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रायसीना डायलॉग में भारत-स्विट्जरलैंड ने आर्थिक सहयोग को बढ़ाने पर की चर्चा

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रायसीना डायलॉग में भारत-स्विट्जरलैंड ने आर्थिक सहयोग को बढ़ाने पर की चर्चा

सारांश

भारत और स्विट्जरलैंड के बीच रायसीना डायलॉग में आर्थिक सहयोग को मजबूत करने पर चर्चा हुई। यह बैठक विभिन्न क्षेत्रों में संबंधों को और प्रगाढ़ बनाने के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

मुख्य बातें

भारत और स्विट्जरलैंड के बीच आर्थिक सहयोग को बढ़ाने पर चर्चा हुई।
बैठक में विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग को मजबूत करने का फोकस किया गया।
भारत-ईएफटीए समझौते से तकनीकी सहयोग में वृद्धि की उम्मीद है।
दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंध 19वीं सदी से हैं।
स्विट्जरलैंड ने पहले विश्व युद्ध के दौरान वाणिज्य दूतावास स्थापित किए थे।

नई दिल्ली, 6 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। 11वें रायसीना डायलॉग के दौरान, विदेश मंत्रालय में पश्चिम मामलों के सचिव सिबी जॉर्ज ने स्विट्जरलैंड के विदेश मंत्री एलेक्जेंडर फासेल से महत्वपूर्ण मुलाकात की। इस बैठक में विभिन्न क्षेत्रों में आपसी सहयोग को और अधिक मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित किया गया।

बैठक में जॉर्ज और फासेल ने क्षेत्रीय एवं वैश्विक घटनाक्रमों पर भी गहन चर्चा की।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बैठक के पश्चात सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “पश्चिम मामलों के सचिव राजदूत सिबी जॉर्ज ने आज नई दिल्ली में 11वें रायसीना डायलॉग के दौरान स्विट्जरलैंड के विदेश मामलों के राज्य सचिव एलेक्जेंडर फासेल से मुलाकात की। द्विपक्षीय सहयोग को मजबूत करने हेतु विभिन्न क्षेत्रों में विचार-विमर्श हुआ और क्षेत्रीय तथा वैश्विक विकासों पर चर्चा की गई। भारत-ईएफटीए व्यापार और आर्थिक साझेदारी समझौते (टीईपीए) के कार्यान्वयन से तकनीकी सहयोग बढ़ेगा, गुणवत्तापूर्ण निवेश आएगा और रोजगार के अधिक अवसर उत्पन्न होंगे।”

विदेश मंत्रालय के अनुसार, भारत और स्विट्जरलैंड के बीच व्यापारिक संबंध 19वीं सदी की शुरुआत से ही स्थापित हैं। 1851 में, वोलकार्ट ट्रेडिंग कंपनी ने बासेल और मुंबई में अपने कार्यालय स्थापित किए थे।

प्रथम विश्व युद्ध के दौरान, स्विट्जरलैंड ने खाद्य और आर्थिक हितों की सुरक्षा के लिए विश्व के विभिन्न प्रमुख स्थानों में, जिसमें मुंबई भी शामिल था, अपने वाणिज्य दूतावास स्थापित किए।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 2016 और 2018 में स्विट्जरलैंड यात्रा, तथा 2017 में स्विस राष्ट्रपति डोरिस लुथार्ड की भारत यात्रा के बाद, दोनों देशों के संबंधों में नई ऊंचाई आई है।

भारत और स्विट्जरलैंड के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (एफटीए) पर बातचीत अक्टूबर 2008 में शुरू हुई थी और 16 वर्षों में 21 दौर की बातचीत के बाद, अंततः मार्च 2024 में इस समझौते पर हस्ताक्षर किए गए।

इस समझौते के साथ, स्विट्जरलैंड और अन्य यूरोपीय फ्री ट्रेड एसोसिएशन (ईएफटीए) देश जैसे आइसलैंड, लिकटेंस्टाइन और नॉर्वे भारत के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट करने वाले पहले यूरोपीय साझेदार बन गए हैं।

पिछले नवंबर में, केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने स्विट्जरलैंड की आर्थिक मामलों की राज्य सचिव हेलेन बुडलीगर आर्टिएडा के साथ एक बैठक की थी, जिसमें फार्मास्यूटिकल क्षेत्र में निवेश के अवसरों पर चर्चा की गई।

पीयूष गोयल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बताया, “एसईसीओ की राज्य सचिव हेलेन बुडलीगर आर्टिएडा के साथ स्विस फार्मा और बायोटेक कंपनियों के साथ सह-अध्यक्षता में बैठक हुई। चर्चा अनुसंधान एवं विकास (आर एंड डी) में सहयोग बढ़ाने और स्विस फार्मा कंपनियों के लिए भारत के मजबूत स्वास्थ्य क्षेत्र का लाभ उठाने हेतु निवेश के अवसरों को बढ़ाने पर केंद्रित रही।”

उन्होंने आगे कहा कि भारत-ईएफटीए व्यापार और आर्थिक साझेदारी समझौते (टीईपीए) के तहत हुई प्रगति पर भी बात की गई, जिसका उद्देश्य आपसी विकास के लिए प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग को और बढ़ाना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि रोजगार के नए अवसर भी उत्पन्न होंगे।
RashtraPress
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रायसीना डायलॉग क्या है?
रायसीना डायलॉग एक वार्षिक सम्मेलन है जो वैश्विक नीतियों और आर्थिक सहयोग पर चर्चा करने के लिए आयोजित किया जाता है।
भारत और स्विट्जरलैंड के बीच क्या सहयोग है?
भारत और स्विट्जरलैंड के बीच व्यापार, निवेश और तकनीकी सहयोग के कई क्षेत्र हैं, जिसमें फार्मास्यूटिकल और बायोटेक शामिल हैं।
इस बैठक से क्या अपेक्षाएँ हैं?
इस बैठक से दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग को मजबूती मिलेगी और नए निवेश के अवसर उत्पन्न होंगे।
भारत-ईएफटीए समझौता क्या है?
भारत-ईएफटीए समझौता एक व्यापार और आर्थिक साझेदारी समझौता है, जो भारत और यूरोपीय फ्री ट्रेड एसोसिएशन के बीच है।
क्या इस बैठक का कोई ऐतिहासिक महत्व है?
जी हाँ, यह बैठक भारत-स्विट्जरलैंड संबंधों में एक नया अध्याय जोड़ने का कार्य करेगी।
राष्ट्र प्रेस
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