रायसेन-विदिशा से पायलट अभियान: शिवराज सिंह चौहान का हर ग्रामीण परिवार को आजीविका से जोड़ने का लक्ष्य
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय कृषि और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शुक्रवार, 16 अक्टूबर 2026 को अपने संसदीय क्षेत्र विदिशा के प्रवास के दौरान घोषणा की कि रायसेन और विदिशा जिलों से एक पायलट परियोजना की शुरुआत की जा रही है, जिसका मूल उद्देश्य प्रत्येक गाँव के हर परिवार को कम-से-कम एक स्थायी आजीविका से जोड़ना है। इस अभियान का दीर्घकालिक लक्ष्य ग्रामीण क्षेत्रों को गरीबी-मुक्त बनाना और परिवारों की आय के टिकाऊ साधन विकसित करना है।
अभियान का स्वरूप और दायरा
चौहान ने सांची में आयोजित महिला किसान दिवस कार्यक्रम में यह बात कही। इसी दौरान वे प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत 46 सड़कों के भूमिपूजन कार्यक्रम में भी शामिल हुए। उन्होंने स्पष्ट किया कि गरीबी से मुक्ति केवल आर्थिक सहायता वितरण से नहीं, बल्कि परिवारों को रोज़गार और कमाई के ठोस अवसर उपलब्ध कराने से ही संभव होगी।
इस योजना के तहत खेती, कृषि उत्पादों का मूल्य संवर्धन, प्रोसेसिंग, पशुपालन, बकरी पालन, मछली पालन और छोटे व्यवसाय जैसे माध्यमों से परिवारों को आजीविका से जोड़ा जाएगा। यह पायलट परियोजना रायसेन और विदिशा में सफल होने के बाद व्यापक स्तर पर लागू किए जाने की संभावना है।
महिला किसानों को औपचारिक पहचान
चौहान ने इस अवसर पर महिला किसानों की भूमिका को विशेष रूप से रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि खेतों में काम करने से लेकर पशुपालन, दूध उत्पादन, चारा प्रबंधन और पशुओं की देखभाल तक महिलाएँ अनगिनत कार्य करती हैं, फिर भी उन्हें औपचारिक रूप से 'किसान' की पहचान नहीं मिलती। उन्होंने कहा कि जो महिलाएँ अपने हाथों से खेती का काम करती हैं, वे महिला किसान हैं और उन्हें यह पहचान दिलाने के लिए पूरी ताकत से प्रयास किए जाएंगे।
यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में महिला किसानों की पहचान और उनके लिए अलग नीतिगत प्रावधानों की माँग लंबे समय से उठती रही है। गौरतलब है कि राष्ट्रीय कृषि जनगणना के आँकड़ों के अनुसार कृषि श्रमबल में महिलाओं की हिस्सेदारी उल्लेखनीय है, परंतु भूमि स्वामित्व न होने के कारण वे अधिकांश सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित रह जाती हैं।
किसान की परिभाषा पर नया नज़रिया
केंद्रीय मंत्री ने किसान की पारंपरिक परिभाषा पर भी सवाल उठाया। उनके अनुसार किसान की पहचान केवल भूमि के स्वामित्व से नहीं, बल्कि खेती में उसके वास्तविक योगदान के आधार पर होनी चाहिए। जो व्यक्ति खेत का मालिक है किंतु कृषि कार्य में प्रत्यक्ष भागीदारी नहीं करता, उसकी तुलना उस व्यक्ति से नहीं की जा सकती जो मेहनत से खेत में काम करता है। यह बयान नीतिगत दृष्टि से महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह मौजूदा किसान पंजीकरण और लाभ वितरण प्रणाली पर पुनर्विचार का संकेत देता है।
कृषि विविधीकरण पर बल
चौहान ने यह भी कहा कि अनाज उत्पादन के अलावा फल, सब्जियाँ, औषधीय पौधों की खेती, पशुपालन, मछली पालन और मुर्गी पालन भी कृषि की अभिन्न गतिविधियाँ हैं। इन सभी क्षेत्रों में महिलाओं की केंद्रीय भूमिका को देखते हुए उन्हें उचित पहचान और सम्मान मिलना चाहिए। इस विविधीकरण पर जोर देना मध्य प्रदेश के ग्रामीण परिवारों की आय के कई स्रोत विकसित करने की दिशा में एक सोची-समझी रणनीति दिखती है।
आगे की राह
रायसेन और विदिशा से शुरू हो रहा यह पायलट अभियान यदि अपेक्षित परिणाम देता है, तो इसे मध्य प्रदेश के अन्य जिलों और संभवतः राष्ट्रीय स्तर पर भी विस्तारित किया जा सकता है। केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय की मौजूदा योजनाओं — जैसे दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY-NRLM) — के साथ इस पहल के समन्वय की संभावनाएँ भी बनती हैं, हालाँकि इस पर अभी कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण नहीं आया है।