गौरव वल्लभ का पवन खेड़ा पर हमला: हिमंता की पत्नी पर झूठे आरोप, न्यायिक सजा की चेतावनी
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेता और अर्थशास्त्री गौरव वल्लभ ने 15 मई 2026 को कांग्रेस नेता पवन खेड़ा पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की पत्नी पर लगाए गए आरोप पूरी तरह झूठे और बेबुनियाद हैं। वल्लभ ने इसे लोकतंत्र और चुनावी प्रक्रिया को कमज़ोर करने की सुनियोजित कोशिश बताया और चेतावनी दी कि भारतीय न्यायिक व्यवस्था ऐसे कृत्यों को बिना दंड के नहीं छोड़ती।
गौरव वल्लभ के आरोप और बयान
वल्लभ ने कहा, 'पवन खेड़ा ने एक गैर-राजनीतिक महिला पर झूठे, भ्रम फैलाने वाले और आधारहीन आरोप लगाए। यह पाप करने जैसा है। इसका मकसद लोकतंत्र और संविधान को प्रभावित करना था। उन्होंने चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश की। भारत की न्यायिक व्यवस्था में इस तरह के कृत्य के लिए जो भी सजा तय है, वह उन्हें जरूर मिलेगी।' यह बयान राजनीतिक गलियारों में तेज़ी से चर्चा का विषय बन गया है।
राहुल गांधी की संलिप्तता पर सतर्क रुख
जब वल्लभ से पूछा गया कि क्या इन आरोपों के पीछे लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी का हाथ है, तो उन्होंने सावधानी बरतते हुए कहा, 'मेरे पास इस बारे में कोई ठोस जानकारी नहीं है, इसलिए बिना तथ्यों के मैं किसी का नाम नहीं ले सकता। लेकिन जो भी लोग इसके पीछे होंगे, उन्हें भारत की न्यायिक व्यवस्था के तहत कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए।' गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब BJP नेताओं ने कांग्रेस पर महिलाओं को राजनीतिक निशाना बनाने का आरोप लगाया हो।
कांग्रेस की चुनावी स्थिति पर वल्लभ का विश्लेषण
वल्लभ ने कांग्रेस की क्षेत्रीय राजनीति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस लगातार तीसरी बार असम में चुनाव हार चुकी है और प्रत्येक चुनाव में उसकी सीटें पहले से कम होती जा रही हैं। पश्चिम बंगाल में पार्टी की स्थिति और भी दयनीय बताई, जहाँ उसका नामोनिशान लगभग मिट चुका है।
DMK और तमिलनाडु गठबंधन पर तंज
वल्लभ ने तमिलनाडु की राजनीति का उल्लेख करते हुए कहा कि कांग्रेस ने वहाँ सहयोगियों के सहारे अपनी उपस्थिति बनाए रखी, लेकिन बाद में उन्हीं को धोखा दिया। उन्होंने कहा, 'पाँच दिन पहले तक द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) नेता राहुल गांधी के बड़े भाई जैसे थे, लेकिन अब वे स्टालिन को पहचानने से भी इनकार कर रहे हैं।' उन्होंने राहुल गांधी की राजनीति को 'अवसरवादी राजनीति' करार देते हुए कहा कि ऐसी नीति दीर्घकाल में किसी नेता के लिए लाभदायक नहीं होती।
आगे क्या
वल्लभ के इस बयान के बाद राजनीतिक तनाव और बढ़ने की संभावना है। यह ऐसे समय में आया है जब असम में चुनावी माहौल गरम है और भाजपा-कांग्रेस के बीच वाकयुद्ध तेज़ हो रहा है। अब देखना यह होगा कि पवन खेड़ा या कांग्रेस इस पर क्या प्रतिक्रिया देती है और क्या कोई कानूनी कार्रवाई वास्तव में आगे बढ़ती है।