तेजस्वी यादव के गरीब राज्य वाले बयान पर रामकृपाल यादव की प्रतिक्रिया
सारांश
Key Takeaways
- बिहार के मंत्री ने तेजस्वी यादव के बयान की आलोचना की।
- राज्य को गरीब बताना राजनीतिक जिम्मेदारियों से भागने जैसा है।
- पंजाब में धमाके की गहन जांच की मांग की गई।
- प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में युद्ध रोकने के प्रयास जारी हैं।
- प्रधानमंत्री की व्यस्तता का उल्लेख किया गया।
पटना, 2 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। बिहार सरकार के मंत्री रामकृपाल यादव ने पंजाब में भाजपा कार्यालय के सामने हुए बम धमाके और तेजस्वी यादव द्वारा बिहार को सबसे गरीब राज्य बताने के बयान पर अपनी प्रतिक्रिया दी।
31 मार्च को केरल में चुनाव प्रचार के दौरान नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने बिहार को देश का सबसे गरीब राज्य कहा। तेजस्वी ने केरल की उच्च साक्षरता दर, बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं और मजबूती से विकसित इन्फ्रास्ट्रक्चर का जिक्र करते हुए कहा कि बिहार को भी इसी दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।
तेजस्वी यादव के इस बयान पर मंत्री रामकृपाल यादव ने राष्ट्र प्रेस से बातचीत में कहा, "तेजस्वी यादव अपने राज्य की समस्याओं की चर्चा कर रहे हैं और बिहार को गरीब बताकर अपनी ज़िम्मेदारियों से भाग रहे हैं। तेजस्वी के गुरु राहुल गांधी जब विदेश जाते हैं, तो अपने देश को नीचा दिखाते हैं, जबकि तेजस्वी यादव दूसरे राज्यों में अपने राज्य को गरीब बताकर स्थिति को और बिगाड़ रहे हैं। कुंठित मानसिकता से राजनीति नहीं करनी चाहिए, बल्कि उन्हें अपने राज्य में अपनी जिम्मेदारियां निभानी चाहिए। मेरा मानना है कि यह दृष्टिकोण न तो राज्य के हित में है और न ही उनके व्यक्तिगत हित में।"
रामकृपाल ने पंजाब में भाजपा कार्यालय के सामने हुए धमाके को दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उन्होंने कहा, "इस धमाके की गहन जांच होनी चाहिए और जो भी दोषी हों उन पर कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए। इसके साथ भाजपा कार्यालय की सुरक्षा को भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए।"
उन्होंने कहा, "प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में खाड़ी देशों में चल रहे युद्ध को रोकने के लिए कई प्रयास किए जा रहे हैं। प्रधानमंत्री ने इस मुद्दे को गंभीरता से लिया है, इसलिए हाल ही में उन्होंने मंत्रियों के साथ बैठक की और इस समस्या का समाधान निकालने के लिए विस्तार से चर्चा की। प्रधानमंत्री के कुशल नेतृत्व ने अभी तक पेट्रोलियम पदार्थों और गैस की आपूर्ति को नियंत्रित रखा है, जिससे उपभोक्ताओं को कोई कठिनाई नहीं हो रही है।"
उन्होंने कहा, "प्रधानमंत्री देश के मुखिया होते हैं और वह अनेक जिम्मेदारियों में व्यस्त रहते हैं। इससे पहले भी कई प्रधानमंत्री सर्वदलीय बैठकों में शामिल नहीं हो पाते थे।"