क्या वफादारी बिकती है, लेकिन बालासाहेब की विरासत पीढ़ियों तक रहेगी? राज ठाकरे
सारांश
Key Takeaways
- बालासाहेब ठाकरे की विरासत और प्रभाव महत्वपूर्ण हैं।
- वफादारी और उसूलों का महत्व बदल गया है।
- मराठी अस्मिता के लिए लड़ाई जारी रहनी चाहिए।
- राज ठाकरे ने बालासाहेब के लिए अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की।
- राजनीति में लचीलापन भी जरूरी हो सकता है।
मुंबई, 23 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के प्रमुख राज ठाकरे ने शिवसेना के संस्थापक स्वर्गीय बालासाहेब ठाकरे की जयंती पर एक मार्मिक संदेश प्रस्तुत किया। उन्होंने बालासाहेब की शख्सियत, उनके राजनीतिक दृष्टिकोण, मराठी पहचान के प्रति उनके अटूट प्रेम और वर्तमान राजनीतिक स्थिति पर गंभीर टिप्पणी की।
राज ठाकरे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा करते हुए कहा, "आज स्वर्गीय बालासाहेब की 100वीं जयंती है। इतिहास में कई लोगों ने उनकी जन्म शताब्दी मनाई है और मनाएंगे, लेकिन बहुत कम ऐसा होता है कि कोई व्यक्ति जिंदा न रहने पर भी लोगों की यादों में बना रहे और वह व्यक्ति आज भी किसी प्रांत की राजनीति और सामाजिक मामलों को आकार दे रहा हो। ऐसा केवल बालासाहेब के मामले में ही संभव है। और इसलिए, मुझे पूरा विश्वास है कि बालासाहेब केवल 100 साल बाद ही नहीं, बल्कि अपने जन्म के दो सौवें साल में भी लोगों की यादों में बने रहेंगे। तब बालासाहेब को याद करने वाले मराठी लोग बंटे नहीं, टूटे नहीं, कुचले नहीं और जो चुपचाप अन्याय सहते हैं।"
मनसे प्रमुख ने कहा कि आज वफादारी आसानी से बिक जाती है। उसूल फेंक दिए जाते हैं और राजनीति पूरी तरह से प्रैक्टिकल हो गई है। आज राजनीति में सफलता इस बात से मापी जाती है कि चुनावी राजनीति में कितनी सफलता मिली और इसके लिए क्या-क्या हथकंडे अपनाए गए, न कि इस बात से कि कौन से मुद्दे सामने लाए गए, कितनी क्षेत्रीय और भाषाई पहचान जिंदा रखी गई। बालासाहेब के समय में ऐसी कोई उम्मीद नहीं थी और अगर होती भी, तो उन्होंने उम्मीद छोड़ दी होती। उन्हें खुद सत्ता पसंद नहीं थी, लेकिन आम कार्यकर्ताओं को सत्ता की पोजीशन पर बिठाकर उन्हें संतोष मिलता था। सत्ता आती-जाती रहती है। आज के शासक कल भले ही नाम के नाम रह जाएं, लेकिन बहुत कम लोग ऐसा असर डाल पाते हैं जो पीढ़ियों तक रहे। यही असर बालासाहेब की ताकत थी और यही उनकी विरासत है।
उन्होंने कहा कि बालासाहेब एक विजनरी थे। उनका विजन आज भी प्रासंगिक लगता है और भविष्य में भी प्रासंगिक रहेगा। इसीलिए वे टाइमलेस रहेंगे। यह सच है कि बालासाहेब जैसा टैलेंट हमें दोबारा कभी नहीं दिखेगा, उतना ही यह भी सच है कि बालासाहेब जैसी पॉलिटिक्स अब कोई नहीं कर पाएगा। लेकिन, यह बालासाहेब की आने वाली पीढ़ियों के हाथ में है कि वे देखें कि उनकी इमेज को कहीं कोई नुकसान न पहुंचे और मराठी भाषा और मराठी लोगों के लिए उन्होंने जो लड़ाई लड़ी, वह जलती रहे। और हम इसे मजबूती से करेंगे, यह मराठी लोगों से हमारा वादा है।
राज ठाकरे ने कहा कि भले ही बालासाहेब को कभी-कभी राजनीति में लचीला रुख अपनाना पड़ा, लेकिन मराठी लोगों के लिए उनका प्यार जरा भी कम नहीं हुआ, बल्कि और मजबूत हो गया। ये वैल्यूज़ हमारे साथ हैं। मैं आज एक बात दोहराता हूं कि अगर वे कभी पूरी तरह से बदली हुई राजनीति में लचीला रुख अपनाते भी हैं, तो यह कभी भी मेरे व्यक्तिगत फायदे या मतलब के लिए नहीं होगा।
राज ठाकरे ने आगे कहा कि मैं उन हजारों लोगों में से एक हूं जो बालासाहेब के मराठी भाषा, मराठी इलाके और मराठी लोगों के लिए गहरा प्यार देखकर उनके साथ आए थे। इसलिए, 'बालासाहेब' और 'मराठी' इन दो शब्दों और मेरे महाराष्ट्र के सैनिकों के लिए मेरा भरोसा और प्यार जरा भी कम नहीं होगा। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना की तरफ से स्वर्गीय बालासाहेब की याद में विनम्र श्रद्धांजलि।