क्या सरकार वास्तव में किसी को परेशान नहीं कर रही? रामदास आठवले का बयान
सारांश
Key Takeaways
- कानूनी कार्रवाई पूरी तरह से जांच के आधार पर हो रही है।
- सरकार का उद्देश्य किसी को परेशान करना नहीं है।
- नेशनल हेराल्ड एक बार कांग्रेस का अखबार था।
- संसद में पारदर्शिता और लोकतांत्रिक तरीके से मुद्दों का उठाना महत्वपूर्ण है।
- कानून सभी के लिए समान है।
मुंबई, 30 नवंबर (राष्ट्र प्रेस)। केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने नेशनल हेराल्ड मामले में राहुल गांधी और सोनिया गांधी के खिलाफ दर्ज नई एफआईआर पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यह मामला कानूनी है और इसमें सरकार का कोई संबंध नहीं है। रामदास आठवले ने यह स्पष्ट किया कि भारत सरकार का उद्देश्य किसी को भी परेशान करना नहीं है, चाहे वह सोनिया गांधी हों या राहुल गांधी। उनका कहना था कि जो भी कानूनी कार्रवाई की गई है, वह जांच के तहत हुई है।
उन्होंने बताया कि नेशनल हेराल्ड पहले कांग्रेस पार्टी का अखबार था और इसी संदर्भ में एफआईआर दर्ज की गई है। उनका कहना था कि अगर किसी ने कोई गलती की है, तो कानून के अनुसार उस पर कार्रवाई होगी। इसमें किसी राजनीतिक दबाव या सरकार की संलिप्तता का कोई सवाल नहीं है।
रामदास आठवले ने संसद के शीतकालीन सत्र पर कहा कि पूरे साल में संसद के चार सत्र होते हैं और हर सत्र से पहले सर्वदलीय बैठक आयोजित की जाती है। इस दौरान सभी दलों से आग्रह किया जाता है कि सत्र को सुचारू रूप से चलाने के लिए सहयोग करें।
उन्होंने कहा कि संसद में सभी मुद्दों को पारदर्शिता और लोकतांत्रिक तरीके से उठाना चाहिए। कोई भी मामला व्यक्तिगत या राजनीतिक नहीं होना चाहिए। हंगामा करना, जोर-जबरदस्ती या डराना-धमकाना उचित नहीं है। कानून और प्रक्रिया का पालन करना सबसे महत्वपूर्ण है। शांति से और नियमों के अनुसार लोकतंत्र में सभी की आवाज को सुना जाता है।
वहीं, पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी ने भी नेशनल हेराल्ड मनी लॉन्ड्रिंग मामले पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि सोनिया गांधी के खिलाफ साजिश का आरोप लगाया गया है और यह केस दिल्ली पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर का हिस्सा है। इसमें छह लोगों के खिलाफ मामला चल रहा है, जिनमें गांधी परिवार के सदस्य भी शामिल हैं।
सुवेंदु अधिकारी ने यह भी स्पष्ट किया कि देश में कानून सभी के लिए बराबर है। चाहे वह बड़ा नेता हो, छोटा नेता, आईएएस या आईपीएस अधिकारी, किसान हो या शहरी नागरिक, सभी के लिए नियम समान हैं। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में हर वोट का महत्व समान है। कानून के सामने किसी भी प्रकार का भेदभाव नहीं होना चाहिए। जो भी जांच हुई है, उसके दस्तावेज उपलब्ध हैं और उसी आधार पर कार्रवाई की जाएगी।