राजेंद्र पाल गौतम: केजरीवाल तानाशाही प्रवृत्तियों के प्रतीक, सामाजिक न्याय की अनदेखी करते हैं
सारांश
Key Takeaways
- अरविंद केजरीवाल की तानाशाही प्रवृत्तियां पार्टी के लिए खतरा बन गई हैं।
- राजेंद्र पाल गौतम ने सामाजिक न्याय की अनदेखी का आरोप लगाया है।
- पार्टी के भीतर आंतरिक संघर्ष बढ़ रहे हैं।
नई दिल्ली, 4 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। राज्यसभा सांसद और आम आदमी पार्टी (आप) के वरिष्ठ नेता राघव चड्ढा को सदन में उपनेता पद से हटाए जाने के बाद राजनीतिक बयानबाजी में बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। इसी बीच, शनिवार को पूर्व 'आप' मंत्री राजेंद्र पाल गौतम ने पार्टी पर तीखा हमला किया।
राजेंद्र पाल गौतम ने समाचार एजेंसी राष्ट्र प्रेस से बातचीत करते हुए कहा, "पार्टी का अस्तित्व समाप्त हो चुका है। पार्टी के भीतर कई तरह के विवाद चल रहे हैं। अरविंद केजरीवाल एक बड़े तानाशाह हैं। वह सामाजिक न्याय में विश्वास नहीं रखते। उन्हें देश के गरीबों, पिछड़ों और अल्पसंख्यकों से केवल वोट की चिंता है। केजरीवाल उन्हें सिर्फ वोट बैंक मानते हैं। पार्टी में कोई भी केजरीवाल के सामने अपनी बात नहीं रख सकता।"
उन्होंने आगे कहा, "मैं अकेला ऐसा व्यक्ति था, जो केजरीवाल के सामने सामाजिक न्याय की बात करता था। उन्हें बताया था कि हमारे शिक्षा संस्थानों में फीस लाखों में है। दलित, आदिवासी और गरीब बच्चे पढ़ाई छोड़ने को मजबूर हैं। इतने बड़े बजट में से उनके लिए 150 करोड़ रुपए आवंटित करने की मांग की थी, लेकिन केजरीवाल ने इसे नकार दिया।"
राजेंद्र पाल गौतम ने कहा, "मैंने कहा कि हमारी सरकार दलित और मुस्लिम वोटों के आधार पर बनी है। जब राज्यसभा में प्रतिनिधित्व का अवसर है, तो उन्हें भी प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए, लेकिन उन्होंने मेरी बात नहीं सुनी। पार्टी के भीतर कोई भी केजरीवाल को इस नजरिए से नहीं देखता कि वह सामाजिक न्याय के लिए कुछ कर सकते हैं। जब मैंने अकेले यह बात की, तो यह उन्हें चुभने लगा।"
उन्होंने कहा, "जहां तक राघव चड्ढा की बात है, वह समझौता कर चुके हैं, जैसे कि दिल्ली महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष स्वाति मालीवाल थीं। ऐसे में पार्टी का खत्म होना निश्चित है, इसे कोई बचा नहीं पाएगा। भाजपा जानबूझकर केजरीवाल और उनकी पार्टी को जीवित रखे हुए है, क्योंकि केजरीवाल खुद समझौता कर चुके हैं। वर्तमान में आम आदमी पार्टी (आप) भाजपा की बी टीम बन चुकी है।"
राजेंद्र पाल गौतम ने व्यंग्य करते हुए कहा, "राघव चड्ढा आधिकारिक रूप से नहीं, लेकिन भाजपा में शामिल हो चुके हैं, जैसे कि स्वाति मालीवाल ने किया था। वे दोनों नेता केवल अपनी सदस्यता बचाने के लिए मजबूरी में 'आप' में हैं। ऐसे और भी कई नेता हो सकते हैं।"