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राजस्थान प्राकृतिक खेती मिशन में देशभर में दूसरा स्थान, 2.12 लाख किसान पंजीकृत

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राजस्थान प्राकृतिक खेती मिशन में देशभर में दूसरा स्थान, 2.12 लाख किसान पंजीकृत

सारांश

क्लस्टर निर्माण में दूसरा, किसान पंजीकरण में तीसरा — राजस्थान प्राकृतिक खेती के राष्ट्रीय मानचित्र पर तेज़ी से उभर रहा है। 2,380 क्लस्टर, 2.12 लाख किसान और 91,166 हेक्टेयर ज़मीन के साथ, राज्य ने ₹49.97 करोड़ की प्रतिबद्धता के साथ 'मिशन मोड' में काम शुरू कर दिया है।

मुख्य बातें

राजस्थान नेशनल मिशन ऑन नेचुरल फार्मिंग में क्लस्टर निर्माण में दूसरे और किसान पंजीकरण में तीसरे स्थान पर है।
राज्य में 2,380 प्राकृतिक खेती क्लस्टर बने, 2,12,346 किसान पंजीकृत और 91,166 हेक्टेयर भूमि पर प्राकृतिक खेती शुरू।
सरकार ने 2025-26 तक ₹49.97 करोड़ खर्च का प्रावधान किया; लक्ष्य 2.5 लाख किसान और 1 लाख हेक्टेयर तक विस्तार।
'गोवर्धन ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर स्कीम' के तहत 50,000 किसानों को ₹10,000 और बैल-खेती करने वालों को ₹30,000 का प्रोत्साहन।
नीति आयोग की रिपोर्ट के अनुसार प्राकृतिक खेती अपनाने वाले 91% किसानों का उत्पादन बढ़ा और 90% की लागत घटी।
जोबनेर कृषि विश्वविद्यालय में 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर नेचुरल फार्मिंग' की स्थापना 2025-26 बजट में प्रस्तावित।

राजस्थान के मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) के अधिकारियों ने 30 जुलाई 2026 को बताया कि राज्य नेशनल मिशन ऑन नेचुरल फार्मिंग (राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन) को लागू करने में देश के शीर्ष राज्यों में शामिल हो गया है। क्लस्टर निर्माण में दूसरा और किसान पंजीकरण में तीसरा स्थान हासिल करते हुए राजस्थान ने टिकाऊ कृषि के क्षेत्र में एक उल्लेखनीय उपस्थिति दर्ज कराई है।

मुख्य उपलब्धियाँ

अब तक राज्य में 2,380 प्राकृतिक खेती क्लस्टर गठित किए जा चुके हैं — यह संख्या केवल आंध्र प्रदेश के बाद सर्वाधिक है। मिशन के अंतर्गत 2,12,346 किसानों का पंजीकरण हो चुका है, जिसमें राजस्थान आंध्र प्रदेश और उत्तर प्रदेश के बाद तीसरे स्थान पर है। इसके अतिरिक्त 91,166 हेक्टेयर कृषि भूमि पर प्राकृतिक खेती का विस्तार हो चुका है।

सरकार की वित्तीय प्रतिबद्धता

राज्य सरकार ने मिशन के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए 2025-26 तक ₹49.97 करोड़ व्यय का प्रावधान किया है। इसके साथ ही सरकार 2.5 लाख किसानों को जोड़कर प्राकृतिक खेती का दायरा 1 लाख हेक्टेयर तक ले जाने की दिशा में 'मिशन मोड' में काम कर रही है।

'गोवर्धन ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर स्कीम' के तहत राज्य के 50,000 किसानों को जैविक खाद निर्माण के लिए ₹10,000 की आर्थिक सहायता दी जा रही है। इसके अलावा, बैलों से खेती करने वाले किसानों को ₹30,000 का प्रोत्साहन अनुदान भी दिया जा रहा है। राज्य की गौशालाओं में गायों के लिए ₹2,856 करोड़ की अनुदान राशि स्वीकृत की गई है।

बाज़ार और शोध अवसंरचना

जोधपुर, कोटा और उदयपुर में जैविक उत्पादों की बिक्री के लिए समर्पित बाज़ार विकसित किए जा रहे हैं, जिससे किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिल सके। 2025-26 के बजट में जोबनेर कृषि विश्वविद्यालय में 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर नेचुरल फार्मिंग' की स्थापना का प्रावधान शामिल है, जो शोध, प्रशिक्षण और नवाचार का केंद्र बनेगा।

राष्ट्रीय मिशन का संदर्भ

गौरतलब है कि राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन की शुरुआत 25 नवंबर 2024 को की गई थी। इसका उद्देश्य रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता घटाना, मिट्टी की सेहत सुधारना और किसानों की आय बढ़ाना है। मिशन के तहत देशभर में 527 कृषि विज्ञान केंद्र, 76 कृषि विश्वविद्यालय, 194 स्थानीय प्राकृतिक खेती संस्थान और 18 सेंटर ऑफ एक्सीलेंस किसानों को प्रशिक्षण दे रहे हैं। केंद्र सरकार किसानों को दो वर्षों तक प्रतिवर्ष प्रति एकड़ ₹4,000 की प्रोत्साहन राशि भी प्रदान कर रही है।

विशेषज्ञ मूल्यांकन और आगे की राह

नीति आयोग की एक मूल्यांकन रिपोर्ट के अनुसार, प्राकृतिक खेती अपनाने वाले लगभग 91 प्रतिशत किसानों के उत्पादन में वृद्धि दर्ज की गई, जबकि लगभग 90 प्रतिशत किसानों की उत्पादन लागत में कमी आई। मिट्टी की उर्वरता में भी उल्लेखनीय सुधार देखा गया है। यह मिशन पर्यावरण संरक्षण, किसानों की आय वृद्धि और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक स्वस्थ कृषि व्यवस्था की दिशा में महत्त्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। राजस्थान की यह प्रगति 'विकसित भारत' और 'विकसित राजस्थान' के लक्ष्यों की दिशा में एक ठोस आधार तैयार कर रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी पंजीकरण की संख्या नहीं, बल्कि किसानों की आय में वास्तविक बदलाव है। नीति आयोग के आँकड़े उत्साहजनक हैं, फिर भी यह स्पष्ट नहीं है कि ये नतीजे राजस्थान की भौगोलिक और जलवायु परिस्थितियों — जहाँ वर्षा अनिश्चित और भूजल सीमित है — में कितने टिकाऊ हैं। ₹49.97 करोड़ का बजट प्रावधान 2.5 लाख किसानों के लक्ष्य के सापेक्ष बेहद कम दिखता है; प्रति किसान यह राशि महज़ ₹2,000 के करीब बैठती है। जब तक जोबनेर का 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस' ज़मीनी प्रशिक्षण और बाज़ार-संपर्क को एक साथ नहीं जोड़ता, रैंकिंग की यह दौड़ किसानों के खेत तक पहुँचने से पहले ही थम सकती है।
RashtraPress
30 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राजस्थान नेशनल मिशन ऑन नेचुरल फार्मिंग में किस स्थान पर है?
राजस्थान क्लस्टर निर्माण में देश में दूसरे और किसान पंजीकरण में तीसरे स्थान पर है। राज्य में 2,380 क्लस्टर बने हैं और 2,12,346 किसान पंजीकृत हो चुके हैं।
राजस्थान में प्राकृतिक खेती मिशन के तहत किसानों को क्या सुविधाएँ मिल रही हैं?
'गोवर्धन ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर स्कीम' के तहत 50,000 किसानों को ₹10,000 की सहायता दी जा रही है। बैलों से खेती करने वाले किसानों को ₹30,000 का प्रोत्साहन और केंद्र सरकार की ओर से दो वर्षों तक प्रतिवर्ष प्रति एकड़ ₹4,000 की राशि भी दी जा रही है।
राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन कब शुरू हुआ और इसका उद्देश्य क्या है?
यह मिशन 25 नवंबर 2024 को शुरू किया गया था। इसका उद्देश्य रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करना, मिट्टी की सेहत सुधारना और किसानों की आय बढ़ाना है।
प्राकृतिक खेती अपनाने से किसानों को क्या फायदा हुआ है?
नीति आयोग की मूल्यांकन रिपोर्ट के अनुसार, प्राकृतिक खेती अपनाने वाले लगभग 91 प्रतिशत किसानों के उत्पादन में वृद्धि हुई और 90 प्रतिशत किसानों की उत्पादन लागत में कमी आई।
राजस्थान सरकार प्राकृतिक खेती के लिए आगे क्या करने की योजना बना रही है?
सरकार 2.5 लाख किसानों को जोड़कर प्राकृतिक खेती का दायरा 1 लाख हेक्टेयर तक बढ़ाना चाहती है। जोधपुर, कोटा और उदयपुर में जैविक उत्पादों के लिए बाज़ार बनाए जा रहे हैं और जोबनेर कृषि विश्वविद्यालय में 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर नेचुरल फार्मिंग' की स्थापना 2025-26 बजट में प्रस्तावित है।
राष्ट्र प्रेस
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