राहुल गांधी खाने के बहाने देश तोड़ने की कोशिश कर रहे हैं: भाजपा नेता टीआर श्रीनिवास
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेता टीआर श्रीनिवास ने 15 सितंबर 2026 को कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि वे ब्रिक्स में शाकाहारी भोजन संबंधी बयान के ज़रिये खाने के नाम पर देश को बाँटने की कोशिश कर रहे हैं। श्रीनिवास ने यह भी कहा कि बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर उम्र-सीमा तय करने की दिशा में भारत सरकार जो कदम उठा रही है, वह स्वागत योग्य है।
सोशल मीडिया आयु-सीमा पर भाजपा की राय
टीआर श्रीनिवास ने कहा कि ऑस्ट्रेलिया, जापान और यूरोपीय संघ समेत कई पश्चिमी देशों ने एक निश्चित आयु से कम बच्चों को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर जाने से रोकने का नियम लागू किया है। उनके अनुसार, यह कदम चाइल्ड पोर्नोग्राफी, यौन शोषण और घृणा अपराध जैसी समस्याओं पर अंकुश लगाने में सहायक होगा।
उन्होंने कहा कि भारत सरकार भी इस दिशा में सक्रिय है और सोशल मीडिया नेटवर्क तथा अन्य बड़ी टेक कंपनियों को पहले ही नोटिस जारी किए जा चुके हैं। श्रीनिवास के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार विभिन्न देशों की सर्वोत्तम प्रथाओं को अपनाकर आगे बढ़ रही है। उन्होंने इंडी गठबंधन के विरोध को यह कहते हुए खारिज किया कि 'वे इस मुद्दे पर स्तर से नीचे हैं।'
कर्नाटक CM शिवकुमार को भी घेरा
कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार को लेकर श्रीनिवास ने कहा कि यह कहना कि 'ट्रंप उनकी नकल कर रहे हैं', उनके ओहदे के अनुरूप नहीं है। उन्होंने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का अपना स्वतंत्र एजेंडा है और उन्हें किसी का अनुसरण करने की आवश्यकता नहीं। श्रीनिवास ने शिवकुमार से विकासोन्मुखी सोच अपनाने की अपील की।
राहुल गांधी के भोजन संबंधी बयान पर पलटवार
भाजपा नेता ने राहुल गांधी के उस बयान को निशाने पर लिया जिसमें उन्होंने दावा किया था कि भारत में 80 फीसदी से अधिक लोगों की खाद्य-आदतें मांसाहारी हैं। श्रीनिवास ने इसे 'हास्यास्पद' करार देते हुए कहा कि यह पुरानी 'बाँटो और राज करो' की रणनीति का नया संस्करण है, जहाँ अब भोजन को विभाजन का हथियार बनाया जा रहा है।
उन्होंने कहा, 'सभी राज्यों और सभी धर्मों के भारतीय अपनी पसंद का खाना खाने के लिए स्वतंत्र हैं — यहाँ तक कि जहाँ भाजपा सरकार है, उन पूर्वोत्तर राज्यों में भी कुछ नहीं थोपा जाता।' उनके अनुसार, राहुल गांधी और कांग्रेस को भारत-समर्थित विकास एजेंडे पर ध्यान देना चाहिए, न कि ऐसे बयानों से सामाजिक खाई पैदा करनी चाहिए।
राजनीतिक संदर्भ और आगे की राह
यह ऐसे समय में आया है जब ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के इर्द-गिर्द राजनीतिक बयानबाज़ी तेज़ हो गई है। गौरतलब है कि खान-पान और सामाजिक पहचान से जुड़े बयान भारतीय राजनीति में बार-बार विवाद का कारण बनते हैं। आलोचकों का कहना है कि ऐसी बहसें असली मुद्दों — रोज़गार, महंगाई और बुनियादी ढाँचे — से ध्यान हटाती हैं। भाजपा और कांग्रेस दोनों के लिए यह मुद्दा आने वाले दिनों में राजनीतिक प्रचार का केंद्र बना रह सकता है।