वागत किया?
सर्वोच्च न्यायालय ने हाल ही में कहा कि छात्रों को सवाल पूछने से नहीं रोका जाना चाहिए। कांग्रेस ने इसका स्वागत करते हुए कहा कि मौजूदा माहौल में सरकार से सवाल पूछने वालों पर 'खालिस्तानी और आतंकवादी' जैसे आरोप लगाए जाते हैं।
खेड़ा का 'अखंड भारत' वाला तर्क क्या था?
पवन खेड़ा ने कहा कि RSS 'अखंड भारत' की बात करता है, लेकिन अगर अखंड भारत बनता है तो भारत में मुसलमानों की आबादी वर्तमान 14-15 प्रतिशत से बढ़कर 45 प्रतिशत तक पहुँच जाएगी। उन्होंने सवाल उठाया कि जो 14-15 प्रतिशत को भी बर्दाश्त नहीं कर पाते, वे 45 प्रतिशत को कैसे स्वीकार करेंगे।
राष्ट्र प्रेस
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