राहुल गांधी का मेलोनी बयान 'राजनीतिक मजाक', गंभीरता से न लें: मजीद मेमन
सारांश
मुख्य बातें
वरिष्ठ अधिवक्ता और पूर्व राज्यसभा सांसद मजीद मेमन ने 15 अगस्त को मुंबई में कहा कि इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी को लेकर नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी का बयान महज एक 'राजनीतिक मजाक' है और इसे गंभीरता से नहीं लिया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि इस विवाद को समाचार की तरह पेश करना उचित नहीं है।
मेमन का राहुल गांधी के बयान पर रुख
मेमन ने स्पष्ट शब्दों में कहा, 'ये एक राजनीतिक मजाक है, जैसे कार्टून होते हैं, जैसे एक-दूसरे पर तंज किया जाता है। राहुल गांधी ने भी वही किया। इसे गंभीरता से नहीं लेना चाहिए।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेताओं ने भी इसी प्रकार के बयान दिए हैं, इसलिए आरोप-प्रत्यारोप की यह परंपरा कोई नई बात नहीं है।
सुखबीर सिंह बादल पर हमले की निंदा
शिरोमणि अकाली दल के नेता सुखबीर सिंह बादल पर गुरुद्वारे में हुए हमले पर मेमन ने कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा, 'किसी भी राजनेता पर इस तरह का हमला बिल्कुल सही नहीं है, इसकी निंदा होनी चाहिए।' उन्होंने यह भी कहा कि महाराष्ट्र में पंजाब के एक वरिष्ठ नेता को पर्याप्त सुरक्षा न मिलना दुर्भाग्यपूर्ण है।
मेमन ने महाराष्ट्र के गृह मंत्री को इस चूक के लिए जवाबदेह ठहराते हुए मांग की कि वे पंजाब से सार्वजनिक माफी माँगें। उन्होंने कहा कि राज्य में किसी बड़े नेता की सुरक्षा में इस प्रकार की विफलता को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
वंदे मातरम विवाद पर मेमन का दृष्टिकोण
वंदे मातरम के मुद्दे पर मेमन ने कहा कि यह लगभग 50 वर्षों से चला आ रहा संवेदनशील विषय है। उनके अनुसार वंदे मातरम में कोई आपत्तिजनक बात नहीं है और यह देश की प्रशंसा का गीत है, किंतु इसे जबरन थोपना सरकार की गलती है। यह ऐसे समय में आया है जब राष्ट्रीय प्रतीकों को लेकर बहस एक बार फिर तेज हो गई है।
पेपर लीक और छात्र आंदोलन पर चिंता
झारखंड में छात्रों के विरोध प्रदर्शन पर मेमन ने कहा कि पेपर लीक की समस्या पूरे देश में फैली हुई है और इससे युवाओं के भविष्य को जो नुकसान हुआ है, उसकी भरपाई करना बेहद मुश्किल है। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल शिक्षा मंत्री के इस्तीफे से इस संकट का समाधान नहीं निकलेगा — इसके लिए व्यापक संस्थागत सुधार आवश्यक हैं।